केएससीए सचिव संतोष मेनन को बीसीसीआई लोकपाल ने हटाया, 9 साल की सीमा पार करने पर अयोग्य घोषित
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (केएससीए) के मानद सचिव संतोष मेनन को 25 जून 2026 को बीसीसीआई लोकपाल के आदेश पर उनके पद से हटा दिया गया। बीसीसीआई लोकपाल जस्टिस अरुण मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने फैसला सुनाया कि मेनन ने प्रशासक के रूप में 9 वर्ष की अधिकतम अनुमत अवधि पूरी कर ली है, जिसके चलते वे 16 दिसंबर 2025 से ही पद पर बने रहने के अयोग्य हो चुके थे।
शिकायत और फैसले की पृष्ठभूमि
यह मामला केएससीए के संस्थागत सदस्य डॉल्फिन क्रिकेटर्स की शिकायत पर शुरू हुआ। लोकपाल ने शिकायत को सही ठहराते हुए कहा कि बीसीसीआई संविधान के नियम 3(बी)(आई) के तहत कोई भी व्यक्ति 9 वर्ष से अधिक समय तक पद पर नहीं रह सकता। मेनन ने 7 दिसंबर 2025 को मानद सचिव का पद संभाला था, जबकि उनकी संचयी प्रशासनिक अवधि — ऑफिस बेयरर और प्रबंधन समिति सदस्य के रूप में बिताए समय को मिलाकर — 16 दिसंबर 2025 को ही 9 साल पूरी कर चुकी थी।
लोकपाल का निर्णय: मुख्य टिप्पणियाँ
जस्टिस अरुण मिश्रा ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा, 'रेस्पोंडेंट नंबर 3, संतोष मेनन, केएससीए के संविधान के नियम 1ए (एचएच) के तहत तय पद पर 9 साल से हैं, इसलिए वह 16.12.2025 से केएससीए के मानद सचिव का पद संभालने के लिए साफ तौर पर अयोग्य हैं। वह गैर-कानूनी तरीके से सचिव का पद हड़प रहे हैं।'
लोकपाल ने यह भी रेखांकित किया कि 23 अगस्त 2025 को बीसीसीआई की ओर से दी गई सलाह को गैर-कानूनी तरीके से नजरअंदाज किया गया, जो बीसीसीआई, केएससीए के नियमों और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों तथा लोढ़ा समिति की रिपोर्ट की सही व्याख्या पर आधारित थी।
प्रस्ताव वापसी का विवादास्पद घटनाक्रम
जस्टिस मिश्रा ने फैसले में एक और महत्त्वपूर्ण तथ्य उजागर किया। उन्होंने कहा कि 14 अक्टूबर 2025 का एक पूर्व प्रस्ताव मेनन द्वारा पद संभालने के मात्र 9 दिनों के भीतर जल्दबाजी में वापस ले लिया गया था। ठीक उसी दिन — 16 दिसंबर 2025 — जब उनकी 9 साल की अवधि पूरी हो रही थी, उन्हें अयोग्यता से बचाने के लिए 14 अक्टूबर 2025 के प्रस्ताव के विरुद्ध एक नया प्रस्ताव पास किया गया। लोकपाल ने इसे संस्थाओं के लिए अनुचित आचरण करार दिया।
गौरतलब है कि मेनन ने पिछले वर्ष दिसंबर में हुए चुनाव जीतने वाले वेंकटेश प्रसाद के नेतृत्व वाले गुट के हिस्से के रूप में केएससीए सचिव का पद संभाला था।
आदेश का तत्काल प्रभाव
लोकपाल ने केएससीए सचिव का पद आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित कर दिया है और बीसीसीआई तथा केएससीए दोनों को बिना किसी देरी के इस आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है। लोकपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि 5 फरवरी 2025 को केएससीए लोकपाल द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण, केएससीए नियमों के नियम 41 के तहत कोई बाध्यकारी आदेश नहीं है और इस विवाद के निपटारे पर कोई रोक नहीं लगाता।
अब केएससीए को नियमों के अनुसार नए सचिव के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। कर्नाटक क्रिकेट में यह प्रशासनिक उठापटक ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय राज्य क्रिकेट संघों में शासन सुधार और कूलिंग-ऑफ नियमों के पालन पर बीसीसीआई की नजर पहले से कहीं अधिक सख्त हो गई है।