3 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: अब तक 28 लाख 43 हजार श्रद्धालु पहुंचे, फल्गु तट पर पिंडदान की उमड़ी भीड़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: अब तक 28 लाख 43 हजार श्रद्धालु पहुंचे, फल्गु तट पर पिंडदान की उमड़ी भीड़

सारांश

पितृपक्ष 2026 में गयाजी एक बार फिर देश के सबसे बड़े आस्था-संगमों में से एक बन गया है। 28 लाख से अधिक श्रद्धालु फल्गु तट पर पिंडदान कर चुके हैं। AI अनुवाद से लेकर पितृवाटिका तक — प्रशासन की तैयारी इस बार परंपरा और तकनीक का अनूठा मेल है।

मुख्य बातें

गयाजी पितृपक्ष मेला 2026 में 3 अक्टूबर तक कुल 28 लाख 43 हजार 200 श्रद्धालु पहुँच चुके हैं।
शनिवार को अकेले 3 लाख 33 हजार तीर्थयात्री विष्णुपद मंदिर , प्रेतशिला व अन्य स्थलों पर पहुँचे।
मेले की शुरुआत से 90,693 लोग चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर चुके हैं; 585 दिव्यांग-वरिष्ठ को व्हीलचेयर मिली।
AI आधारित भाषा अनुवाद सुविधा से अब तक 74,651 तीर्थयात्री लाभान्वित हुए।
खोया-पाया केंद्र ने अब तक 623 बिछड़े व्यक्तियों को परिजनों से मिलाया।
पितृवाटिका में अब तक 391 पौधे रोपे गए — पर्यावरण संरक्षण और पितृ-स्मृति का संगम।

बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं। 3 अक्टूबर 2026 तक जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार मेले में पहुँचने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 28 लाख 43 हजार 200 हो चुकी है। फल्गु नदी के तट पर, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंडदान वेदियों पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का अनुष्ठान निरंतर जारी है।

मुख्य घटनाक्रम

शनिवार को प्रेतशिला, रामशिला, सीताकुंड, देवघाट और विष्णुपद मंदिर सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर एक ही दिन में 3 लाख 33 हजार श्रद्धालु, पिंडदानी और तीर्थयात्री पहुँचे। यह आँकड़ा दर्शाता है कि पितृपक्ष के उत्तरार्ध में भी आस्था की यह धारा अविराम बह रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गयाजी में पिंडदान और तर्पण से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मुक्ति प्राप्त होती है — यही विश्वास सदियों से इस महातीर्थ को सनातन श्रद्धा का केंद्र बनाए हुए है।

प्रशासनिक प्रबंध और सुविधाएँ

लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। शनिवार को 11,067 तीर्थयात्रियों ने मेडिकल सेवाओं का लाभ उठाया, जबकि मेले की शुरुआत से अब तक 90,693 लोग चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर चुके हैं। दिव्यांग और वरिष्ठ श्रद्धालुओं के लिए शनिवार को 67 व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गईं और अब तक 585 लोगों ने इसका लाभ लिया है।

गांधी मैदान में बनाई गई टेंट सिटी में शनिवार को 1,863 श्रद्धालुओं ने विश्राम किया। मेले की शुरुआत से यहाँ कुल 8,552 श्रद्धालु ठहर चुके हैं। तीर्थयात्रियों को गंगाजल के 4,150 पैकेट शनिवार को वितरित किए गए, जबकि अब तक 34,091 पैकेट बाँटे जा चुके हैं।

खोया-पाया और शिकायत निवारण

भीड़ के बीच बिछड़ने की आशंका को देखते हुए खोया-पाया केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहा है। शनिवार को 87 बिछड़े व्यक्तियों को उनके परिजनों से मिलाया गया, और अब तक कुल 623 लोगों को उनके परिवार से पुनर्मिलन कराया जा चुका है। बच्चों और बुजुर्गों की पहचान के लिए शनिवार को 1,541 लोगों को रिस्ट बैंड लगाए गए; कुल 8,050 लोग अब तक इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। कंट्रोल रूम में शनिवार को 142 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि मेले की शुरुआत से अब तक 1,532 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं।

तकनीक और पर्यावरण का संगम

इस वर्ष मेला क्षेत्र में AI आधारित भाषा अनुवाद सुविधा की शुरुआत एक उल्लेखनीय कदम रही है। शनिवार को 9,395 यात्रियों ने इस सुविधा से मदद प्राप्त की, और अब तक 74,651 यात्री इससे लाभान्वित हो चुके हैं — यह विदेशी और अन्य भाषाई तीर्थयात्रियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पितृवाटिका में शनिवार को 45 पौधे लगाए गए, जबकि मेले के दौरान अब तक 391 पौधे रोपे जा चुके हैं — यह पूर्वजों की स्मृति को हरियाली से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।

आगे क्या

पितृपक्ष मेला एक पखवारे तक चलता है और श्रद्धालुओं की आमद के अंतिम दिनों तक जारी रहने की संभावना है। प्रशासन के आँकड़ों के अनुसार मेडिकल, आवासन और परिवहन की सुविधाएँ निरंतर बनाए रखी जाएंगी। गयाजी प्रतिवर्ष पितृपक्ष में देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक के रूप में उभरता है, और इस वर्ष की भागीदारी उस परंपरा को और पुष्ट करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये सुविधाएँ अंतिम दिनों की सघनतम भीड़ में भी उतनी ही प्रभावी रहती हैं। पितृवाटिका में पौधारोपण की पहल परंपरा और पर्यावरण को जोड़ने का एक ऐसा प्रयोग है जिसे अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए मॉडल बनाया जा सकता है। मेला प्रबंधन की सफलता की असली कसौटी वह होगी जब मेला समाप्त होने के बाद शिकायतों और चिकित्सा आँकड़ों का विस्तृत विश्लेषण सार्वजनिक किया जाए।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गयाजी पितृपक्ष मेला 2026 में अब तक कितने श्रद्धालु पहुँचे हैं?
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 तक गयाजी पितृपक्ष मेले में कुल 28 लाख 43 हजार 200 श्रद्धालु पहुँच चुके हैं। अकेले शनिवार को 3 लाख 33 हजार तीर्थयात्री विभिन्न प्रमुख स्थलों पर उपस्थित रहे।
गयाजी में पिंडदान का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गयाजी में फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है। यह परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है और इसीलिए पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं।
गयाजी मेले में प्रशासन ने क्या इंतजाम किए हैं?
जिला प्रशासन ने सुरक्षा, चिकित्सा, आवासन, परिवहन और भाषा सहायता के व्यापक प्रबंध किए हैं। इनमें AI आधारित भाषा अनुवाद सुविधा, गांधी मैदान में टेंट सिटी, व्हीलचेयर सेवा, खोया-पाया केंद्र और रिस्ट बैंड वितरण शामिल हैं।
पितृपक्ष मेले में AI अनुवाद सुविधा क्या है और किसे मिलती है?
मेला क्षेत्र में भाषा संबंधी सहायता के लिए AI आधारित भाषा अनुवाद सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जो विभिन्न भाषाओं के तीर्थयात्रियों की मदद करती है। 3 अक्टूबर तक 74,651 यात्री इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं।
पितृवाटिका में पौधारोपण की पहल क्या है?
गयाजी मेले में पर्यावरण संरक्षण और पूर्वजों की स्मृति को जोड़ते हुए पितृवाटिका में पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। 3 अक्टूबर तक शनिवार को 45 पौधे लगाए गए और अब तक कुल 391 पौधे रोपे जा चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 6 दिन पहले
  4. 6 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले