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क्या जून तक कुल 16,912 जन औषधि केंद्र स्थापित हुए और नागरिकों को 38,000 करोड़ रुपए की बचत हुई?

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क्या जून तक कुल 16,912 जन औषधि केंद्र स्थापित हुए और नागरिकों को 38,000 करोड़ रुपए की बचत हुई?

सारांश

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के अंतर्गत, 16,912 जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। इस पहल से नागरिकों को 38,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। जानिए इस परियोजना के लाभ और इसके पीछे की रणनीतियों के बारे में।

मुख्य बातें

16,912 जन औषधि केंद्र खोले गए हैं।
नागरिकों को 38,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है।
इस योजना के अंतर्गत 2,110 दवाइयां उपलब्ध हैं।
मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य।
सरकार ने फ्रैंचाइजी मॉडल अपनाया है।

नई दिल्ली, 30 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत जून तक कुल 16,912 जन औषधि केंद्र (जेएके) खोले जा चुके हैं।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य मंत्री पटेल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य सभी को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराना है।

इस योजना के अंतर्गत लगभग 2,110 दवाइयां और 315 सर्जिकल, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं और उपकरण शामिल हैं।

इसमें सभी प्रमुख चिकित्सीय समूह, जैसे हृदय रोग, कैंसर-रोधी, मधुमेह-रोधी, संक्रमण-रोधी, एलर्जी-रोधी और गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल दवाएं और न्यूट्रास्युटिकल्स शामिल हैं।

लैब रीजेंट और वैक्सीन को छोड़कर, आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं इस योजना के उत्पाद समूह में शामिल हैं।

राज्य मंत्री पटेल ने कहा, "पिछले 11 वर्षों में, ब्रांडेड दवाओं की कीमतों की तुलना में नागरिकों को लगभग 38,000 करोड़ रुपए की अनुमानित बचत हुई है।"

नेशनल हेल्थ अकाउंट अनुमानों के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जन औषधि केंद्रों (जेएके) ने वित्त वर्ष 2014-15 में कुल स्वास्थ्य व्यय के 62.6 प्रतिशत से वित्त वर्ष 2021-22 में 39.4 प्रतिशत तक परिवारों द्वारा अपनी जेब से किए जाने वाले खर्च में भारी कमी लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने बताया सबसे अधिक जन औषधि केंद्र 3,550 उत्तर प्रदेश में हैं, उसके बाद 1,629 केरल, 1,480 कर्नाटक और 1,432 तमिलनाडु में हैं।

राज्य मंत्री ने सरकार के मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने के लक्ष्य की भी जानकारी दी।

सरकार ने जन औषधि केंद्र खोलने में फ्रैंचाइजी जैसा मॉडल अपनाया है, जिसमें देश भर के विभिन्न ब्लॉकों और तहसीलों सहित, फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) की वेबसाइट के माध्यम से व्यक्तिगत उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों, समितियों, ट्रस्टों, फर्मों, निजी कंपनियों आदि से आवेदन ऑनलाइन आमंत्रित किए जाते हैं।

स्टॉकिंग अधिदेश के तहत, जेएके मालिक अपने द्वारा रखे गए 200 दवाओं के स्टॉक के आधार पर प्रोत्साहन का दावा करने के पात्र हो जाते हैं।

राज्य मंत्री पटेल ने कहा, "जेएके में सुचारू आपूर्ति और उत्पाद उपलब्धता के लिए, एक संपूर्ण आईटी-सक्षम सप्लाई चेन सिस्टम स्थापित किया गया है, जिसमें एक केंद्रीय गोदाम, चार क्षेत्रीय गोदाम और देश भर में नियुक्त 39 वितरक शामिल हैं।"

राज्य मंत्री ने आगे कहा, "400 फास्ट-मूविंग प्रोडक्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उनकी उपलब्धता की नियमित रूप से निगरानी की जाती है। इसके अलावा, 200 दवाओं के लिए न्यूनतम स्टॉकिंग अधिदेश लागू किया गया है, जिसमें स्कीम प्रोडक्ट बास्केट की 100 सबसे अधिक बिकने वाली दवाएं और बाजार में 100 तेजी से बिकने वाली दवाएं शामिल हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जो नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ती और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह योजना न केवल दवाओं की लागत को कम कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य खर्च को भी नियंत्रित कर रही है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन औषधि केंद्र क्या हैं?
जन औषधि केंद्र वे स्थान हैं जहां किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं।
इस योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य सभी नागरिकों को सस्ती दवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।
कितने जन औषधि केंद्र खोले गए हैं?
जून तक कुल 16,912 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं।
इस योजना से नागरिकों को कितनी बचत हुई है?
नागरिकों को लगभग 38,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है।
सरकार का भविष्य का लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलना है।
राष्ट्र प्रेस
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