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क्या सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर को बिहार एसआईआर समय-सीमा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई करेगा?

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क्या सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर को बिहार एसआईआर समय-सीमा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई करेगा?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की मतदाता सूची में एसआईआर के तहत समय-सीमा बढ़ाने की याचिकाओं पर सुनवाई का निर्णय लिया है। इस मामले की सुनवाई 1 सितंबर को होगी। क्या यह निर्णय बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करेगा? जानिए इस महत्वपूर्ण मामले की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की मतदाता सूची के एसआईआर पर सुनवाई की तिथि निर्धारित की।
समय-सीमा बढ़ाने की याचिका पर विचार किया जाएगा।
चुनाव आयोग को निर्देश दिए गए हैं।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची बताई गई।
राजनीतिक दलों को मतदाताओं की सहायता करने के निर्देश दिए गए हैं।

नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने दिनांकित शुक्रवार को बिहार की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पहले चरण के उपरांत भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए समय-सीमा बढ़ाने की याचिका पर विचार किया। न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई 1 सितंबर को आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने न्यायालय में तर्क प्रस्तुत किया कि राष्ट्रीय जनता दल और अन्य राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित 1 सितंबर की समय-सीमा को बढ़ाने के लिए आवेदन किए हैं।

पिछली सुनवाई में, न्यायमूर्ति कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पक्षकारों को मौखिक आश्वासन दिया था कि उनकी समय सीमा बढ़ाने की याचिका पर विचार किया जाएगा। इस मामले की सुनवाई 8 सितंबर के लिए निर्धारित की गई थी।

इसके साथ ही, चुनाव आयोग को यह निर्देश दिया गया था कि वह उन मतदाताओं से ऑनलाइन दावा प्रपत्र स्वीकार करे जो मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं, और भौतिक दस्तावेजों को जमा करने पर जोर न डाला जाए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए क्लेम फॉर्म को चुनाव आयोग द्वारा पहले सूचीबद्ध 11 दस्तावेजों में से किसी एक या आधार कार्ड के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। कोर्ट ने बिहार में सभी राजनीतिक दलों और उनके बूथ-स्तरीय कार्यकर्ताओं (बीएलए) को यह निर्देश दिया कि वे उन व्यक्तियों की सहायता करें जो गणना फॉर्म जमा नहीं कर सके और जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।

14 अगस्त को, न्यायमूर्ति कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक अंतरिम आदेश में चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह बिहार में चुनाव से पहले की गई मतदाता सूची से हटाए गए लगभग 65 लाख मतदाताओं का जिला-वार डेटा अपलोड करे। इसके साथ ही, उनके नाम हटाने के कारण जैसे कि मृत्यु, निवास स्थान में परिवर्तन या दोहरी प्रविष्टि, भी स्पष्ट किए जाएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि हर मतदाता की आवाज सुनी जा सके।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार की मतदाता सूची में एसआईआर के तहत क्या हो रहा है?
बिहार की मतदाता सूची में एसआईआर के तहत समय-सीमा बढ़ाने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर को सुनवाई करेगा।
क्यों सुप्रीम कोर्ट ने समय-सीमा बढ़ाने पर विचार किया?
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची में दावे और आपत्तियों को दर्ज करने के लिए समय-सीमा बढ़ाने की याचिकाओं पर विचार किया।
क्या राजनीतिक दलों ने समय-सीमा बढ़ाने के लिए याचिका दायर की है?
हाँ, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य राजनीतिक दलों ने समय-सीमा बढ़ाने के लिए याचिका दायर की है।
राष्ट्र प्रेस
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