10 अगस्त 2026
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केएससीए सचिव संतोष मेनन की अयोग्यता: बीसीसीआई लोकपाल के आदेश के खिलाफ कानूनी राह तलाशेगा संघ

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केएससीए सचिव संतोष मेनन की अयोग्यता: बीसीसीआई लोकपाल के आदेश के खिलाफ कानूनी राह तलाशेगा संघ

सारांश

बीसीसीआई लोकपाल ने केएससीए सचिव संतोष मेनन को 9 साल की कार्यकाल सीमा पार करने पर अयोग्य ठहराया, लेकिन केएससीए के अपने लोकपाल का आदेश विपरीत था — यह टकराव भारतीय क्रिकेट प्रशासन में अधिकार-क्षेत्र की जटिलताओं को उजागर करता है।

मुख्य बातें

बीसीसीआई ओम्बड्समैन जस्टिस अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने केएससीए सचिव संतोष मेनन को 9 वर्ष की कार्यकाल सीमा उल्लंघन के आधार पर अयोग्य घोषित किया।
मेनन का अधिकतम कार्यकाल 16 दिसंबर 2025 को पूरा हो गया था — यह 'डॉल्फिन क्रिकेटर्स' की शिकायत पर दिया गया फैसला है।
केएससीए के अपने लोकपाल जस्टिस ए.एस.
बोपन्ना ने 5 फरवरी 2026 को इसी मामले में विपरीत आदेश पारित किया था।
केएससीए अध्यक्ष वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि दोनों आदेशों के कानूनी प्रभावों की जाँच की जा रही है और उचित कानूनी सलाह ली जा रही है।
कानूनी समीक्षा पूरी होने के बाद ही केएससीए आगे का बयान जारी करेगा।

कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) ने 25 जून 2026 को पुष्टि की कि वह बीसीसीआई लोकपाल के उस आदेश की विधिक समीक्षा कर रहा है, जिसमें संघ के सचिव संतोष मेनन को अधिकतम कार्यकाल सीमा के उल्लंघन के आधार पर अयोग्य घोषित किया गया है। संघ ने स्पष्ट किया कि आदेश के कानूनी प्रभावों की व्यापक जाँच पूरी होने तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि

बीसीसीआई के ओम्बड्समैन जस्टिस अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने 'डॉल्फिन क्रिकेटर्स' की शिकायत को उचित ठहराते हुए यह फैसला सुनाया कि संतोष मेनन ने मैनेजिंग कमेटी के सदस्य और पदाधिकारी के रूप में अपना 9 वर्ष का अधिकतम कार्यकाल 16 दिसंबर 2025 को पूरा कर लिया था। इस आधार पर उन्हें पद के लिए अयोग्य करार दिया गया।

केएससीए अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

केएससीए अध्यक्ष एवं भारत के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने कहा, 'हमने बीसीसीआई लोकपाल की तरफ से पारित आदेश पर ध्यान दिया है और फिलहाल इसकी विस्तार से जाँच कर रहे हैं। कानून के तहत उपलब्ध सभी उपायों और विकल्पों का मूल्यांकन करने के लिए उचित कानूनी सलाह ली जा रही है। इस चरण में, आदेश के कानूनी प्रभावों की व्यापक जाँच होने तक कोई और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।'

दो आदेशों का विरोधाभास

प्रसाद ने एक महत्त्वपूर्ण कानूनी विरोधाभास की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार 5 फरवरी 2026 को जस्टिस (सेवानिवृत्त) ए.एस. बोपन्ना — जो केएससीए के अपने लोकपाल हैं — ने इस मामले में पहले ही अनुमति दे दी थी। यह आदेश केएससीए के उप-नियमों के तहत सभी सदस्यों पर बाध्यकारी है। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य से, बीसीसीआई लोकपाल ने इस मुद्दे पर विपरीत राय ली है। दोनों आदेशों के कानूनी प्रभाव और आपसी संबंध की फिलहाल जाँच की जा रही है।'

