पैरीमैच सट्टेबाजी जांच: ईडी ने चार राज्यों में 12 ठिकानों पर छापे मारे, ₹112 करोड़ की संपत्ति जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार, 2 सितंबर को अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पैरीमैच से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार राज्यों के 12 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई और इसमें ₹1.56 करोड़ की चल संपत्ति जब्त की गई तथा विभिन्न बैंक खातों में जमा ₹3.8 करोड़ फ्रीज किए गए।
छापेमारी का दायरा और स्थान
ईडी की यह तलाशी महाराष्ट्र (5 स्थान), दिल्ली-एनसीआर (4 स्थान), राजस्थान (2 स्थान) और गुजरात (1 स्थान) में की गई। तलाशी में लिए गए परिसर उन भुगतान कंपनियों से जुड़े थे, जिन पर कथित तौर पर कैश मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) एजेंटों के माध्यम से सट्टेबाजी की रकम को नकद में बदलने का आरोप है।
गौरतलब है कि यह ताज़ा अभियान इसी वर्ष मई में ईडी के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, दमन और उत्तर प्रदेश में 17 ठिकानों पर की गई छापेमारी के कुछ महीनों बाद आया है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी भी जांच के घेरे में
तलाशी अभियान में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) और कंपनी सेक्रेटरी के परिसर भी शामिल रहे, जिन्होंने कथित तौर पर अवैध धन प्रेषण और फर्जी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (ओडीआई) लेनदेन के जरिए देश से बाहर रकम भेजने में सहायता की। जांच के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए।
पैरीमैच का कथित संचालन तंत्र
जांच में सामने आया कि पैरीमैच और उसके सहयोगी कथित तौर पर 'म्यूल अकाउंट्स', भुगतान मध्यस्थों और वित्तीय समावेशन चैनलों के एक जटिल नेटवर्क के जरिए यूजर्स का धन एकत्र कर उसे कई स्तरों पर स्थानांतरित करते थे। जांच टीम के अनुसार, प्लेटफॉर्म ने अधिक रिटर्न का वादा कर निवेशकों को लुभाया और एक वर्ष में ₹3,000 करोड़ से अधिक की कमाई की।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। पैरीमैच ने नए यूजर्स को जोड़ने के लिए कथित तौर पर प्रमुख क्विक-कॉमर्स एप्लिकेशन के जरिए विज्ञापन दिए और ग्रोसरी डिलीवरी के साथ प्रमोशनल सामग्री भी बांटी।
जांच का आधार और अब तक की जब्ती
ईडी ने यह जांच मुंबई साइबर थाने में पैरीमैच.कॉम के खिलाफ ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए यूजर्स को कथित तौर पर धोखा देने के आरोप में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल ₹112 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। आगे की जांच जारी है।