3 सितंबर 2026
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बीसीआई चेयरमैन मारपीट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच से इनकार किया, याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने का निर्देश

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बीसीआई चेयरमैन मारपीट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच से इनकार किया, याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने का निर्देश

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से जुड़े कथित मारपीट मामले में सीबीआई जांच की माँग ठुकरा दी और याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट भेज दिया। जस्टिस बागची ने वकीलों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए, जबकि सीजेआई ने संस्थागत पक्षपात की आशंका से बचते हुए मामला उच्च न्यायालय को सौंपा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 सितंबर 2026 को बीसीआई चेयरमैन मारपीट मामले में सीबीआई जांच की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सीजेआई सूर्यकांत के समक्ष मामला तत्काल सूचीबद्ध करने की मौखिक माँग रखी थी।
आरोप है कि बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने प्रेस बयान में प्रदर्शनकारी वकीलों को कथित तौर पर 'लीगल कॉकरोच' कहा।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि वकीलों को शिकायत के लिए संस्थागत तंत्र अपनाना चाहिए, सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं।
पीठ ने याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेकर उच्च न्यायालय में उचित कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 सितंबर 2026 को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ कथित मारपीट के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की माँग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उचित राहत के लिए संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करने की स्वतंत्रता प्रदान की।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध किए जाने के लिए मौखिक रूप से रखा था। भूषण ने पीठ को बताया कि कुछ वकील बीसीआई परिसर के समक्ष प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्होंने इससे पहले संस्था में सुधारों को लेकर एक प्रतिनिधित्व भी सौंपा था।

आरोप है कि इसके बाद कुछ व्यक्तियों ने — जिन्होंने कथित तौर पर खुद को वकील बताया — प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं के साथ मारपीट की। भूषण के अनुसार, यह कथित घटना बीसीआई परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद बीसीआई चेयरमैन मिश्रा ने एक प्रेस बयान में प्रदर्शनकारी वकीलों को कथित तौर पर 'लीगल कॉकरोच' कहा और उनके साथ हुई मारपीट पर गर्व जताया।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है, क्योंकि बीसीआई परिसर की सीसीटीवी फुटेज के नष्ट या गायब होने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों को अपनी माँगों और शिकायतों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने वकीलों के प्रदर्शन के तरीके पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वकील एक अनुशासित वर्ग हैं और शिकायतों के निवारण के लिए संस्थागत तंत्र का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक प्रदर्शन का। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय के अधिकारी के रूप में अधिवक्ताओं से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

सीजेआई सूर्यकांत ने पीठ को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय पहले से ही बीसीआई सुधारों से जुड़े कई मुद्दों पर विचार कर रहा है। इस पर प्रशांत भूषण ने माना कि संस्थागत उपाय उपलब्ध हैं, किंतु उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ मारपीट किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

गौरतलब है कि प्रशांत भूषण ने स्वयं स्वीकार किया कि उन्होंने प्रारंभ में याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी थी, परंतु चूँकि सर्वोच्च न्यायालय पहले से बीसीआई सुधार मामलों की सुनवाई कर रहा है, इसलिए उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख करना उचित समझा।

अदालत का अंतिम निर्णय

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'उन्हें हाईकोर्ट जाने दीजिए। अन्यथा कभी-कभी लोगों को लगता है कि हम संस्थागत पक्षपात कर रहे हैं।' पीठ ने याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेने और उचित राहत के लिए उच्च न्यायालय जाने की अनुमति प्रदान की। सर्वोच्च न्यायालय ने रजिस्ट्री को पेपरबुक वापस करने का निर्देश दिया, ताकि याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय के समक्ष उचित कार्यवाही शुरू कर सकें।

आगे क्या होगा

यह मामला अब उच्च न्यायालय के समक्ष जाने की संभावना है, जहाँ याचिकाकर्ता सीबीआई जांच या वैकल्पिक स्वतंत्र जांच की माँग कर सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बीसीआई में सुधारों को लेकर वकील समुदाय में असंतोष पहले से चर्चा में है और सर्वोच्च न्यायालय भी संस्था से जुड़े कई मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से विचार कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वकील समुदाय की आंतरिक लोकतांत्रिक संस्कृति पर गंभीर सवाल है। सीजेआई का 'संस्थागत पक्षपात' वाला तर्क ईमानदार है, किंतु इससे यह भी स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका स्वयं को इस विवाद से दूर रखना चाहती है — ऐसे समय में जब बीसीआई सुधारों पर वही अदालत पहले से सुनवाई कर रही है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई मारपीट मामले में सीबीआई जांच से क्यों इनकार किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा सुनवाई से 'संस्थागत पक्षपात' की आशंका उत्पन्न हो सकती है।
बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा पर क्या आरोप हैं?
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के अनुसार, बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कथित तौर पर एक प्रेस बयान में प्रदर्शनकारी वकीलों को 'लीगल कॉकरोच' कहा और उनके साथ हुई मारपीट पर गर्व जताया। ये आरोप अभी कथित हैं और न्यायिक जांच का विषय हैं।
याचिकाकर्ता वकील सीबीआई जांच क्यों चाहते थे?
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बीसीआई परिसर की सीसीटीवी फुटेज नष्ट या गायब हो सकती है, इसलिए स्वतंत्र जांच ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन से नहीं रोका जाना चाहिए।
जस्टिस बागची ने वकीलों के प्रदर्शन पर क्या कहा?
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि वकील एक अनुशासित वर्ग हैं और उन्हें शिकायतों के लिए संस्थागत तंत्र अपनाना चाहिए, न कि सार्वजनिक प्रदर्शन। उन्होंने कहा कि न्यायालय के अधिकारी के रूप में अधिवक्ताओं से सर्वोच्च न्यायालय के मानकों का पालन अपेक्षित है।
अब यह मामला आगे कहाँ जाएगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेकर उच्च न्यायालय में उचित कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी है। रजिस्ट्री को पेपरबुक वापस करने का निर्देश दिया गया है ताकि उच्च न्यायालय में प्रक्रिया शुरू हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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