गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: अब तक 28 लाख 43 हजार श्रद्धालु पहुंचे, फल्गु तट पर पिंडदान की उमड़ी भीड़
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं। 3 अक्टूबर 2026 तक जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार मेले में पहुँचने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 28 लाख 43 हजार 200 हो चुकी है। फल्गु नदी के तट पर, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंडदान वेदियों पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का अनुष्ठान निरंतर जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार को प्रेतशिला, रामशिला, सीताकुंड, देवघाट और विष्णुपद मंदिर सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर एक ही दिन में 3 लाख 33 हजार श्रद्धालु, पिंडदानी और तीर्थयात्री पहुँचे। यह आँकड़ा दर्शाता है कि पितृपक्ष के उत्तरार्ध में भी आस्था की यह धारा अविराम बह रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गयाजी में पिंडदान और तर्पण से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मुक्ति प्राप्त होती है — यही विश्वास सदियों से इस महातीर्थ को सनातन श्रद्धा का केंद्र बनाए हुए है।
प्रशासनिक प्रबंध और सुविधाएँ
लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। शनिवार को 11,067 तीर्थयात्रियों ने मेडिकल सेवाओं का लाभ उठाया, जबकि मेले की शुरुआत से अब तक 90,693 लोग चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर चुके हैं। दिव्यांग और वरिष्ठ श्रद्धालुओं के लिए शनिवार को 67 व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गईं और अब तक 585 लोगों ने इसका लाभ लिया है।
गांधी मैदान में बनाई गई टेंट सिटी में शनिवार को 1,863 श्रद्धालुओं ने विश्राम किया। मेले की शुरुआत से यहाँ कुल 8,552 श्रद्धालु ठहर चुके हैं। तीर्थयात्रियों को गंगाजल के 4,150 पैकेट शनिवार को वितरित किए गए, जबकि अब तक 34,091 पैकेट बाँटे जा चुके हैं।
खोया-पाया और शिकायत निवारण
भीड़ के बीच बिछड़ने की आशंका को देखते हुए खोया-पाया केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहा है। शनिवार को 87 बिछड़े व्यक्तियों को उनके परिजनों से मिलाया गया, और अब तक कुल 623 लोगों को उनके परिवार से पुनर्मिलन कराया जा चुका है। बच्चों और बुजुर्गों की पहचान के लिए शनिवार को 1,541 लोगों को रिस्ट बैंड लगाए गए; कुल 8,050 लोग अब तक इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। कंट्रोल रूम में शनिवार को 142 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि मेले की शुरुआत से अब तक 1,532 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं।
तकनीक और पर्यावरण का संगम
इस वर्ष मेला क्षेत्र में AI आधारित भाषा अनुवाद सुविधा की शुरुआत एक उल्लेखनीय कदम रही है। शनिवार को 9,395 यात्रियों ने इस सुविधा से मदद प्राप्त की, और अब तक 74,651 यात्री इससे लाभान्वित हो चुके हैं — यह विदेशी और अन्य भाषाई तीर्थयात्रियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पितृवाटिका में शनिवार को 45 पौधे लगाए गए, जबकि मेले के दौरान अब तक 391 पौधे रोपे जा चुके हैं — यह पूर्वजों की स्मृति को हरियाली से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।
आगे क्या
पितृपक्ष मेला एक पखवारे तक चलता है और श्रद्धालुओं की आमद के अंतिम दिनों तक जारी रहने की संभावना है। प्रशासन के आँकड़ों के अनुसार मेडिकल, आवासन और परिवहन की सुविधाएँ निरंतर बनाए रखी जाएंगी। गयाजी प्रतिवर्ष पितृपक्ष में देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक के रूप में उभरता है, और इस वर्ष की भागीदारी उस परंपरा को और पुष्ट करती है।