तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी की कांग्रेस नेताओं को चेतावनी: एसआईआर में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 24 जून 2026 को पार्टी नेताओं के साथ आयोजित एक जूम बैठक में विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो नेता पार्टी के निर्देशों का पालन करने में लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में वास्तविक एवं पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं।
बैठक में क्या हुआ
बुधवार को आयोजित इस वर्चुअल बैठक में मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और विधानसभा क्षेत्र प्रभारियों को एसआईआर प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जिला-वार रिपोर्टें मिल चुकी हैं और अगले 10 दिनों तक सभी प्रभारियों के कामकाज पर निरंतर नजर रखी जाएगी। बैठक में महेश कुमार गौड़, मीनाक्षी नटराजन, मल्लू भट्टी विक्रमार्क और सचिन सावंत समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
प्रभारियों पर कार्रवाई की चेतावनी
रेवंत रेड्डी ने साफ कहा कि जो प्रभारी पार्टी के निर्देशों को लागू करने में विफल रहेंगे, उनकी जगह नए प्रभारियों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने जिम्मेदारी प्रभारी मंत्रियों को सौंपते हुए कहा कि अधिक से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं और बैठकों को सफल बनाया जाए। गौरतलब है कि यह चेतावनी उन रिपोर्टों के बाद आई है जिनमें कहा गया कि कुछ नेता एसआईआर को पर्याप्त गंभीरता से नहीं ले रहे।
गरीब मतदाताओं के अधिकारों पर जोर
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि एसआईआर के दौरान गरीब और वंचित वर्ग के मतदान अधिकारों की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके अनुसार, यदि इन नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हट जाते हैं, तो भविष्य में उनके आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी आवश्यक सुविधाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस समर्थित सरपंचों से अपील की कि वे गाँव-गाँव में एसआईआर को लेकर जागरूकता अभियान चलाएं।
टीपीसीसी की भूमिका और भाजपा पर नजर
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने कहा कि सभी वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीतियों पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे का उल्लेख करते हुए विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पार्टी को एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का नुकसान होता है, तो वे मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे। अगले 10 दिनों में प्रभारियों के प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर संगठनात्मक फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।