22 जुलाई 2026
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बांकीपुर उपचुनाव: जन सुराज ने CEO को सौंपे साक्ष्य, BJP पर मतदाता दबाव और पुलिस उत्पीड़न का आरोप

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बांकीपुर उपचुनाव: जन सुराज ने CEO को सौंपे साक्ष्य, BJP पर मतदाता दबाव और पुलिस उत्पीड़न का आरोप

सारांश

बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज ने मोर्चा खोल दिया है — पुलिस उत्पीड़न, BJP नेताओं द्वारा सुरक्षाबलों के साथ प्रचार और व्यवसायियों को कर-कार्रवाई का भय दिखाने के आरोप लगाते हुए CEO को साक्ष्य सौंपे गए। अब निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया पर नज़रें टिकी हैं।

मुख्य बातें

जन सुराज पार्टी ने 22 जुलाई को बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को आचार संहिता उल्लंघन के दस्तावेज़ और साक्ष्य सौंपे।
प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने CEO से मुलाकात की।
पीरबहोर और बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को बिना एफआईआर के कथित रूप से परेशान किया गया; 21 जुलाई को दो कार्यकर्ता थाने में बैठाए गए।
BJP-NDA के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों पर सुरक्षाबलों के साथ प्रचार कर मतदाताओं पर दबाव बनाने का आरोप।
बांकीपुर के व्यवसायियों को आयकर और जीएसटी कार्रवाई का भय दिखाकर प्रभावित करने का आरोप।
पार्टी ने निष्पक्ष जाँच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रशासन को निष्पक्षता के निर्देश की माँग की।

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जारी उपचुनाव प्रक्रिया के बीच जन सुराज पार्टी ने 22 जुलाई को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें प्रशासन और पुलिस पर आचार संहिता के उल्लंघन तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित रूप से परेशान किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दस्तावेज़ और साक्ष्य सौंपकर निष्पक्ष जाँच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की।

कार्यकर्ताओं पर कथित पुलिस उत्पीड़न के आरोप

मनोज भारती ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पीरबहोर थाना क्षेत्र में एक पार्टी कार्यकर्ता को देर रात घर लौटते समय पुलिस ने कथित तौर पर परेशान किया। इसी प्रकार 21 जुलाई को अफरोज अहमद और तौसिफ नामक दो कार्यकर्ताओं को बिना किसी वैधानिक आधार या एफआईआर के थाने में बैठाए रखा गया।

इसके अतिरिक्त, बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र में पार्टी के प्रदेश सचिव रवि नारायण तथा सिवान में पार्टी नेता शाहनवाज आलम के आवास पर देर रात पुलिस के पहुँचने और पूछताछ करने का आरोप भी लगाया गया। भारती ने स्पष्ट किया कि पटना सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में यह कथित उत्पीड़न जारी है।

BJP-NDA पर मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप

जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान पार्षद तथा पूर्व जनप्रतिनिधि सुरक्षा बलों के साथ प्रचार कर मतदाताओं पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी ने इस मामले की भी शिकायत CEO को दी है।

व्यवसायियों को कर-कार्रवाई का भय दिखाने का दावा

प्रतिनिधिमंडल ने एक और गंभीर आरोप लगाया — बांकीपुर के व्यवसायियों को आयकर और जीएसटी कार्रवाई का भय दिखाकर चुनावी रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह आरोप, यदि सिद्ध हो, तो आचार संहिता के साथ-साथ चुनावी कानून का भी उल्लंघन माना जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल की संरचना और माँगें

CEO से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद सदस्य अफाक अहमद, पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ, सिद्धनाथ राय और ललन यादव भी शामिल थे। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — सभी आरोपों की निष्पक्ष जाँच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, और प्रशासन को निष्पक्ष रूप से काम करने का स्पष्ट निर्देश।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब बांकीपुर उपचुनाव में राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि उपचुनावों में प्रशासनिक पक्षपात के आरोप नए नहीं हैं — बिहार में पिछले कई उपचुनावों में भी विपक्षी दलों ने इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं। अब सबकी नज़रें इस बात पर हैं कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि बिहार में उपचुनावों के दौरान विपक्षी दलों द्वारा इस तरह की शिकायतें एक परिचित राजनीतिक रणनीति बन चुकी हैं। असली परीक्षा यह है कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों को केवल कागज़ी कार्रवाई तक सीमित रखता है या वास्तविक जाँच और कार्रवाई करता है। व्यवसायियों को कर-भय दिखाने का आरोप — यदि प्रमाणित हो — सबसे गंभीर है, क्योंकि यह चुनावी प्रक्रिया में राज्य-तंत्र के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसी शिकायतों को 'दोनों पक्षों का खेल' बताकर छोड़ देती है — ज़रूरत इस बात की है कि आयोग की प्रतिक्रिया और उसके परिणाम पर भी उतनी ही पैनी नज़र रखी जाए।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन सुराज ने बांकीपुर उपचुनाव में निर्वाचन आयोग से क्या शिकायत की है?
जन सुराज ने 22 जुलाई को बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को दस्तावेज़ और साक्ष्य सौंपते हुए पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं के कथित उत्पीड़न, BJP-NDA नेताओं द्वारा सुरक्षाबलों के साथ प्रचार और व्यवसायियों को कर-कार्रवाई का भय दिखाने के आरोप लगाए हैं। पार्टी ने निष्पक्ष जाँच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की है।
जन सुराज के किन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कथित रूप से परेशान किया?
21 जुलाई को अफरोज अहमद और तौसिफ नामक दो कार्यकर्ताओं को बिना एफआईआर या वैधानिक आधार के थाने में बैठाए रखा गया। इसके अलावा पार्टी के प्रदेश सचिव रवि नारायण और सिवान में नेता शाहनवाज आलम के घर देर रात पुलिस पहुँचने का आरोप भी लगाया गया है।
BJP-NDA पर जन सुराज ने क्या आरोप लगाए हैं?
जन सुराज के अनुसार, बांकीपुर क्षेत्र में BJP और NDA के मंत्री, सांसद, विधायक और पूर्व जनप्रतिनिधि सुरक्षाबलों के साथ चुनाव प्रचार कर मतदाताओं पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो आचार संहिता का उल्लंघन है।
बांकीपुर के व्यवसायियों से जुड़ा आरोप क्या है?
जन सुराज ने आरोप लगाया है कि बांकीपुर के व्यापारियों को आयकर और जीएसटी कार्रवाई का भय दिखाकर चुनावी रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यह आरोप राज्य-तंत्र के कथित दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में आता है।
जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे?
प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में इस सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद सदस्य अफाक अहमद, पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ, सिद्धनाथ राय और ललन यादव शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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