संतोष मेनन का पदभार और संदर्भ

संतोष मेनन ने दिसंबर 2025 में हुए केएससीए चुनाव में वेंकटेश प्रसाद के गुट की जीत के बाद सचिव पद संभाला था। गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड के लोकपाल और राज्य संघ के लोकपाल के बीच इस प्रकार के परस्पर विरोधी फैसले क्रिकेट प्रशासन में शासन-संरचना की जटिलताओं को उजागर करते हैं।

आगे की राह

केएससीए ने संकेत दिया है कि कानूनी समीक्षा पूरी होने पर, यदि आवश्यक समझा गया, तो अगला बयान जारी किया जाएगा। वेंकटेश प्रसाद ने कहा, 'हम कानून के शासन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और लागू कानूनी ढाँचे का पूरी तरह पालन करते हुए संघ के सर्वोत्तम हित में काम करना जारी रखेंगे।' यह मामला भारतीय क्रिकेट प्रशासन में लोकपाल के अधिकार-क्षेत्र और राज्य संघों की स्वायत्तता के बीच की सीमा-रेखा को परखने वाला अहम कानूनी परीक्षण बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह शासन-संरचना में संस्थागत खामी की ओर इशारा करता है। लोढ़ा समिति की सिफारिशों के बाद से क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता और कार्यकाल सीमा लागू करने की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन इस तरह के विरोधाभासी फैसले सुधार की प्रक्रिया को कमज़ोर कर सकते हैं। असली सवाल यह है कि जब तक इस अधिकार-क्षेत्र के विवाद का कानूनी समाधान नहीं होता, तब तक केएससीए का प्रशासनिक कामकाज कितने समय तक अनिश्चितता में रहेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संतोष मेनन को अयोग्य क्यों ठहराया गया?
बीसीसीआई ओम्बड्समैन जस्टिस अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने फैसला दिया कि संतोष मेनन ने मैनेजिंग कमेटी के सदस्य और पदाधिकारी के रूप में अपना 9 वर्ष का अधिकतम कार्यकाल 16 दिसंबर 2025 को पूरा कर लिया था, इसलिए वे सचिव पद के लिए अयोग्य हैं। यह फैसला 'डॉल्फिन क्रिकेटर्स' की शिकायत पर आया।
केएससीए इस आदेश के खिलाफ क्या कदम उठा रहा है?
केएससीए ने कहा है कि वह उचित कानूनी सलाह ले रहा है और कानून के तहत उपलब्ध सभी उपायों व विकल्पों का मूल्यांकन कर रहा है। कानूनी समीक्षा पूरी होने पर ही अगला बयान जारी किया जाएगा।
दो लोकपालों के विरोधाभासी आदेश क्या हैं?
केएससीए के अपने लोकपाल जस्टिस (सेवानिवृत्त) ए.एस. बोपन्ना ने 5 फरवरी 2026 को इसी मामले में मेनन के पक्ष में आदेश दिया था, जो केएससीए के उप-नियमों के तहत सभी सदस्यों पर बाध्यकारी है। इसके विपरीत, बीसीसीआई लोकपाल ने मेनन को अयोग्य ठहराया — यही दोनों आदेशों का विरोधाभास है।
वेंकटेश प्रसाद का इस विवाद से क्या संबंध है?
वेंकटेश प्रसाद केएससीए के वर्तमान अध्यक्ष हैं और दिसंबर 2025 के चुनाव में उनके गुट की जीत के बाद संतोष मेनन ने सचिव पद संभाला था। प्रसाद ने ही इस मामले में कानूनी विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया और संघ की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया।
इस विवाद का केएससीए के कामकाज पर क्या असर पड़ेगा?
जब तक दोनों लोकपालों के विरोधाभासी आदेशों का कानूनी समाधान नहीं होता, केएससीए के सचिव पद की वैधता अनिश्चितता में रहेगी। संघ ने कहा है कि वह कानून के शासन को बनाए रखते हुए संघ के सर्वोत्तम हित में काम करता रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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