एसआईआर विरोध पर जी किशन रेड्डी का पलटवार: कांग्रेस और बीआरएस का रुख 'दुर्भाग्यपूर्ण'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने शुक्रवार, 27 जून 2025 को हैदराबाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का विरोध करना 'दुर्भाग्यपूर्ण' है। उन्होंने सीधे तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दल मजलिस पार्टी के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।
एसआईआर क्या है और क्यों हो रही है यह प्रक्रिया
किशन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि एसआईआर कोई सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह चुनाव आयोग (ECI) की देखरेख में संचालित की जा रही है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और फर्जी मतदाताओं को चिह्नित करना है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में भी यह प्रक्रिया स्थानीय अधिकारियों की सहभागिता से शुरू हो रही है।
बांग्लादेशी घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं पर फोकस
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, एसआईआर के तहत विशेष रूप से उन लोगों की पहचान की जाएगी जो अवैध रूप से निवास कर रहे हैं — इनमें बांग्लादेशी घुसपैठिए भी शामिल हैं, जो कथित तौर पर मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेते रहे हैं। इसके अलावा, पिछले 20 वर्षों में जिन मतदाताओं का निधन हो चुका है, उनके नाम भी सूची से हटाए जाएंगे। रेड्डी ने कहा, 'एक स्वस्थ लोकतंत्र में ऐसे लोगों को चिह्नित करना ज़रूरी होता है।'
तेलंगाना सरकार पर सीधा हमला
किशन रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह अफ़सोस की बात है कि राज्य सरकार अपने ही अधिकारियों पर भरोसा नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि सीएम का यह बयान — कि 'हम किसी भी अधिकारी को अपने इलाके में एसआईआर करने नहीं देंगे' — 'पूरी तरह से गलत और अशोभनीय' है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी दलों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई हो।
युवाओं से अपील
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे एसआईआर की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें और इसे सफल बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि जिन पात्र नागरिकों को अभी तक मताधिकार नहीं मिला है, उन्हें यह अधिकार दिलाना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है — साथ ही अवैध मतदाताओं की पहचान भी सुनिश्चित की जाएगी।
आगे क्या होगा
एसआईआर की प्रक्रिया 27 जून 2025 से तेलंगाना सहित देशभर में शुरू हो रही है। स्थानीय अधिकारियों और ग्रामीण स्तर के प्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाएगा। विपक्ष के विरोध के बावजूद चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया संवैधानिक ढाँचे के तहत जारी रहेगी — और इसका असर आगामी चुनावों की तैयारी पर सीधे पड़ेगा।