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अफजाल अंसारी की डालीबाग कोठी वापस: इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर परिवार को मिला कब्जा

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अफजाल अंसारी की डालीबाग कोठी वापस: इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर परिवार को मिला कब्जा

सारांश

गाजीपुर पुलिस ने 2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत सील की थी सपा सांसद अफजाल अंसारी की लखनऊ कोठी — विशेष अदालत ने अप्रैल 2025 में कुर्की खारिज की, फिर भी प्रशासन ने देरी की। आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद परिवार को 6,700 वर्ग फुट की संपत्ति का कब्जा वापस मिला।

मुख्य बातें

सपा सांसद अफजाल अंसारी की लखनऊ के डालीबाग स्थित 6,700 वर्ग फुट कोठी परिवार को वापस सौंपी गई।
संपत्ति को अक्टूबर 2022 में गाजीपुर पुलिस ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कुर्क कर सील किया था।
गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने अप्रैल 2025 में संपत्ति को अपराध से अर्जित मानने से इनकार करते हुए 30 दिनों में वापसी का आदेश दिया था।
प्रशासनिक विलंब के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई, जिसके निर्देश पर कब्जा वापस मिला।
संपत्ति फरहत अंसारी के नाम दर्ज है; अफजाल अंसारी के अनुसार भूखंड 1998 में खरीदा और 2001 में निर्माण पूरा हुआ था।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अफजाल अंसारी की लखनऊ के डालीबाग इलाके में स्थित कोठी 3 सितंबर 2025 को उनके परिवार को वापस सौंप दी गई। उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत अक्टूबर 2022 में कुर्क की गई इस संपत्ति का कब्जा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में नगर निगम और राजस्व विभाग की टीम ने परिवार को सौंपा। यह कार्रवाई तब हुई जब निचली अदालत के आदेश के बावजूद प्रशासन ने संपत्ति समय पर वापस नहीं की थी।

संपत्ति की पृष्ठभूमि

करीब 6,700 वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैली यह कोठी अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम पर दर्ज है। अंसारी के अनुसार, उन्होंने यह भूखंड वर्ष 1998 में खरीदा था और वर्ष 2001 में निर्माण पूर्ण होने के बाद उनका परिवार यहाँ निवास करने लगा था। गाजीपुर पुलिस ने अक्टूबर 2022 में इसे अपराध से अर्जित संपत्ति बताते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क कर सील कर दिया था।

अदालत का फैसला और प्रशासनिक विलंब

गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने अप्रैल 2025 में सुनवाई के बाद यह मानने से इनकार कर दिया कि यह संपत्ति किसी अपराध या गैंगस्टर गतिविधि से अर्जित की गई थी। अदालत ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को 30 दिनों के भीतर सील खोलकर संपत्ति वापस करने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि इस आदेश के बावजूद प्रशासन ने निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद परिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम बुधवार को डालीबाग स्थित संपत्ति पर पहुँची। आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद सील खोलने का पंचनामा तैयार किया गया। कब्जा हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया के दौरान तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम मौके पर उपस्थित रही।

संपत्ति तक पहुँच बहाल

संपत्ति तक जाने वाले रास्ते पर जमे कूड़े को हटाने के लिए नगर निगम की ओर से बुलडोजर का उपयोग किया गया, जिसके बाद परिवार को परिसर तक पहुँचने का रास्ता उपलब्ध कराया गया। दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकारियों ने औपचारिक रूप से संपत्ति का कब्जा परिवार को सौंपा।

अफजाल अंसारी का पक्ष

कब्जा लेने पहुँचे अफजाल अंसारी ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1998 में यह भूखंड खरीदा था और वर्ष 2001 से उनका परिवार यहाँ रह रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में इस संपत्ति को अपराध से अर्जित बताकर गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क और सील कर दिया गया था। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद प्रशासनिक अनुपालन में विलंब होने पर उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह न्यायिक आदेशों के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही की गंभीर कमी को दर्शाता है। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का इस्तेमाल कभी-कभी कानूनी प्रक्रिया की आड़ में दबाव बनाने के लिए किया जाता है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप इस बात की याद दिलाता है कि न्यायपालिका ही अंततः नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की अंतिम रक्षक है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफजाल अंसारी की डालीबाग कोठी को क्यों कुर्क किया गया था?
गाजीपुर पुलिस ने अक्टूबर 2022 में इस संपत्ति को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति बताते हुए कुर्क और सील किया था। करीब 6,700 वर्ग फुट की यह कोठी अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम दर्ज है।
अदालत ने संपत्ति वापसी का आदेश कब दिया?
गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने अप्रैल 2025 में सुनवाई के बाद संपत्ति को अपराध से अर्जित मानने से इनकार कर दिया और गाजीपुर के जिलाधिकारी को 30 दिनों के भीतर सील खोलकर संपत्ति वापस करने का आदेश दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट को क्यों हस्तक्षेप करना पड़ा?
विशेष अदालत के आदेश के बावजूद प्रशासन ने निर्धारित समय में संपत्ति वापस नहीं की, जिसके बाद अफजाल अंसारी के परिवार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ही प्रशासन ने बुधवार को कार्रवाई करते हुए कब्जा परिवार को सौंपा।
अफजाल अंसारी ने इस संपत्ति के बारे में क्या कहा?
अफजाल अंसारी ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1998 में यह भूखंड खरीदा था और वर्ष 2001 में निर्माण पूर्ण होने के बाद उनका परिवार यहाँ रहने लगा था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2022 में इसे अपराध से अर्जित संपत्ति बताकर गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क और सील कर दिया गया था।
कब्जा वापसी की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?
बुधवार को तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुँची और कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद सील खोलने का पंचनामा तैयार किया गया। नगर निगम ने बुलडोजर से रास्ते का कूड़ा हटाया और इसके बाद परिवार को संपत्ति का कब्जा सौंपा गया।
राष्ट्र प्रेस
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