अफजाल अंसारी की डालीबाग कोठी वापस: इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर परिवार को मिला कब्जा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अफजाल अंसारी की लखनऊ के डालीबाग इलाके में स्थित कोठी 3 सितंबर 2025 को उनके परिवार को वापस सौंप दी गई। उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत अक्टूबर 2022 में कुर्क की गई इस संपत्ति का कब्जा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में नगर निगम और राजस्व विभाग की टीम ने परिवार को सौंपा। यह कार्रवाई तब हुई जब निचली अदालत के आदेश के बावजूद प्रशासन ने संपत्ति समय पर वापस नहीं की थी।
संपत्ति की पृष्ठभूमि
करीब 6,700 वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैली यह कोठी अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम पर दर्ज है। अंसारी के अनुसार, उन्होंने यह भूखंड वर्ष 1998 में खरीदा था और वर्ष 2001 में निर्माण पूर्ण होने के बाद उनका परिवार यहाँ निवास करने लगा था। गाजीपुर पुलिस ने अक्टूबर 2022 में इसे अपराध से अर्जित संपत्ति बताते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क कर सील कर दिया था।
अदालत का फैसला और प्रशासनिक विलंब
गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने अप्रैल 2025 में सुनवाई के बाद यह मानने से इनकार कर दिया कि यह संपत्ति किसी अपराध या गैंगस्टर गतिविधि से अर्जित की गई थी। अदालत ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को 30 दिनों के भीतर सील खोलकर संपत्ति वापस करने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि इस आदेश के बावजूद प्रशासन ने निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद परिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम बुधवार को डालीबाग स्थित संपत्ति पर पहुँची। आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद सील खोलने का पंचनामा तैयार किया गया। कब्जा हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया के दौरान तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम मौके पर उपस्थित रही।
संपत्ति तक पहुँच बहाल
संपत्ति तक जाने वाले रास्ते पर जमे कूड़े को हटाने के लिए नगर निगम की ओर से बुलडोजर का उपयोग किया गया, जिसके बाद परिवार को परिसर तक पहुँचने का रास्ता उपलब्ध कराया गया। दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकारियों ने औपचारिक रूप से संपत्ति का कब्जा परिवार को सौंपा।
अफजाल अंसारी का पक्ष
कब्जा लेने पहुँचे अफजाल अंसारी ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1998 में यह भूखंड खरीदा था और वर्ष 2001 से उनका परिवार यहाँ रह रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में इस संपत्ति को अपराध से अर्जित बताकर गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क और सील कर दिया गया था। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद प्रशासनिक अनुपालन में विलंब होने पर उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ता है।