बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा-राजद में सीधा मुकाबला, प्रशांत किशोर की जन सुराज त्रिकोण बनाने में जुटी
सारांश
मुख्य बातें
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव बिहार की राजनीति में प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। 20 जुलाई 2025 तक के चुनाव प्रचार की तस्वीर यह है कि मैदान में तीन दल — भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जन सुराज — पूरी ताकत से डटे हैं, लेकिन स्थानीय राजनीतिक समीकरण फिलहाल मुकाबले को भाजपा और राजद के बीच द्विध्रुवीय बना रहे हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इस समीकरण को तोड़ने की कोशिश में सक्रिय हैं।
भाजपा की रणनीति और दावे
भाजपा ने अपने प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में प्रचार को बूथ स्तर तक पहुँचा दिया है। पार्टी के 40 स्टार प्रचारक जनसभाओं और घर-घर संपर्क अभियान में लगे हैं। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने दावा किया कि बांकीपुर में पार्टी की जीत तय है और राजद व जन सुराज दूसरे स्थान के लिए आपस में संघर्ष कर रहे हैं।
राजद का पलटवार
राजद भी इस उपचुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अभी तक प्रचार मैदान में नहीं उतरे हैं, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार भाजपा पर हमलावर हैं। राजद प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि बांकीपुर में बदलाव का माहौल है और पार्टी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता जीत दर्ज करेंगी।
शक्ति सिंह यादव ने कहा, 'भ्रम में मत रहिए। अभी तो राष्ट्रीय जनता दल ने सिर्फ मंदिर की घंटी बजाई है और पूरी एनडीए बेचैन हो गई है। भाजपा ने राजद प्रत्याशी के डर से अपना उम्मीदवार तक बदल दिया। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में जनता इस बार बेहतर जनप्रतिनिधि चुनेगी। बांकीपुर का दलित, पिछड़ा, मुस्लिम और अन्य वंचित वर्ग भाजपा को नकारकर राजद प्रत्याशी को जिताएगा।'
जन सुराज की चुनौती और सीमाएँ
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की सभाएँ और सोशल मीडिया अभियान चर्चा में हैं। हालाँकि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जन सुराज के सामने सबसे बड़ी बाधा संगठनात्मक ढाँचे की कमज़ोरी है। कई इलाकों में पार्टी का बूथ-स्तरीय नेटवर्क भाजपा और राजद की तुलना में कमज़ोर नज़र आता है। स्थानीय मतदाताओं से बातचीत में भी यही संकेत मिल रहे हैं कि मुख्य मुकाबला दोनों बड़े दलों के बीच है।
वोट-विभाजन का असर और आगे की राह
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जन सुराज को अपेक्षा से अधिक वोट मिलते हैं, तो उसका सीधा असर भाजपा या राजद के वोट बैंक पर पड़ सकता है — जिससे नतीजा अप्रत्याशित हो सकता है। 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना निर्धारित है। आने वाले दिनों में प्रमुख नेताओं के प्रचार अभियान से मुकाबला और तीखा होने की संभावना है।