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'जननी' डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च: 1.34 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत, मातृ-शिशु स्वास्थ्य ट्रैकिंग होगी आसान

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'जननी' डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च: 1.34 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत, मातृ-शिशु स्वास्थ्य ट्रैकिंग होगी आसान

सारांश

केंद्र सरकार का 'जननी' प्लेटफॉर्म सिर्फ एक डिजिटल रजिस्ट्री नहीं है — यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की निगरानी में एक बड़ा बदलाव है। 1.34 करोड़ पंजीकृत लाभार्थियों और QR-आधारित स्वास्थ्य कार्ड के साथ, यह प्रणाली प्रवासी महिलाओं से लेकर हाई-रिस्क गर्भावस्था तक हर स्तर पर निगरानी को मज़बूत करती है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 'जननी' नामक QR-आधारित डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म लॉन्च किया।
अब तक 1.34 करोड़ लाभार्थियों का पंजीकरण, 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाएँ पंजीकृत।
30 लाख से ज़्यादा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड जारी; 1 लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन पूरे।
प्लेटफॉर्म को यू-विन और पोषण जैसे राष्ट्रीय मंचों से एकीकृत किया गया है।
यह मौजूदा आरसीएच पोर्टल का उन्नत संस्करण है, जिसमें हाई-रिस्क गर्भावस्था के लिए स्वचालित अलर्ट और रियल-टाइम डैशबोर्ड शामिल हैं।
प्रवासी आबादी के लिए भी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित की जाएगी।

केंद्र सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को डिजिटल रूप देने के लिए 'जननी' (प्रसवपूर्व, प्रसवकालीन और नवजात शिशु की एकीकृत देखभाल की यात्रा) नामक क्यूआर-आधारित डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। 7 मई 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.34 करोड़ लाभार्थियों का पंजीकरण हो चुका है। यह पहल महिलाओं के प्रजनन काल से लेकर नवजात शिशु देखभाल तक के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एकीकृत और सुरक्षित डिजिटल प्रारूप में दर्ज करने का लक्ष्य रखती है।

प्लेटफॉर्म में क्या-क्या शामिल है

सरकार के अनुसार, 'जननी' प्लेटफॉर्म गर्भावस्था पूर्व देखभाल, प्रसव की तैयारी, प्रसव, प्रसव पश्चात देखभाल, नवजात शिशु देखभाल, घर-आधारित नवजात एवं छोटे बच्चों की देखभाल, तथा परिवार नियोजन जैसी सेवाओं को एक ही मंच पर समेटता है। यह नई प्रणाली मौजूदा आरसीएच (RCH) पोर्टल के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित की गई है और देखभाल की पूरी प्रक्रिया के दौरान एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करती है।

प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ

इस प्लेटफॉर्म की एक महत्वपूर्ण विशेषता क्यूआर-आधारित डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड है, जिससे स्वास्थ्य रिकॉर्ड कहीं भी, कभी भी उपलब्ध हो सकते हैं। इसके अलावा, हाई-रिस्क गर्भावस्था के लिए स्वचालित अलर्ट, रियल-टाइम डैशबोर्ड और जरूरी मामलों की प्राथमिकता सूची जैसी सुविधाएँ भी इसमें शामिल हैं। लाभार्थियों का पंजीकरण एबीएचए (ABHA), आधार (ओटीपी और बायोमेट्रिक) और मोबाइल नंबर जैसे यूनिक पहचान माध्यमों से किया जा सकता है।

राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म से एकीकरण

'जननी' को यू-विन (U-WIN) और पोषण जैसे राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मंचों से भी जोड़ा गया है, जिससे विभिन्न योजनाओं के बीच डेटा साझेदारी और लाभार्थियों की निगरानी सुगम होगी। यह प्रणाली प्रवासी आबादी के लिए भी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करेगी और रिकॉर्ड की दोहराव वाली प्रविष्टियों को रोकेगी। गौरतलब है कि प्रवासी महिलाओं के लिए स्वास्थ्य रिकॉर्ड की निरंतरता एक लंबे समय से चली आ रही चुनौती रही है।

अब तक की उपलब्धियाँ

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 'जननी' प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.34 करोड़ लाभार्थियों का पंजीकरण हो चुका है। इनमें 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाएँ पंजीकृत हैं, 30 लाख से ज़्यादा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं, और 1 लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन पूरे किए जा चुके हैं।

आगे क्या होगा

यह प्लेटफॉर्म गर्भावस्था जाँच और टीकाकरण की समय पर योजना व निगरानी में भी सहायता करेगा। वेब और मोबाइल दोनों माध्यमों से स्वयं पंजीकरण की सुविधा दी गई है, जिससे महिलाएँ अपने स्वास्थ्य प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी। साथ ही यह नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्रों की जानकारी, संभावित प्रसव स्थल और पोषण संबंधी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएगा — जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी, जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता अभी भी बड़ी चुनौती है। 1.34 करोड़ पंजीकरण का आँकड़ा प्रभावशाली लगता है, परंतु भारत में हर वर्ष लगभग 2.5 करोड़ प्रसव होते हैं — यानी अभी भी बड़ी आबादी इस प्रणाली से बाहर है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत मातृ मृत्यु दर में कमी के अपने SDG लक्ष्यों को पाने की कोशिश कर रहा है, और डिजिटल निगरानी उस दिशा में एक ज़रूरी कदम है। बिना ज़मीनी स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाए और बिना डेटा की जवाबदेही तय किए, यह प्लेटफॉर्म महज़ एक डिजिटल रजिस्ट्री बनकर रह सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'जननी' प्लेटफॉर्म क्या है?
'जननी' (प्रसवपूर्व, प्रसवकालीन और नवजात शिशु की एकीकृत देखभाल की यात्रा) केंद्र सरकार द्वारा लॉन्च किया गया QR-आधारित डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म है, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और ट्रैकिंग को एकीकृत करता है। यह मौजूदा आरसीएच पोर्टल का उन्नत संस्करण है।
'जननी' प्लेटफॉर्म पर अब तक कितने लाभार्थी पंजीकृत हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 'जननी' प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.34 करोड़ लाभार्थियों का पंजीकरण हो चुका है, जिनमें 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाएँ शामिल हैं। इसके अलावा 30 लाख से ज़्यादा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड जारी और 1 लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन पूरे किए जा चुके हैं।
'जननी' प्लेटफॉर्म में QR-आधारित कार्ड का क्या फायदा है?
QR-आधारित डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड से लाभार्थी का स्वास्थ्य रिकॉर्ड कहीं भी और कभी भी आसानी से उपलब्ध हो सकता है। यह विशेष रूप से प्रवासी महिलाओं के लिए उपयोगी है, जो एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड की निरंतरता बनाए रख सकती हैं।
'जननी' प्लेटफॉर्म किन राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म से जुड़ा है?
'जननी' प्लेटफॉर्म को यू-विन (U-WIN) और पोषण जैसे राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मंचों से एकीकृत किया गया है। इससे विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच डेटा साझेदारी और लाभार्थियों की समग्र निगरानी सुगम होगी।
'जननी' प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कैसे होता है?
लाभार्थी एबीएचए (ABHA), आधार (ओटीपी और बायोमेट्रिक) या मोबाइल नंबर के ज़रिए पंजीकरण करा सकते हैं। वेब और मोबाइल दोनों माध्यमों से स्वयं पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध है।
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