बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर का SSP पर आरोप, जन सुराज के 54 कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने 2 अगस्त 2026 को पटना स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी ने शिकायत एवं साक्ष्य चुनाव आयोग (ECI) को सौंप दिए हैं।
हिरासत का आरोप: क्या कहते हैं प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान जन सुराज के 54 स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। उनका कहना था कि पुलिस ने देर रात लोगों के घरों में घुसकर उन्हें उठाया, जबकि वे सो रहे थे। एसएसपी की ओर से जारी विज्ञप्ति में इन्हें 'बाहरी लोग' बताया गया था, किंतु किशोर ने दावा किया कि पार्टी के पास इन सभी के स्थानीय निवासी होने के प्रमाण मौजूद हैं।
किशोर ने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रशासन की कार्रवाई निष्पक्ष थी, तो BJP के कितने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों को पकड़ा गया, उन्हें मतदान समाप्त होने से कुछ समय पहले वोट डालने के लिए छोड़ा गया — जो कि प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
प्रभावित नागरिकों की गवाही
मंदिरी वार्ड-26 के निवासी नवल किशोर गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि देर रात भारी संख्या में पुलिसकर्मी उनके घर पहुँचे और बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें अपने साथ ले गए। उनके अनुसार दिनभर विभिन्न स्थानों पर घुमाने के बाद उन्हें राजीव नगर थाने में रखा गया और बाद में मतदान कराने के लिए बूथ ले जाया गया।
वार्ड-22 की निवासी निभा भूषण ने आरोप लगाया कि मतदान के दिन पुलिस उनके घर पहुँची और उनसे स्थानीय होने का प्रमाण माँगा गया। उन्होंने कहा कि सभ्य नागरिकों के घरों में इस प्रकार प्रवेश करना अनुचित है और वह इसकी औपचारिक शिकायत करेंगी। वार्ड-38 के निवासी सुनील चंद्रवंशी ने दावा किया कि पुलिस उन्हें तीन बार पकड़ने के लिए घर आई और कई घंटों तक थाने में बैठाए रखा।
चुनाव आयोग को सौंपे साक्ष्य
प्रशांत किशोर ने बताया कि चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में हिरासत में लिए गए स्थानीय लोगों के नाम, पते और अन्य विवरण शामिल हैं। उन्होंने माँग की कि यदि प्रशासन वास्तव में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से काम कर रहा था, तो सभी दलों के खिलाफ समान रूप से कदम उठाए जाने चाहिए थे।
किशोर ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग ने मतगणना के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने का आश्वासन दिया है।
नीतीश कुमार से तुलना और आगे की रणनीति
प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लगभग 20 वर्षों के शासनकाल में चुनाव जीतने के लिए प्रशासन और पुलिस के इस प्रकार के दुरुपयोग का उदाहरण देखने को नहीं मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज इस मामले को कानूनी और संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं और जन सुराज अपनी राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने की कोशिश में है। बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम और उसके बाद की यह विवाद-श्रृंखला बिहार की राजनीति में नई परतें जोड़ रही है।