आईसीआईसीआई बैंक ने आरबीआई की एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा के तहत जुटाए $17.88 अरब, कुल प्रवाह $72.85 अरब पार
सारांश
मुख्य बातें
आईसीआईसीआई बैंक ने 2 सितंबर 2026 को एक्सचेंज फाइलिंग के ज़रिए खुलासा किया कि उसने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के अंतर्गत विदेशी मुद्रा अनिवासी — एफसीएनआर(बी) — जमाओं के माध्यम से करीब $17.88 अरब की विदेशी मुद्रा जुटाई है। यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब RBI की यह महत्वाकांक्षी योजना अनुमान से पहले ही बंद की जा चुकी है और देश की अब तक की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ विदेशी मुद्रा जुटाने की कवायद के रूप में इसे रेखांकित किया जा रहा है।
आईसीआईसीआई बैंक की हिस्सेदारी का ब्यौरा
बैंक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जुटाई गई कुल राशि में से बैंक की अंतरराष्ट्रीय शाखाओं और सहायक कंपनियों द्वारा एफसीएनआर(बी) जमाओं के बदले दिए गए ऋण की राशि करीब $9 अरब रही। इसके अतिरिक्त, इन्हीं जमाओं से समर्थित ऋण के बदले बैंक द्वारा अन्य ऋणदाताओं को जारी किए गए स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (SBLC) करीब $3.63 अरब के रहे।
इसके अलावा, आईसीआईसीआई बैंक ने जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान कुल $3.55 अरब मूल्य के अमेरिकी डॉलर-मूल्यवर्ग के बॉन्ड भी जारी किए।
आरबीआई की स्वैप योजना: पृष्ठभूमि और दायरा
RBI ने रुपए पर बढ़ते दबाव के बीच विदेशी मुद्रा प्रवाह को गति देने के उद्देश्य से 8 जून 2026 को यह विशेष सुविधा शुरू की थी। 21 अगस्त 2026 तक अधिकृत डीलर बैंकों ने इस योजना के तहत $72.848 अरब का विदेशी मुद्रा प्रवाह जुटाया, जिसमें एफसीएनआर(बी) जमाओं की हिस्सेदारी $65.397 अरब रही।
गौरतलब है कि 21 अगस्त तक बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB) और ओवरसीज़ फॉरेन करेंसी बॉरोइंग (OFCB) के ज़रिए अतिरिक्त $7.451 अरब का प्रवाह दर्ज किया गया। ECB और OFCB के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी।
योजना की समयसीमा और ऐतिहासिक तुलना
शुरुआत में RBI ने एफसीएनआर(बी) विंडो को 30 सितंबर 2026 तक खुला रखने की घोषणा की थी। हालाँकि, उत्साहजनक प्रतिक्रिया और पर्याप्त विदेशी मुद्रा जुटाए जाने का हवाला देते हुए इसे निर्धारित समय से पहले ही 31 अगस्त 2026 को बंद कर दिया गया।
सरकार ने अगस्त में इस योजना को भारत की अब तक की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ विदेशी मुद्रा जुटाने की पहल बताया था। आँकड़ों के अनुसार, यह 2013 की एफसीएनआर(बी) स्वैप योजना के स्तर को भी पार कर गई है — जो उस दौर में रुपए की तीव्र गिरावट रोकने के लिए शुरू की गई थी।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि RBI की इस डॉलर जमा योजना के ज़रिए कुल मिलाकर $100 अरब से अधिक की राशि जुटाई गई है, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
आगे क्या
ECB और OFCB विंडो के 31 दिसंबर 2026 तक सक्रिय रहने से विदेशी मुद्रा प्रवाह में और वृद्धि की संभावना बनी हुई है। विश्लेषकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि इन जमाओं की परिपक्वता के समय RBI किस तरह स्वैप दायित्वों का प्रबंधन करता है और रुपए की स्थिरता पर इसका दीर्घकालिक असर क्या होता है।