गयाजी पितृपक्ष मेला: एक दिन में ३.८० लाख श्रद्धालु पहुंचे, अब तक १२.६५ लाख का आगमन
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की आमद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। 29 सितंबर को एक ही दिन में 3,80,600 पिंडदानी और तीर्थयात्री मोक्ष की इस नगरी में पहुंचे। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, पितृपक्ष की शुरुआत से अब तक कुल 12,65,800 श्रद्धालु गयाजी पहुंच चुके हैं।
मुख्य धार्मिक स्थलों पर उमड़ी भीड़
मंगलवार को विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी, अक्षयवट, प्रेतशिला, रामशिला, सीताकुंड और देवघाट सहित विभिन्न पिंडवेदियों पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखी गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, फल्गु नदी के तट और इन पिंडवेदियों पर पिंडदान एवं तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, और यही आस्था देशभर के कोने-कोने से लोगों को गयाजी खींच लाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब पितृपक्ष मेले में हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। गौरतलब है कि इस मेले में न केवल बिहार, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से परिवार अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर यहाँ आते हैं।
प्रशासन की व्यवस्थाएँ और चिकित्सा सुविधा
मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने चिकित्सा, आवासन, परिवहन और सहायता केंद्रों की व्यापक व्यवस्था की है। 29 सितंबर को अकेले 12,098 तीर्थयात्रियों ने मेडिकल उपचार की सुविधा का लाभ उठाया। मेले की शुरुआत से अब तक कुल 40,908 लोगों को चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जा चुकी हैं।
बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। मंगलवार को 76 लोगों ने व्हीलचेयर सेवा का उपयोग किया, जबकि अब तक 284 श्रद्धालुओं को यह सुविधा मिल चुकी है। गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी में मंगलवार को 1,017 लोगों ने आवासन का लाभ लिया और अब तक कुल 3,032 श्रद्धालु यहाँ ठहर चुके हैं।
खोया-पाया सेल और सुरक्षा प्रबंध
भीड़ में बिछड़ने की घटनाओं से निपटने के लिए प्रशासन ने खोया-पाया सेल की स्थापना की है। मंगलवार को 95 बिछड़े लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया, और मेले की शुरुआत से अब तक 225 लोगों का परिजनों से पुनर्मिलन कराया जा चुका है। बच्चों और बुजुर्गों को भीड़ में खोने से बचाने के लिए रिस्ट बैंड की सुविधा भी दी जा रही है — मंगलवार को 1,200 लोगों को रिस्ट बैंड लगाए गए, जबकि अब तक कुल 1,721 लोगों को यह सुविधा प्रदान की गई है।
मेला क्षेत्र में स्थापित कंट्रोल रूम में मंगलवार को 249 शिकायतें प्राप्त हुईं। मेले की शुरुआत से अब तक कुल 791 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनके निपटारे का काम जारी है।
तकनीक और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल
इस वर्ष के पितृपक्ष मेले की एक विशेष पहचान है — एआई आधारित भाषा अनुवाद सुविधा। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की भाषा संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए यह तकनीकी व्यवस्था की गई है। मंगलवार को 10,495 यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया और अब तक 22,975 यात्रियों को इसके ज़रिए सहायता मिल चुकी है।
पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ पितृवाटिका में 'एक पेड़ पूर्वजों के नाम' अभियान के तहत मंगलवार को 49 पौधे लगाए गए। अब तक इस अभियान में कुल 156 पौधे लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए गंगाजल वितरण की व्यवस्था भी जारी है — मंगलवार को 4,133 पॉकेट गंगाजल वितरित किए गए, जबकि अब तक कुल 12,581 पॉकेट का वितरण हो चुका है।
आगे क्या
पितृपक्ष मेले के शेष दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि सभी व्यवस्थाएँ निरंतर जारी रहेंगी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय है।