2 सितंबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट का BCI चेयरमैन मनन मिश्रा मामले में निर्देश, 5 हफ्तों में स्टेट बार काउंसिल गठन अनिवार्य

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सुप्रीम कोर्ट का BCI चेयरमैन मनन मिश्रा मामले में निर्देश, 5 हफ्तों में स्टेट बार काउंसिल गठन अनिवार्य

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के खिलाफ दायर याचिका पर नई कमेटी नियुक्त करने से इनकार कर दिया और स्टेट बार काउंसिलों के गठन के लिए 5 हफ्तों का अल्टीमेटम दिया। तब तक मौजूदा कमेटी हर बड़े नीतिगत फैसले में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सहमति लेगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 2 सितंबर को BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की।
न्यायालय ने नई कमेटी नियुक्त करने से इनकार किया; राज्य बार काउंसिल गठन के लिए 5 हफ्तों की समय-सीमा तय की।
नई कमेटी के चुनाव तक मौजूदा कमेटी हर बड़े नीतिगत निर्णय में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सहमति लेगी।
मिश्रा ने 22 अगस्त को सभी आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था; यह उनका सातवाँ कार्यकाल है।
BCI में देशभर के 25 लाख से अधिक वकील मतदाता हैं; मिश्रा ने दावा किया कि दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके साथ हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 2 सितंबर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की कार्यप्रणाली के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि वह कोई नई कमेटी नियुक्त नहीं करेगा। न्यायालय ने राज्य बार काउंसिलों के गठन और पदाधिकारियों के चुनाव के लिए पाँच हफ्तों की समय-सीमा निर्धारित की है।

न्यायालय का निर्देश और समय-सीमा

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य बार काउंसिलों के चुनाव पहले ही संपन्न हो चुके हैं और उनके विधिवत गठन के पश्चात BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव होगा। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि नई कमेटी के चुनाव तक वर्तमान कमेटी हर बड़े नीतिगत निर्णय में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सहमति अनिवार्य रूप से लेगी। यह निर्देश BCI की स्वायत्त कार्यप्रणाली पर न्यायिक निगरानी का स्पष्ट संकेत है।

मनन मिश्रा के आरोपों पर सफाई

गौरतलब है कि 22 अगस्त को मनन कुमार मिश्रा ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। उन्होंने BCI के पूर्व को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों तथा सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (PIL) पर भी अपना पक्ष रखा था।

मिश्रा ने कहा था कि एडवोकेट्स एक्ट के अंतर्गत BCI एक वैधानिक निकाय है, जिसमें देशभर के 25 लाख से अधिक वकील मतदाता हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे किसी नियुक्ति या नामांकन से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि हैं।

BCI की चुनाव प्रक्रिया

मिश्रा ने BCI की चुनाव प्रक्रिया समझाते हुए कहा था कि सर्वप्रथम वकील अपने-अपने राज्य बार काउंसिल के प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। इसके बाद स्टेट बार काउंसिल के निर्वाचित प्रतिनिधि BCI के लिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और अंततः सभी राज्यों के प्रतिनिधि मिलकर चेयरमैन व वाइस चेयरमैन का चुनाव करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वकीलों के शीर्ष निकाय की आंतरिक प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

सातवें कार्यकाल और बहुमत का दावा

मिश्रा ने यह भी कहा था कि यह उनका सातवाँ कार्यकाल है और इससे पहले के छह कार्यकालों में वे निर्विरोध निर्वाचित होते रहे हैं। उनके अनुसार, वर्तमान में भी BCI के दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके समर्थन में हैं और कुछ इक्के-दुक्के लोगों के आरोपों से संस्था की वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय की गई पाँच हफ्तों की समय-सीमा समाप्त होने के बाद राज्य बार काउंसिलों का गठन पूरा होगा और तत्पश्चात BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव कराया जाएगा। तब तक मौजूदा नेतृत्व को प्रत्येक बड़े नीतिगत निर्णय पर अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की अनिवार्य स्वीकृति लेनी होगी — जो BCI की स्वायत्तता पर एक असाधारण न्यायिक अंकुश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या महज़ एक अंतरिम प्रबंध बनकर रह जाएगा। मिश्रा का 'दो-तिहाई बहुमत' का दावा और विपक्ष के 'राजनीतिक प्रेरणा' के आरोप — दोनों सत्यापन की माँग करते हैं, जो केवल पारदर्शी चुनाव से संभव है। पाँच हफ्तों की समय-सीमा तय करना न्यायालय की गंभीरता दर्शाता है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या राज्य बार काउंसिलें इस डेडलाइन का पालन करती हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने मनन मिश्रा मामले में क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ याचिका पर नई कमेटी नियुक्त करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने स्टेट बार काउंसिलों के गठन के लिए 5 हफ्तों की समय-सीमा तय की और कहा कि तब तक मौजूदा कमेटी हर बड़े नीतिगत फैसले में अटॉर्नी जनरल व सॉलिसिटर जनरल की सहमति लेगी।
BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव कब होगा?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, पहले 5 हफ्तों के भीतर स्टेट बार काउंसिलों का गठन और वहाँ पदाधिकारियों का चुनाव होगा। उसके बाद BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव कराया जाएगा।
मनन कुमार मिश्रा पर क्या आरोप हैं?
BCI के पूर्व को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी ने मिश्रा की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है। मिश्रा ने 22 अगस्त को इन सभी आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।
BCI का चुनाव कैसे होता है?
एडवोकेट्स एक्ट के तहत BCI एक वैधानिक निकाय है जिसमें देशभर के 25 लाख से अधिक वकील मतदाता हैं। पहले वकील अपनी स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधि चुनते हैं, फिर वे प्रतिनिधि BCI के लिए अपने सदस्य चुनते हैं, और अंत में BCI के सभी सदस्य मिलकर चेयरमैन व वाइस चेयरमैन का चुनाव करते हैं।
मनन मिश्रा BCI के कितने समय से चेयरमैन हैं?
मनन कुमार मिश्रा के अनुसार यह उनका सातवाँ कार्यकाल है और इससे पहले के छह कार्यकालों में वे निर्विरोध निर्वाचित होते रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि वर्तमान में भी BCI के दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके समर्थन में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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