14 अक्टूबर 2026
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झारखंड SIR: CEO के. रवि कुमार का निर्देश — अधूरे दस्तावेज़ वाले मतदाताओं तक पहुँचे अधिकारी

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झारखंड SIR: CEO के. रवि कुमार का निर्देश — अधूरे दस्तावेज़ वाले मतदाताओं तक पहुँचे अधिकारी

सारांश

झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने SIR के दौरान अधूरे दस्तावेज़ वाले मतदाताओं तक पहुँचने के लिए बूथवार सूची बनाने का निर्देश दिया। लक्ष्य साफ़ है — कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और पूरी प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड के साथ पारदर्शी बने।

मुख्य बातें

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के.
रवि कुमार ने 14 अक्टूबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए झारखंड के सभी ज़िला अधिकारियों के साथ SIR की समीक्षा की।
अधूरे दस्तावेज़ वाले मतदाताओं की बूथवार सूची बनाकर उनसे सीधे संपर्क करने और दस्तावेज़ जुटाने में सहायता देने के निर्देश दिए गए।
पहली बार मतदाता बनने के पात्र नागरिकों के लिए फॉर्म-6 और विवरण सुधार के लिए फॉर्म-8 के माध्यम से आवेदन अनिवार्य।
विवरण में समानता या तार्किक विसंगति वाले मामलों में सुनवाई के बाद कारण सहित लिखित आदेश पारित करना होगा।
सभी आवेदन और सुनवाई के आदेश ऑनलाइन डिजिटल स्वरूप में दर्ज किए जाएँगे, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को सभी ज़िला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई इस समीक्षा बैठक में राज्यभर में चल रहे SIR की प्रगति का जायज़ा लिया गया।

बूथवार सूची और विशेष अभियान

CEO के. रवि कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन मतदाताओं के दस्तावेज़ सुनवाई के दौरान अधूरे पाए गए हैं या जिनके नाम और व्यक्तिगत विवरण को लेकर प्रश्न उठे हैं, उनकी बूथवार सूची तैयार की जाए। ऐसे नागरिकों से सीधे संपर्क कर उन्हें आवश्यक दस्तावेज़ जुटाने में सहायता प्रदान की जाएगी।

जिन मामलों में दूसरा नोटिस जारी होने के बाद भी ज़रूरी काग़ज़ात जमा नहीं हुए हैं, वहाँ भी विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिले।

फॉर्म-6 और फॉर्म-8 की अनिवार्यता

CEO ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम, व्यक्तिगत विवरण या पता बदलवाने के लिए फॉर्म-8 के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य है। वहीं, पहली बार मतदाता बनने के योग्य नागरिकों का नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के ज़रिए आवेदन लिया जाएगा। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाने का निर्देश जारी किया गया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं के भरे हुए फॉर्म में कोई त्रुटि नहीं मिली है और सुनवाई में जिनका विवरण सही पाया गया है, उनका नाम एवं विवरण अंतिम मतदाता सूची में पूर्ववत बरकरार रखा जाएगा।

विसंगतियों की जाँच और उचित कार्रवाई

समीक्षा बैठक में अधिकारियों को उन मामलों की भी जाँच करने के निर्देश दिए गए, जिनमें मतदाताओं के विवरण में समानता अथवा अन्य तार्किक विसंगतियाँ पाई गई हैं। ऐसे सभी मामलों में सुनवाई के बाद कारण सहित लिखित आदेश पारित करना होगा।

यदि कोई प्रविष्टि जाँच में गलत साबित होती है, तो निर्वाचन नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम ही दर्ज हों।

डिजिटल रिकॉर्ड और पारदर्शिता

CEO के. रवि कुमार ने नाम जोड़ने, हटाने या सुधार से संबंधित सभी आवेदनों को ऑनलाइन दर्ज करने और लंबित मामलों का निर्धारित समय-सीमा में निपटारा करने का निर्देश दिया। सुनवाई के बाद पारित आदेशों को भी डिजिटल स्वरूप में अभिलेखबद्ध किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया का पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब झारखंड में निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर विभिन्न पक्षों की नज़रें केंद्रित हैं। आगामी दिनों में अधिकारियों द्वारा ज़मीनी स्तर पर चलाए जाने वाले विशेष अभियानों की प्रगति यह तय करेगी कि SIR प्रक्रिया कितनी समावेशी और पारदर्शी रह सकी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीन पर होगी — विशेषकर दूरदराज़ के उन क्षेत्रों में जहाँ दस्तावेज़ीकरण की कमी ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक रही है। बूथवार सूची और विशेष अभियान का संयोजन सकारात्मक है, किंतु यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि यह प्रक्रिया पात्र नागरिकों को सूची से हटाने के बजाय जोड़ने पर केंद्रित रहे। डिजिटल रिकॉर्डिंग का निर्देश पारदर्शिता की दिशा में सही क़दम है, लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता तब होगी जब ये रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सुलभ हों और स्वतंत्र जाँच के लिए खुले हों।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने की एक चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, जिसमें सभी प्रविष्टियों की जाँच की जाती है। झारखंड में यह प्रक्रिया वर्तमान में सभी ज़िलों में एक साथ चलाई जा रही है।
अधूरे दस्तावेज़ वाले मतदाताओं के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
ऐसे मतदाताओं की बूथवार सूची तैयार की जाएगी और अधिकारी उनसे सीधे संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज़ जुटाने में सहायता करेंगे। जहाँ दूसरे नोटिस के बाद भी दस्तावेज़ नहीं मिले, वहाँ विशेष अभियान चलाया जाएगा।
नए मतदाता अपना नाम सूची में कैसे जुड़वाएँ?
पहली बार मतदाता बनने के पात्र नागरिकों को फॉर्म-6 के ज़रिए आवेदन करना होगा। नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार के लिए फॉर्म-8 का उपयोग अनिवार्य है।
जिन मतदाताओं का विवरण सही पाया गया, क्या उनके नाम सुरक्षित रहेंगे?
हाँ, CEO के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं के फॉर्म में कोई त्रुटि नहीं मिली और सुनवाई में विवरण सही पाया गया, उनका नाम एवं विवरण अंतिम मतदाता सूची में पूर्ववत बरकरार रखा जाएगा।
SIR में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
सभी आवेदन ऑनलाइन दर्ज किए जाएँगे और सुनवाई के बाद पारित आदेश भी डिजिटल स्वरूप में अभिलेखबद्ध होंगे। CEO ने लंबित मामलों के निर्धारित समय-सीमा में निपटारे का भी निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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