18 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अमृत ग्रुप पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: 20 ठिकानों पर छापे, ₹2.75 करोड़ जब्त, ₹131 करोड़ की ठगी का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अमृत ग्रुप पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: 20 ठिकानों पर छापे, ₹2.75 करोड़ जब्त, ₹131 करोड़ की ठगी का आरोप

सारांश

ईडी ने अमृत ग्रुप पर शिकंजा कसते हुए तीन शहरों में 20 ठिकानों पर छापे मारे और ₹2.75 करोड़ से अधिक जब्त किए। आरोप है कि कंपनी के प्रमोटरों ने फिक्स्ड डिपॉजिट और आय योजनाओं के नाम पर ₹131.86 करोड़ जुटाए और राशि शेल कंपनियों व बेनामी संपत्तियों में खपाई।

मुख्य बातें

ईडी ने 16-17 सितंबर 2026 को कोलकाता , इंदौर और जयपुर में अमृत ग्रुप के 20 ठिकानों पर PMLA की धारा 17 के तहत छापेमारी की।
तलाशी में ₹2.75 करोड़ से अधिक की चल संपत्ति जब्त, जिसमें ₹1 करोड़ नकद और 4,800 डॉलर विदेशी मुद्रा शामिल।
आरोप है कि कैलाश चंद दुजारी सहित प्रमोटरों ने निवेशकों से ₹131.86 करोड़ जमा कराए और वित्त वर्ष 2019-20 तक ₹71.04 करोड़ वापस नहीं लौटाए।
जुटाई गई राशि को शेल कंपनियों में डायवर्ट कर अचल संपत्तियाँ खरीदी गईं; ₹20 करोड़ से अधिक के बेनामी निवेश के दस्तावेज बरामद।
मामले की जाँच SFIO की 1 अगस्त 2025 की आपराधिक शिकायत पर आधारित; आगे की जाँच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमृत ग्रुप की कंपनियों और उनके प्रमोटरों के खिलाफ बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए 16 और 17 सितंबर 2026 को कोलकाता, इंदौर और जयपुर में 20 आवासीय व व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की गई इस छापेमारी में ₹2.75 करोड़ से अधिक की चल संपत्ति जब्त और फ्रीज की गई है। मामला आम जनता से ₹131.86 करोड़ से अधिक की कथित ठगी से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की यह जाँच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा 1 अगस्त 2025 को दर्ज कराई गई आपराधिक शिकायत के आधार पर शुरू हुई। शिकायत मेसर्स अमृत प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (APL), मेसर्स अमृत बायो-एनर्जी एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ABEIL), मेसर्स अमृत प्रोजेक्ट्स (APNEL), मेसर्स अमृत बाजार परिसेवा लिमिटेड (ABPL) और उनके निदेशकों के खिलाफ कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 447 सहित अन्य धाराओं के तहत दर्ज की गई थी, जो PMLA के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आती है।

ठगी का तरीका

जाँच में सामने आया है कि कैलाश चंद दुजारी, काली किशोर बागची, अमृत दुजारी और अन्य आरोपितों ने अपनी कंपनियों के माध्यम से आम निवेशकों से फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट, मासिक/तिमाही आय योजनाओं और क्लब सदस्यता के नाम पर ₹131.86 करोड़ जुटाए। जमाकर्ताओं को निश्चित रिटर्न का आश्वासन दिया गया, जबकि कागजों पर इसे रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर, डीप डिस्काउंट बॉन्ड और हर्ब योजनाओं में निवेश के तौर पर दर्शाया गया।

अधिकारियों के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 तक लगभग ₹71.04 करोड़ जमाकर्ताओं को वापस नहीं किए गए थे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पोंजी और सामूहिक निवेश योजनाओं पर प्रवर्तन एजेंसियों की नज़र तेज हुई है।

