मणिपुर हिंसा पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार ने जारी किए 947 करोड़ रुपए से अधिक — राहत और पुनर्वास को मिली बड़ी रफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर हिंसा पीड़ितों के लिए कुल 947 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की है।
- राहत शिविरों के संचालन के लिए 424.36 करोड़ और विस्थापितों के पुनर्वास के लिए 523 करोड़ रुपए अलग-अलग मंजूर किए गए हैं।
- 3 मई 2023 से अब तक 58,881 लोग विस्थापित हुए और 217 मौतें दर्ज की गई हैं।
- 7,894 मकान पूरी तरह नष्ट और 2,646 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं; 3,000 पूर्वनिर्मित घर बनाए गए हैं।
- 10 मार्च 2026 तक 174 राहत शिविर सक्रिय थे।
- 2026-27 बजट में पुनर्वास के लिए 734 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
इंफाल, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने मणिपुर में जातीय हिंसा से तबाह हुए लोगों की राहत और पुनर्वास के लिए कुल 947 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की है। यह खुलासा मणिपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरेश्वर गोस्वामी द्वारा दायर एक आरटीआई (RTI) याचिका के जवाब में हुआ है। 3 मई 2023 से शुरू हुई इस हिंसा ने राज्य को गहरे घाव दिए हैं और अब तक 58,881 लोग अपने घर-गांव छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं।
राहत शिविरों के लिए 424 करोड़ और पुनर्वास के लिए 523 करोड़ की मंजूरी
राज्य गृह विभाग के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिंसा प्रभावित लोगों को आश्रय देने के लिए संचालित राहत शिविरों हेतु 424.36 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इसके अतिरिक्त, आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDP — Internally Displaced Persons) के दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए 523 करोड़ रुपए अलग से जारी किए गए हैं।
10 मार्च 2026 तक राज्य में 174 राहत शिविर सक्रिय रूप से कार्यरत थे। इन शिविरों में विस्थापित पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। विस्थापितों को अस्थायी छत देने के लिए मणिपुर पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPHCL) द्वारा 3,000 पूर्वनिर्मित (prefabricated) घर तैयार किए गए हैं।
217 मौतें दर्ज, 7,894 मकान पूरी तरह तबाह
आरटीआई के जवाब में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि हिंसा में 217 लोगों की मौत हुई है — यह संख्या मृतकों के परिजनों को किए गए अनुग्रह भुगतान (ex-gratia payment) के आधार पर दर्ज की गई है। संपत्ति के नुकसान का पैमाना भी भयावह है: 3 मई 2023 से अब तक 7,894 स्थायी मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जबकि 2,646 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
गौरतलब है कि यह हिंसा पहाड़ी जिलों में आयोजित आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच भड़की थी। यह मार्च मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में निकाला गया था।
मणिपुर की जनसांख्यिकीय पृष्ठभूमि और संघर्ष की जड़ें
मणिपुर की कुल आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा मैतेई समुदाय से है, जो मुख्यतः इम्फाल घाटी के पांच-छह जिलों में बसा है। वहीं नागा और कुकी सहित अन्य आदिवासी समुदाय लगभग 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और राज्य के 11 पहाड़ी जिलों में निवास करते हैं। इन दो समुदायों के बीच भूमि, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकारी लाभों को लेकर वर्षों से तनाव रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल जातीय नहीं बल्कि आर्थिक और भू-राजनीतिक भी है — पहाड़ी क्षेत्रों में वन भूमि और संसाधनों पर नियंत्रण इस विवाद की एक बड़ी वजह रही है।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता और 2026-27 बजट में प्रावधान
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने स्पष्ट किया है कि विस्थापितों का पुनर्वास और पुनर्स्थापन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने स्थायी आवास निर्माण, व्यक्तिगत संपत्तियों के नुकसान की भरपाई और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत के लिए पर्याप्त सहयोग दिया है।
इसके साथ ही 2026-27 के राज्य बजट में पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्रयासों को और तेज करने के लिए 734 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। शुरुआत में राज्य सरकार ने 300 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए थे, जिनमें करीब 60,000 विस्थापितों को रखा गया था। स्थिति में क्रमिक सुधार के साथ कई परिवार अपने घरों को लौट चुके हैं।
तीन साल बाद भी मणिपुर में सामान्य स्थिति की बहाली एक लंबी और जटिल प्रक्रिया बनी हुई है। आने वाले महीनों में विस्थापितों की घर-वापसी, स्थायी आवास निर्माण की गति और दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाली की कोशिशें यह तय करेंगी कि मणिपुर कितनी जल्दी पटरी पर लौट सकता है।