सुप्रीम कोर्ट का BCI चेयरमैन मनन मिश्रा मामले में निर्देश, 5 हफ्तों में स्टेट बार काउंसिल गठन अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 2 सितंबर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की कार्यप्रणाली के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि वह कोई नई कमेटी नियुक्त नहीं करेगा। न्यायालय ने राज्य बार काउंसिलों के गठन और पदाधिकारियों के चुनाव के लिए पाँच हफ्तों की समय-सीमा निर्धारित की है।
न्यायालय का निर्देश और समय-सीमा
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य बार काउंसिलों के चुनाव पहले ही संपन्न हो चुके हैं और उनके विधिवत गठन के पश्चात BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव होगा। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि नई कमेटी के चुनाव तक वर्तमान कमेटी हर बड़े नीतिगत निर्णय में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सहमति अनिवार्य रूप से लेगी। यह निर्देश BCI की स्वायत्त कार्यप्रणाली पर न्यायिक निगरानी का स्पष्ट संकेत है।
मनन मिश्रा के आरोपों पर सफाई
गौरतलब है कि 22 अगस्त को मनन कुमार मिश्रा ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। उन्होंने BCI के पूर्व को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों तथा सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (PIL) पर भी अपना पक्ष रखा था।
मिश्रा ने कहा था कि एडवोकेट्स एक्ट के अंतर्गत BCI एक वैधानिक निकाय है, जिसमें देशभर के 25 लाख से अधिक वकील मतदाता हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे किसी नियुक्ति या नामांकन से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत निर्वाचित प्रतिनिधि हैं।
BCI की चुनाव प्रक्रिया
मिश्रा ने BCI की चुनाव प्रक्रिया समझाते हुए कहा था कि सर्वप्रथम वकील अपने-अपने राज्य बार काउंसिल के प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। इसके बाद स्टेट बार काउंसिल के निर्वाचित प्रतिनिधि BCI के लिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और अंततः सभी राज्यों के प्रतिनिधि मिलकर चेयरमैन व वाइस चेयरमैन का चुनाव करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वकीलों के शीर्ष निकाय की आंतरिक प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
सातवें कार्यकाल और बहुमत का दावा
मिश्रा ने यह भी कहा था कि यह उनका सातवाँ कार्यकाल है और इससे पहले के छह कार्यकालों में वे निर्विरोध निर्वाचित होते रहे हैं। उनके अनुसार, वर्तमान में भी BCI के दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके समर्थन में हैं और कुछ इक्के-दुक्के लोगों के आरोपों से संस्था की वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय की गई पाँच हफ्तों की समय-सीमा समाप्त होने के बाद राज्य बार काउंसिलों का गठन पूरा होगा और तत्पश्चात BCI के नए पदाधिकारियों का चुनाव कराया जाएगा। तब तक मौजूदा नेतृत्व को प्रत्येक बड़े नीतिगत निर्णय पर अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की अनिवार्य स्वीकृति लेनी होगी — जो BCI की स्वायत्तता पर एक असाधारण न्यायिक अंकुश है।