फंड का दुरुपयोग और शेल कंपनियाँ

जाँच में यह भी उजागर हुआ कि कैलाश चंद दुजारी और अन्य निदेशकों ने जनता से जुटाई गई राशि को शेल कंपनियों में डायवर्ट किया। बाद में इस पैसे से प्रमोटरों और उनकी फर्जी कंपनियों के नाम पर अचल संपत्तियाँ खरीदी गईं और नकद निकाला गया। छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों के अनुसार जयपुर, इंदौर और दिल्ली में होटलों, स्कूलों, रिहायशी संपत्तियों और ज़मीनों में किए गए निवेश से जुड़े रिकॉर्ड बरामद हुए हैं, जिनमें ₹20 करोड़ से अधिक के बेनामी निवेश शामिल होने का संकेत है।

छापेमारी में क्या-क्या मिला

ईडी ने बताया कि जब्त की गई ₹2.75 करोड़ से अधिक की संपत्ति में ₹1 करोड़ नकद, 4,800 अमेरिकी डॉलर विदेशी मुद्रा, बैंक बैलेंस और अन्य निवेश शामिल हैं। इसके अलावा, कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और हवाला लेन-देन के रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, ये साक्ष्य अपराध से अर्जित धन के प्रवाह और उसे छिपाने के तरीकों को उजागर करेंगे।

आगे की जाँच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है। गौरतलब है कि SFIO की शिकायत के बाद से यह मामला प्रवर्तन एजेंसियों के लिए प्राथमिकता बना हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि शेल कंपनियों के नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों की परतों को उधेड़ने में अभी और समय लग सकता है, तथा संबंधित व्यक्तियों पर गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि ₹71 करोड़ से अधिक की रकम वित्त वर्ष 2019-20 तक ही बकाया थी — यानी निवेशकों को न्याय मिलने में वर्षों लग गए। शेल कंपनियों और बेनामी संपत्तियों की परतें यह संकेत देती हैं कि यह महज एक पारिवारिक घोटाला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय ढाँचा था। असली परीक्षा अब संपत्ति कुर्की और पीड़ित जमाकर्ताओं को मुआवजे की प्रक्रिया में होगी।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमृत ग्रुप पर ईडी की कार्रवाई क्यों हुई?
ईडी ने अमृत ग्रुप की कंपनियों पर आम जनता से ₹131.86 करोड़ की कथित ठगी के मामले में PMLA, 2002 की धारा 17 के तहत छापेमारी की। यह कार्रवाई SFIO द्वारा 1 अगस्त 2025 को दर्ज आपराधिक शिकायत के आधार पर शुरू की गई जाँच का हिस्सा है।
ईडी की छापेमारी में क्या-क्या जब्त किया गया?
छापेमारी में ₹2.75 करोड़ से अधिक की चल संपत्ति जब्त और फ्रीज की गई, जिसमें ₹1 करोड़ नकद, 4,800 अमेरिकी डॉलर विदेशी मुद्रा, बैंक बैलेंस और निवेश शामिल हैं। इसके अलावा आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और हवाला लेन-देन के रिकॉर्ड भी बरामद हुए।
अमृत ग्रुप ने ठगी किस तरीके से की?
आरोप है कि प्रमोटरों ने फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और आय योजनाओं के नाम पर निवेशकों को निश्चित रिटर्न का आश्वासन दिया, लेकिन कागजों पर इसे रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर और बॉन्ड दिखाया। जमा राशि को शेल कंपनियों में डायवर्ट कर अचल संपत्तियाँ खरीदी गईं और वित्त वर्ष 2019-20 तक ₹71.04 करोड़ वापस नहीं लौटाए गए।
इस मामले में कौन-से मुख्य आरोपी हैं?
जाँच में कैलाश चंद दुजारी, काली किशोर बागची और अमृत दुजारी सहित अन्य निदेशकों के नाम सामने आए हैं। इन पर कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 447 और PMLA के तहत अनुसूचित अपराधों के आरोप हैं।
अमृत ग्रुप मामले में आगे क्या होगा?
ईडी के अनुसार मामले में आगे की जाँच जारी है। बरामद दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपराध से अर्जित धन के प्रवाह को उजागर करने में मदद करेंगे, जिसके आधार पर संपत्ति कुर्की और संभावित गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले