BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा का पलटवार: PIL और रेड्डी के आरोप राजनीतिक साज़िश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने 22 अगस्त को अपने खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (PIL) तथा BCI के पूर्व को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वह किसी नियुक्ति या नामांकन से नहीं, बल्कि एक बहु-स्तरीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत निर्वाचित होकर इस पद पर पहुँचे हैं, और उनके विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
BCI की चुनाव प्रक्रिया और मिश्रा का जनादेश
एडवोकेट्स एक्ट के अंतर्गत BCI एक वैधानिक निकाय है, जिसमें देशभर के 25 लाख से अधिक वकील मतदाता हैं। मिश्रा ने बताया कि पहले वकील अपने-अपने राज्य बार काउंसिल के प्रतिनिधि चुनते हैं, फिर वे प्रतिनिधि BCI के लिए अपने सदस्य निर्वाचित करते हैं, और अंत में BCI के समस्त राज्य-प्रतिनिधि मिलकर चेयरमैन व वाइस चेयरमैन का चुनाव करते हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका सातवाँ कार्यकाल है और इससे पूर्व छह कार्यकाल में वह निर्विरोध निर्वाचित होते रहे हैं। उनके अनुसार, वर्तमान में भी BCI के दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके साथ हैं।
ट्रस्ट के आरोपों पर सफाई
ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय अनियमितता के आरोपों को मिश्रा ने निराधार बताया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का संपूर्ण कामकाज पारदर्शी है — BCI सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता बतौर मैनेजिंग ट्रस्टी जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट का वार्षिक ऑडिट होता है और ऑडिट रिपोर्ट गजट में प्रकाशित होकर सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध रहती है। उन्होंने कहा कि फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाने वालों को ठोस प्रमाण सामने रखने चाहिए।
सदाशिव रेड्डी पर सीधा निशाना
मिश्रा ने सदाशिव रेड्डी के आरोपों को व्यक्तिगत और राजनीतिक रंजिश से उपजा बताया। उन्होंने कहा कि रेड्डी लंबे समय से उनके संगठनात्मक विरोधी रहे हैं और BCI में सदस्य रहते हुए भी उनका विरोध करते थे। उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल का चुनाव परिणाम घोषित हो चुका है और रेड्डी उस चुनाव में नहीं लड़े, जिससे वह अब BCI के सदस्य नहीं रहे। मिश्रा ने कहा कि यदि रेड्डी के पास कोई ठोस साक्ष्य है, तो वह सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करें। उन्होंने जोड़ा कि वकीलों को 'लीगल कॉकरोच' जैसे शब्दों से संबोधित करना पूरे वकील समुदाय के लिए अपमानजनक है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
PIL और सर्वोच्च न्यायालय पर रुख
सर्वोच्च न्यायालय में दायर PIL पर मिश्रा ने कहा कि न्यायालय सभी के लिए खुला है और कोई भी कानून के तहत याचिका दाखिल कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को एडवोकेट्स एक्ट के किसी प्रावधान के उल्लंघन का आरोप लगाना है, तो वह अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को प्रमाणित कर दे, तो वह पद छोड़ने को तैयार हैं — लेकिन बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप, विशेषकर किसी वरिष्ठ वकील की ओर से, उचित नहीं हैं।
विरोधियों को चुनावी चुनौती
मिश्रा ने अपने विरोधियों को चुनाव के मैदान में उतरने की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि BCI में चेयरमैन तक पहुँचने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है और यदि किसी को उनसे राजनीतिक या संगठनात्मक विरोध है, तो उसे चुनाव लड़कर मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया और PIL के जरिए उन्हें हटाने की कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में अंतिम फैसला मतदाताओं का होना चाहिए — और जब तक देश के वकील उन्हें अपना प्रतिनिधि बनाए रखना चाहेंगे, वह पद पर बने रहेंगे। यह टकराव अब सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के साथ और नए मोड़ पर पहुँच सकता है।