बांकीपुर उपचुनाव: 26 राउंड बाद प्रशांत किशोर 15,864 वोटों से आगे, जन सुराज कार्यालय में जश्न
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना सोमवार, 3 अगस्त 2026 को पटना के एएन कॉलेज परिसर में जारी रही। 26वें राउंड की गिनती समाप्त होते-होते जन सुराज पार्टी के संस्थापक एवं प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने 15,864 मतों की निर्णायक बढ़त बना ली। पहले दौर से ही आगे चल रहे किशोर ने यह बढ़त अंत तक बरकरार रखी।
मतगणना का ताज़ा हाल
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 26वें राउंड के बाद प्रशांत किशोर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से 15,864 वोटों की बढ़त पर हैं। दूसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर हैं और 41,633 मतों से पिछड़ी हुई हैं। इस प्रकार मुकाबला मुख्यतः जन सुराज और BJP के बीच सिमट गया है।
जन सुराज कार्यालय में उत्सव का माहौल
लगातार बढ़त की खबर मिलते ही पटना स्थित जन सुराज के प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर पहुँच गया। समर्थकों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर संभावित जीत की अग्रिम बधाइयाँ दीं। कार्यालय परिसर में नारेबाज़ी और उत्साह का माहौल देखा गया। हालाँकि, अंतिम परिणाम सभी 31 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद ही घोषित होगा।
मतगणना की प्रक्रिया
मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई। सर्वप्रथम डाक मतपत्रों की गिनती की गई, इसके बाद सुबह 8:30 बजे से ईवीएम के मतों की गिनती आरंभ हुई। मतगणना के लिए 16 टेबल बनाए गए हैं और प्रत्येक पर तीन-तीन कर्मी तैनात हैं। ईवीएम मतों की गिनती कुल 31 राउंड में पूरी होनी है।
चुनाव की पृष्ठभूमि
बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान हुआ था, जिसमें 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह सीट BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। गौरतलब है कि वर्ष 1995 से यह सीट BJP के कब्जे में रही है। इस उपचुनाव में कुल 25 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें BJP के नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज के प्रशांत किशोर और RJD की रेखा कुमारी प्रमुख थे।
बिहार की राजनीति पर असर
यह उपचुनाव बिहार की राजनीति में कई कारणों से विशेष महत्व रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब जन सुराज पार्टी अपनी चुनावी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है और प्रशांत किशोर एक रणनीतिकार से जनप्रतिनिधि बनने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यदि मौजूदा रुझान अंतिम नतीजों में परिवर्तित होते हैं, तो यह 1995 के बाद पहली बार होगा जब यह सीट BJP के हाथ से निकलेगी — जिसे बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जाएगा।