बांकीपुर उपचुनाव: नतीजों से पहले एनडीए का पलटवार, BJP बोली — हार के डर से प्रशांत किशोर कर रहे नाटक
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त को आने से पहले ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माहौल गर्म हो गया है। जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा चुनाव प्रक्रिया और प्रशासन पर लगाए गए आरोपों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सत्ता पक्ष का कहना है कि जनसुराज खुद आचार संहिता का उल्लंघन करती रही और अब संभावित हार भाँपकर माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार
भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि प्रशांत किशोर जो आरोप दूसरों पर लगा रहे हैं, वास्तव में वही काम वे खुद कर रहे थे। सरावगी ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार की समयसीमा समाप्त होने के बाद भी किशोर बाहरी लोगों को लेकर क्षेत्र में घूमते रहे, थानों में घंटों बैठे रहे और बड़ी संख्या में वाहनों के काफिले के साथ निर्वाचन क्षेत्र में सक्रिय रहे।
सरावगी ने सवाल उठाया कि चुनाव प्रचार बंद होने के बाद ऐसी गतिविधियों की अनुमति किसने दी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव खर्च की निर्धारित सीमा से कहीं अधिक व्यय किया गया और चुनाव आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन हुआ।
ईवीएम पर आरोप की 'पूर्व-तैयारी' का दावा
संजय सरावगी ने यह भी आरोप लगाया कि जनसुराज पार्टी संभावित हार को देखते हुए पहले से ही ईवीएम पर सवाल उठाने की भूमिका तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त को परिणाम आने के बाद प्रशांत किशोर ईवीएम पर आरोप लगाएंगे। सरावगी ने बांकीपुर की जनता का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि मतदाताओं ने एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताया है।
मंत्री और जदयू नेता ने भी साधा निशाना
बिहार सरकार के मंत्री रत्नेश सदा ने एनडीए की जीत का दावा करते हुए कहा कि विपक्ष कहीं भी मुकाबले में दिखाई नहीं दे रहा और इस उपचुनाव में एनडीए की जीत तय है। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर पहले दूसरों के लिए चुनावी रणनीति बनाते थे, लेकिन जब खुद मैदान में उतरे तो जनता ने उन्हें जवाब दे दिया।
जदयू नेता श्याम रजक ने भी किशोर के आरोपों को गंभीरता से लेने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि जनता अपना फैसला पहले ही ईवीएम के ज़रिए सुना चुकी है और एनडीए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में मतदान हुआ है। रजक ने कहा कि जब किसी दल को हार का अंदेशा होता है तो वह चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगता है — यह कोई नई बात नहीं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह उपचुनाव बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की पहली प्रत्यक्ष चुनावी परीक्षा मानी जा रही है। 3 अगस्त को मतगणना के साथ यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनसुराज पार्टी बिहार की स्थापित राजनीतिक धाराओं को चुनौती देने में कितनी सफल रही। नतीजे चाहे जो भी हों, चुनाव-पूर्व आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर बिहार की आगामी राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।