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मणिपुर विधानसभा में कुकी-ज़ो विधायकों की वापसी: तीन साल बाद पहली बार व्यक्तिगत उपस्थिति

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मणिपुर विधानसभा में कुकी-ज़ो विधायकों की वापसी: तीन साल बाद पहली बार व्यक्तिगत उपस्थिति

सारांश

तीन साल से अधिक के अंतराल के बाद कुकी-ज़ो समुदाय के दो विधायक मणिपुर विधानसभा में व्यक्तिगत रूप से लौटे — यह प्रतीकात्मक कदम तब आया जब KIM ने सत्र में शामिल न होने का निर्देश दिया था। शांति की दिशा में संकेत, लेकिन अलग प्रशासन की माँग अभी भी अनसुलझी।

मुख्य बातें

हाओखोलेट किपगेन (सैतु) और किमनेओ हाओकिप हैंगशिंग (साइकुल) 2 सितंबर 2026 को मणिपुर विधानसभा में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए — 3 मई 2023 की जातीय हिंसा के बाद पहली बार।
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने इस सत्र में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इसे 'स्वागत योग्य कदम' बताया और शांति-सुलह प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने 31 अगस्त को विधायकों को इम्फाल न जाने का निर्देश दिया था, अलग प्रशासन की माँग के समाधान तक।
4 फरवरी 2026 को BJP सरकार गठन के बाद से कुछ कुकी-ज़ो विधायक केवल वर्चुअल माध्यम से सत्र में शामिल हो रहे थे।

मणिपुर विधानसभा के 12वें सत्र के आठवें सत्र में 2 सितंबर 2026 को एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब कुकी-ज़ो समुदाय के दो विधायक 3 मई 2023 को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद पहली बार इम्फाल में विधानसभा की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए। यह उपस्थिति तीन साल से अधिक के अंतराल के बाद दर्ज की गई है, जो राज्य में चल रहे संकट के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत मानी जा रही है।

कौन-से विधायक हुए शामिल

सैतु विधानसभा क्षेत्र से विधायक हाओखोलेट किपगेन और साइकुल विधानसभा क्षेत्र से विधायक किमनेओ हाओकिप हैंगशिंग बुधवार को सत्र की पहली बैठक में उपस्थित रहे। विधानसभा में प्रवेश करते हुए हाओखोलेट किपगेन ने कहा कि वह लंबे समय बाद विधानसभा सत्र में भाग लेने के लिए वापस आकर खुश हैं। हालाँकि, उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने इस सत्र में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए इसे राज्य में एकता और शांति को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा, 'जन प्रतिनिधियों की ओर से यह एक अच्छा संकेत है और यह एक स्वागत योग्य कदम है।' मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयासों से मणिपुर शांति और सुलह के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।

खेमचंद सिंह ने इस प्रगति का श्रेय राज्य सरकार के विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास की कमी दूर करने और मुद्दों को सुलझाने के निरंतर प्रयासों को दिया। उन्होंने हिंसाग्रस्त राज्य में समावेशी संवाद, सुलह और स्थायी शांति की बहाली के प्रति अपने प्रशासन की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

पृष्ठभूमि: तीन साल का अंतराल

गौरतलब है कि 3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से कुकी-ज़ो समुदाय के प्रतिनिधियों ने इम्फाल में विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेना बंद कर दिया था। 4 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के गठन के बाद, कुछ कुकी-ज़ो विधायकों ने पिछली विधानसभा बैठकों में केवल वर्चुअल माध्यम से भाग लिया था। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में शांति प्रक्रिया अभी भी नाजुक दौर में है।

कुकी इनपी मणिपुर का विरोध

कुकी आदिवासी समुदाय की सर्वोच्च संस्था कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने 31 अगस्त को सभी कुकी-ज़ो विधायकों को निर्देश जारी किया था, जिसमें उनसे कुकी-ज़ो लोगों की अलग प्रशासन की माँग का राजनीतिक समाधान होने तक आठवें सत्र में भाग लेने के लिए इम्फाल की यात्रा न करने को कहा गया था।

KIM ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि मणिपुर विधानसभा में कुकी-ज़ो विधायकों की भागीदारी ऐसे समय में होना, जब कुकी-ज़ो लोगों के भविष्य से संबंधित मूलभूत राजनीतिक प्रश्न अनसुलझे हैं, उनकी सामूहिक राजनीतिक स्थिति और आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं होगी। संस्था ने यह भी कहा कि एक अलग राजनीतिक प्रशासन की माँग को सामान्य विधायी कार्यवाही फिर से शुरू करते समय दरकिनार नहीं किया जा सकता।

आगे की राह

दो विधायकों की व्यक्तिगत उपस्थिति को एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन KIM के विरोध के मद्देनज़र यह स्पष्ट नहीं है कि शेष कुकी-ज़ो विधायक भविष्य में इसी राह पर चलेंगे या नहीं। मणिपुर में स्थायी शांति और राजनीतिक समाधान की दिशा में यह पहला कदम है, और आने वाले सत्रों में इस प्रक्रिया की दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे शांति की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी — KIM के स्पष्ट निर्देश की अवज्ञा यह भी दर्शाती है कि कुकी-ज़ो नेतृत्व के भीतर एकमत नहीं है। असली सवाल यह है कि अलग प्रशासन की माँग — जो तीन साल की हिंसा और विस्थापन की जड़ में है — को केंद्र सरकार कब और कैसे संबोधित करेगी। विधानसभा में उपस्थिति राजनीतिक समाधान का विकल्प नहीं है; यह केवल संवाद की संभावना खोलती है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुकी-ज़ो विधायक मणिपुर विधानसभा से तीन साल तक क्यों अनुपस्थित रहे?
3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से कुकी-ज़ो समुदाय के विधायकों ने इम्फाल में विधानसभा की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से भाग लेना बंद कर दिया था। समुदाय की माँग एक अलग राजनीतिक प्रशासन की है, जो अभी भी अनसुलझी है।
2 सितंबर 2026 को कौन-से कुकी-ज़ो विधायक मणिपुर विधानसभा में उपस्थित हुए?
सैतु विधानसभा क्षेत्र से विधायक हाओखोलेट किपगेन और साइकुल विधानसभा क्षेत्र से विधायक किमनेओ हाओकिप हैंगशिंग बुधवार को सत्र में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने विधायकों को क्या निर्देश दिया था?
KIM ने 31 अगस्त को सभी कुकी-ज़ो विधायकों को निर्देश जारी किया था कि जब तक अलग प्रशासन की माँग का राजनीतिक समाधान नहीं हो जाता, तब तक वे आठवें सत्र में भाग लेने के लिए इम्फाल की यात्रा न करें। दो विधायकों की उपस्थिति इस निर्देश के विपरीत रही।
मणिपुर के मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इसे 'स्वागत योग्य कदम' बताया और कहा कि यह राज्य में एकता और शांति को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक संकेत है। उन्होंने समावेशी संवाद और सुलह के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
मणिपुर में जातीय संघर्ष कब से चल रहा है और इसकी स्थिति क्या है?
मणिपुर में जातीय हिंसा 3 मई 2023 को भड़की थी और तब से मैतेई व कुकी-ज़ो समुदायों के बीच तनाव जारी है। कुकी-ज़ो समुदाय अलग राजनीतिक प्रशासन की माँग कर रहा है, जिसका राजनीतिक समाधान अभी तक नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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