झारखंड SIR-2026: सीईओ के. रवि कुमार ने राजनीतिक दलों संग बैठक कर साझा किया बूथवार डेटा
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार ने 29 सितंबर 2026 को रांची में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर SIR-2026 (विशेष सारांश पुनरीक्षण) प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में बूथवार अनमैप्ड मतदाताओं और मतदाता सूची में सामने आई गड़बड़ियों से जुड़ा डेटा सभी दलों के साथ साझा किया गया, ताकि पात्र भारतीय नागरिकों के नाम अंतिम मतदाता सूची में सुनिश्चित रूप से दर्ज हो सकें।
बूथ-स्तरीय सत्यापन की व्यवस्था
सीईओ के. रवि कुमार ने बताया कि राजनीतिक दलों को बूथवार सूची इसलिए उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे अपने बूथ लेवल एजेंट (BLA) के माध्यम से प्रत्येक मतदाता का स्वतंत्र सत्यापन कर सकें। यही सूची बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता को नोटिस जारी होने के बाद भी वह सुनवाई में उपस्थित नहीं होता, तो उसके पीछे का कारण जानने का प्रयास किया जाएगा।
राजनीतिक दल अपने BLA-2 के माध्यम से भी प्रत्येक बूथ पर मतदाताओं की स्थिति की जाँच कर सकते हैं। सीईओ ने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
सुनवाई की समय-सीमा और चरण
सीईओ के अनुसार नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अभी जारी है। पहले चरण की सुनवाई 5 अक्टूबर तक चलेगी, जबकि कुछ बूथों पर यह 12 अक्टूबर और कुछ पर 15 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगी। जिन मतदाताओं के लिए नोटिस पहले ही जनरेट हो चुके हैं, वे अपने जवाब और आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। घर-घर जाकर भी सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
फॉर्म 6, 7 और 8 की प्रक्रिया
दावा-आपत्ति के तहत नाम जोड़ने या संशोधन के लिए फॉर्म 6, फॉर्म 7 और फॉर्म 8 जमा करने की प्रक्रिया सक्रिय है। सीईओ ने पात्र मतदाताओं से अपील की कि जिन्होंने अभी तक फॉर्म 6 जमा नहीं किया है, वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर अवश्य जमा करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आपत्ति दर्ज करने की मौजूदा अवधि में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
गौरतलब है कि 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा नागरिक भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं। सीईओ ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने साथ-साथ परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों की मतदाता सूची में स्थिति भी जाँचें।
फॉर्म 6 पर विपक्ष के सवाल और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ
विपक्ष की ओर से फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रजिस्ट्रेशन रूल्स 1960 के तहत उपयोग होने वाला यह फॉर्म पहले भी प्रयोग में था और अब भी वही फॉर्म लागू है। SIR प्रक्रिया के तहत सेल्फ-डिक्लेरेशन के लिए एक अतिरिक्त घोषणा पत्र का प्रावधान किया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस व्यवस्था की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है।
सीईओ ने बताया कि चुनाव आयोग की ओर से जारी सभी आदेश संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत जारी किए जाते हैं। उन्होंने नोटिस और सत्यापन से जुड़े दस्तावेज जमा करने की समय-सीमा बढ़ाने तथा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख में बदलाव को लेकर आयोग को अनुरोध भेजा है — जिस पर आयोग के निर्णय के बाद झारखंड के मतदाताओं को सूचित किया जाएगा।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब झारखंड में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है। SIR-2026 की अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगी। सीईओ ने मतदाताओं से आग्रह किया कि वे फॉर्म 6 या SIR प्रक्रिया को लेकर किसी भ्रम में न रहें और निर्धारित समय में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें।