बांकीपुर उपचुनाव: जन सुराज ने CEO को सौंपे साक्ष्य, BJP पर मतदाता दबाव और पुलिस उत्पीड़न का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जारी उपचुनाव प्रक्रिया के बीच जन सुराज पार्टी ने 22 जुलाई को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें प्रशासन और पुलिस पर आचार संहिता के उल्लंघन तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित रूप से परेशान किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दस्तावेज़ और साक्ष्य सौंपकर निष्पक्ष जाँच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की।
कार्यकर्ताओं पर कथित पुलिस उत्पीड़न के आरोप
मनोज भारती ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पीरबहोर थाना क्षेत्र में एक पार्टी कार्यकर्ता को देर रात घर लौटते समय पुलिस ने कथित तौर पर परेशान किया। इसी प्रकार 21 जुलाई को अफरोज अहमद और तौसिफ नामक दो कार्यकर्ताओं को बिना किसी वैधानिक आधार या एफआईआर के थाने में बैठाए रखा गया।
इसके अतिरिक्त, बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र में पार्टी के प्रदेश सचिव रवि नारायण तथा सिवान में पार्टी नेता शाहनवाज आलम के आवास पर देर रात पुलिस के पहुँचने और पूछताछ करने का आरोप भी लगाया गया। भारती ने स्पष्ट किया कि पटना सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में यह कथित उत्पीड़न जारी है।
BJP-NDA पर मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप
जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान पार्षद तथा पूर्व जनप्रतिनिधि सुरक्षा बलों के साथ प्रचार कर मतदाताओं पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी ने इस मामले की भी शिकायत CEO को दी है।
व्यवसायियों को कर-कार्रवाई का भय दिखाने का दावा
प्रतिनिधिमंडल ने एक और गंभीर आरोप लगाया — बांकीपुर के व्यवसायियों को आयकर और जीएसटी कार्रवाई का भय दिखाकर चुनावी रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह आरोप, यदि सिद्ध हो, तो आचार संहिता के साथ-साथ चुनावी कानून का भी उल्लंघन माना जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना और माँगें
CEO से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद सदस्य अफाक अहमद, पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ, सिद्धनाथ राय और ललन यादव भी शामिल थे। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — सभी आरोपों की निष्पक्ष जाँच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, और प्रशासन को निष्पक्ष रूप से काम करने का स्पष्ट निर्देश।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब बांकीपुर उपचुनाव में राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि उपचुनावों में प्रशासनिक पक्षपात के आरोप नए नहीं हैं — बिहार में पिछले कई उपचुनावों में भी विपक्षी दलों ने इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं। अब सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा।