बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर ने 19,324 मतों से जीत दर्ज, 30 साल पुराना भाजपा का किला ध्वस्त
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 3 अगस्त 2026 को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। यह सीट तीन दशकों से अधिक समय से BJP का अभेद्य गढ़ मानी जाती थी। पहली बार चुनावी मैदान में उतरे प्रशांत किशोर अब बिहार विधानसभा में प्रवेश करने वाले हैं।
मतगणना के प्रमुख आँकड़े
चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक परिणाम के अनुसार, प्रशांत किशोर को कुल 64,151 मत प्राप्त हुए, जबकि BJP उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा 44,827 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता 14,273 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। जीत का अंतर इस क्षेत्र में BJP की पकड़ को चुनौती देने के लिहाज़ से राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
सीट का राजनीतिक इतिहास
गौरतलब है कि बांकीपुर सीट वर्ष 1995 से BJP के नियंत्रण में रही है। नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने इस क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व किया, और नितिन नवीन स्वयं 2006 के उपचुनाव से लेकर 2025 तक यहाँ से विधायक रहे। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से यह सीट रिक्त हुई थी। यह ऐसे समय में आया है जब सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह BJP का पहला विधानसभा उपचुनाव था।
BJP की उम्मीदवारी में उलझन
BJP को इस उपचुनाव में उम्मीदवार चयन को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा। पार्टी ने शुरुआत में अभिषेक सिन्हा 'बंटी' को प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन उनके चुनाव लड़ने में असमर्थता जताने के बाद अंतिम समय में नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा गया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस अनिश्चितता ने पार्टी की चुनावी तैयारी को प्रभावित किया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
BJP के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जनादेश को स्वीकार करते हुए हार की समीक्षा करने की बात कही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम जन सुराज पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला है, विशेषकर इसलिए कि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी।
आगे क्या होगा
विधानसभा में प्रशांत किशोर की उपस्थिति विपक्ष की आवाज़ को और अधिक मुखर कर सकती है। BJP के लिए यह परिणाम संगठनात्मक मजबूती और उम्मीदवार चयन की रणनीति पर पुनर्विचार का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। बांकीपुर की यह जीत बिहार की बदलती राजनीतिक ज़मीन का संकेत देती है।