स्वतंत्रता दिवस पर मौलाना अरशद मदनी का संदेश: आजादी संघर्ष और शहादतों की देन, किसी का तोहफा नहीं
सारांश
मुख्य बातें
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 2026, के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आजादी किसी की दया या उपहार नहीं थी, बल्कि यह अनगिनत कुर्बानियों और शहादतों का परिणाम है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में हिंदू-मुस्लिम एकता को भारत की असली ताकत बताया।
मदनी का मुख्य संदेश
मदनी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'भारत की आजादी हमें किसी से मिला कोई तोहफा या एहसान नहीं थी। यह हमारे बुजुर्गों और विद्वानों द्वारा ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में दी गई अनगिनत कुर्बानियों, झेली गई जेल की सजाओं, मुश्किलों और शहादतों से हासिल हुई थी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश 79 वर्षों की स्वतंत्रता का जश्न मना रहा है।
हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर
मदनी ने आगे लिखा कि मुस्लिम विद्वानों ने लगातार देश के बंटवारे का विरोध किया और हिंदू-मुस्लिम एकता को ही भारत की असली ताकत और बुनियाद माना। उन्होंने कहा, 'एक एकजुट राष्ट्र के प्रति उनकी कुर्बानियां, हिम्मत और अटूट निष्ठा हमारे साझे इतिहास और विरासत का एक स्थायी हिस्सा बनी हुई है।' गौरतलब है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी अपनी आधिकारिक एक्स पोस्ट में स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए संगठन की 'आस्था, सेवा और राष्ट्र निर्माण की सदी' का उल्लेख किया।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने एक्स पर लिखा, 'सदियों से आबाद रहा है, सदियों तलक आबाद रहेगा। भारत जिंदाबाद रहा है, भारत जिंदाबाद रहेगा।' उन्होंने सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी।
अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (AIUDF) के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने अपनी पोस्ट में एकता, शांति, भाईचारे और सद्भाव का आह्वान किया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने के साथ-साथ असम में हाल ही में आई बाढ़ में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की और लोगों से जाति, धर्म व नस्ल से ऊपर उठकर पीड़ितों की मदद करने का आग्रह किया।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे कर 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम धर्मगुरुओं और विद्वानों की भूमिका पर मदनी का यह बयान राष्ट्रीय एकता और साझी विरासत की याद दिलाता है।
आगे की दिशा
विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के इन संदेशों से स्पष्ट है कि 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का आह्वान केंद्र में रहा। बदरुद्दीन अजमल का असम बाढ़ पीड़ितों की ओर ध्यान आकर्षित करना यह भी दर्शाता है कि राष्ट्रीय पर्व पर भी मानवीय संकट से मुँह नहीं फेरा जाना चाहिए।