ईडी का अहमदाबाद में बड़ा एक्शन: इलेक्ट्रोथर्म इंडिया मामले में ₹43.65 करोड़ की संपत्ति जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अहमदाबाद जोनल ऑफिस ने 1 अक्टूबर 2026 को इलेक्ट्रोथर्म इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹43.65 करोड़ की चल संपत्ति को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामले में की गई है, जिसमें कथित तौर पर 2007 से 2013 के बीच ऋण राशि का दुरुपयोग किया गया।
जब्त संपत्तियों का विवरण
ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्तियों में दो प्रमुख घटक हैं। पहला, यस बैंक में ईआईएल के दो बैंक खातों में जमा ₹25.08 करोड़ की राशि। दूसरा, कंपनी के प्रमोटरों के पास मौजूद ईआईएल के 13,57,775 शेयर, जिनका बाज़ार मूल्य ₹18.57 करोड़ आँका गया है। इन दोनों को मिलाकर कुल ₹43.65 करोड़ की संपत्ति इस चरण में अटैच की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई), मुंबई की उस एफआईआर पर आधारित है, जो बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज की गई थी। आरोप है कि ईआईएल और उसके निदेशकों ने 2007 से 2013 के बीच बैंक से प्राप्त ऋण सुविधाओं की राशि को स्वीकृत उद्देश्य के विपरीत उपयोग किया और उसे हड़प लिया। जाँच के अनुसार, कंपनी पर बैंक का कुल बकाया ₹631.97 करोड़ था, जिसे बाद में ₹550 करोड़ में एडेलवाइस एआरसी को हस्तांतरित किया गया। इस सौदे से बैंक को कथित तौर पर ₹81.97 करोड़ का नुकसान हुआ।
धन शोधन का तरीका
जाँच में सामने आया है कि बैंक से विस्तार के नाम पर लिया गया ऋण प्राप्त होते ही मौजूदा देनदारियों को चुकाने में लगा दिया गया — जो स्वीकृत उद्देश्य के विरुद्ध था। इसके अतिरिक्त, ईआईएल ने कई संस्थाओं को फंड ट्रांसफर किए, जो मिलने के तुरंत बाद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 'राउंड-सम' नकद निकासी के रूप में बाहर हो गए। 2007 से 2013 के बीच कंपनी के बैंक खातों से करोड़ों रुपये नकद निकाले जाने की बात जाँच में उजागर हुई है।
पूर्व कार्रवाई और कुल जब्ती
गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी 2025 में ईडी ने पीएमएलए के तहत कंपनी और उसके निदेशकों/प्रमोटरों के ठिकानों पर तलाशी ली थी, जिसमें ₹38.32 करोड़ की संपत्ति जब्त/फ्रीज की गई थी। पीएमएलए के तहत सक्षम निर्णायक प्राधिकरण ने भी उस कार्रवाई की पुष्टि की है। ताज़ा अटैचमेंट को जोड़ने के बाद इस मामले में कुल जब्ती/फ्रीजिंग की राशि ₹81.97 करोड़ हो गई है — जो बैंक के अनुमानित नुकसान के बराबर है।
आगे की कार्रवाई
ईडी के अनुसार इस मामले में जाँच अभी जारी है और आगे और कार्रवाई संभव है। यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें ईडी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े पुराने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों को एक-एक कर निपटा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयाँ बैंकिंग धोखाधड़ी के खिलाफ एक निवारक संदेश देती हैं।