अमृत ग्रुप पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: 20 ठिकानों पर छापे, ₹2.75 करोड़ जब्त, ₹131 करोड़ की ठगी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमृत ग्रुप की कंपनियों और उनके प्रमोटरों के खिलाफ बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए 16 और 17 सितंबर 2026 को कोलकाता, इंदौर और जयपुर में 20 आवासीय व व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की गई इस छापेमारी में ₹2.75 करोड़ से अधिक की चल संपत्ति जब्त और फ्रीज की गई है। मामला आम जनता से ₹131.86 करोड़ से अधिक की कथित ठगी से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की यह जाँच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा 1 अगस्त 2025 को दर्ज कराई गई आपराधिक शिकायत के आधार पर शुरू हुई। शिकायत मेसर्स अमृत प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (APL), मेसर्स अमृत बायो-एनर्जी एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ABEIL), मेसर्स अमृत प्रोजेक्ट्स (APNEL), मेसर्स अमृत बाजार परिसेवा लिमिटेड (ABPL) और उनके निदेशकों के खिलाफ कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 447 सहित अन्य धाराओं के तहत दर्ज की गई थी, जो PMLA के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आती है।
ठगी का तरीका
जाँच में सामने आया है कि कैलाश चंद दुजारी, काली किशोर बागची, अमृत दुजारी और अन्य आरोपितों ने अपनी कंपनियों के माध्यम से आम निवेशकों से फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट, मासिक/तिमाही आय योजनाओं और क्लब सदस्यता के नाम पर ₹131.86 करोड़ जुटाए। जमाकर्ताओं को निश्चित रिटर्न का आश्वासन दिया गया, जबकि कागजों पर इसे रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर, डीप डिस्काउंट बॉन्ड और हर्ब योजनाओं में निवेश के तौर पर दर्शाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 तक लगभग ₹71.04 करोड़ जमाकर्ताओं को वापस नहीं किए गए थे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पोंजी और सामूहिक निवेश योजनाओं पर प्रवर्तन एजेंसियों की नज़र तेज हुई है।
फंड का दुरुपयोग और शेल कंपनियाँ
जाँच में यह भी उजागर हुआ कि कैलाश चंद दुजारी और अन्य निदेशकों ने जनता से जुटाई गई राशि को शेल कंपनियों में डायवर्ट किया। बाद में इस पैसे से प्रमोटरों और उनकी फर्जी कंपनियों के नाम पर अचल संपत्तियाँ खरीदी गईं और नकद निकाला गया। छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों के अनुसार जयपुर, इंदौर और दिल्ली में होटलों, स्कूलों, रिहायशी संपत्तियों और ज़मीनों में किए गए निवेश से जुड़े रिकॉर्ड बरामद हुए हैं, जिनमें ₹20 करोड़ से अधिक के बेनामी निवेश शामिल होने का संकेत है।
छापेमारी में क्या-क्या मिला
ईडी ने बताया कि जब्त की गई ₹2.75 करोड़ से अधिक की संपत्ति में ₹1 करोड़ नकद, 4,800 अमेरिकी डॉलर विदेशी मुद्रा, बैंक बैलेंस और अन्य निवेश शामिल हैं। इसके अलावा, कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और हवाला लेन-देन के रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, ये साक्ष्य अपराध से अर्जित धन के प्रवाह और उसे छिपाने के तरीकों को उजागर करेंगे।
आगे की जाँच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है। गौरतलब है कि SFIO की शिकायत के बाद से यह मामला प्रवर्तन एजेंसियों के लिए प्राथमिकता बना हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि शेल कंपनियों के नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों की परतों को उधेड़ने में अभी और समय लग सकता है, तथा संबंधित व्यक्तियों पर गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है।