'जियो पारसी' योजना: 2014-15 से अब तक 534 बच्चों का जन्म, ₹37.43 करोड़ खर्च — रिजिजू
सारांश
मुख्य बातें
अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 10 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में खुलासा किया कि केंद्र सरकार की 'जियो पारसी' योजना के तहत 2014-15 से अब तक पारसी समुदाय में 534 बच्चों का जन्म हो चुका है। इस योजना पर सरकार अब तक कुल ₹37.43 करोड़ व्यय कर चुकी है, जो घटती पारसी आबादी को स्थिर करने के राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है।
योजना की उपलब्धियाँ
रिजिजू ने सदन को बताया कि 500 से अधिक बच्चों के जन्म ने पारसी समुदाय में जनसंख्या स्थिरीकरण की नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि स्वतंत्र थर्ड-पार्टी मूल्यांकन अध्ययनों में इस योजना को अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में सफल पाया गया है।
मेडिकल घटक के अंतर्गत, 2013 से अब तक बांझपन उपचार, गर्भधारण सहायता और प्रसवोत्तर देखभाल के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले पारसी समुदाय के लाभार्थियों की कुल संख्या 582 है। वहीं, 2018-19 से 'सामुदायिक स्वास्थ्य' घटक के तहत लाभान्वित लोगों की संख्या 1,055 रही है।
वित्तीय व्यय का विवरण
मंत्री ने वर्षवार खर्च का ब्यौरा देते हुए बताया कि 2025-26 में सामुदायिक स्वास्थ्य घटक पर ₹2.93 करोड़, मेडिकल घटक पर ₹24 लाख और एडवोकेसी (जागरूकता अभियान) पर ₹29 लाख व्यय किए गए। इससे पूर्व 2023-24 में सामुदायिक स्वास्थ्य घटक पर ₹2.53 करोड़ और 2024-25 में ₹2.66 करोड़ खर्च हुए — जो इस मद में लगातार वृद्धि का संकेत है।
जागरूकता और पहुँच के प्रयास
रिजिजू ने बताया कि योजना के प्रचार-प्रसार के लिए नियमित रूप से कार्यशालाएँ, संवाद सत्र, पंजीकरण अभियान और बायो-ऑथेंटिकेशन अभियान आयोजित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, योजना से संबंधित जानकारी प्रमुख पारसी समाचारपत्रों के माध्यम से हर महीने प्रकाशित की जाती है। गौरतलब है कि सामुदायिक स्वास्थ्य घटक के तहत लाभार्थियों को कोई प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता नहीं दी जाती।
पारसी समुदाय और जनसंख्या संकट
यह ऐसे समय में आया है जब पारसी समुदाय दशकों से जनसंख्या ह्रास की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, भारत में पारसियों की संख्या लगातार घटती रही है। 'जियो पारसी' योजना को 2013 में इसी संकट से निपटने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, और यह देश में किसी अल्पसंख्यक समुदाय की जनसंख्या वृद्धि के लिए बनाई गई अपनी तरह की अनूठी सरकारी पहल है।
आगे की राह
सरकारी आँकड़ों और स्वतंत्र मूल्यांकन की सकारात्मक रिपोर्टों के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि पारसी समुदाय की जनसंख्या को दीर्घकालिक रूप से स्थिर करने के लिए योजना के विस्तार और निरंतर वित्त पोषण की आवश्यकता बनी रहेगी। सामुदायिक स्वास्थ्य घटक पर बढ़ता वार्षिक व्यय इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।