26 सितंबर 2026
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पितृपक्ष मेला 2026: गयाजी के देवघाट पर उमड़े श्रद्धालु, बारिश में भी प्रशासन ने संभाला मोर्चा

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पितृपक्ष मेला 2026: गयाजी के देवघाट पर उमड़े श्रद्धालु, बारिश में भी प्रशासन ने संभाला मोर्चा

सारांश

पितृपक्ष मेला 2026 का पहला दिन गयाजी में श्रद्धा और प्रशासनिक सतर्कता का संगम रहा। बारिश के बीच फल्गु के घाटों पर उमड़े तीर्थयात्रियों के लिए 150 निशुल्क ई-रिक्शा, नो-व्हीकल ज़ोन और सख्त निगरानी — जिला पदाधिकारी खुद ई-रिक्शा से पहुँचे संदेश देने।

मुख्य बातें

पितृपक्ष मेला 2026 का पहला दिन 26 सितंबर को गयाजी, बिहार में मनाया गया; देश-विदेश से श्रद्धालु देवघाट और फल्गु नदी के घाटों पर पिंडदान के लिए पहुँचे।
जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर , वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार और नगर आयुक्त डॉ.
गगन कुमार ने संयुक्त रूप से मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया।
विष्णुपद मंदिर परिधि को नो हॉर्न, नो व्हीकल, नो पॉल्यूशन ज़ोन घोषित किया गया; तीन शिफ्ट में 150 निशुल्क ई-रिक्शा चलाई जा रही हैं।
निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने वाले एक फोटोग्राफर का पहचान पत्र तत्काल निरस्त किया गया।
गया रेलवे स्टेशन से पिंडदान स्थलों तक और प्रेतशिला पार्किंग से मंदिर तक बुज़ुर्गों के लिए भी निशुल्क ई-रिक्शा उपलब्ध।

बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेला 2026 का 26 सितंबर, शनिवार को पहला दिन रहा, जब देश-विदेश से आए हज़ारों श्रद्धालुओं ने देवघाट समेत फल्गु नदी के विभिन्न घाटों पर पिंडदान और तर्पण कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की। सुबह से ही विष्णुपद मंदिर परिसर और फल्गु के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।

मेले का पहला दिन: घाटों पर उत्साह, आसमान से बारिश

लगातार हो रही बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। विष्णुपद मंदिर क्षेत्र, सोलह वेदी, देवघाट, गजाधर घाट, गायत्री घाट और गया जी डैम — सभी प्रमुख स्थलों पर तड़के से ही तीर्थयात्री पिंडदान के लिए पहुँचने लगे। पितृपक्ष हिंदू पंचांग का वह पखवाड़ा है जब पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है, और गयाजी को इन अनुष्ठानों के लिए देश का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।

प्रशासन की निगरानी और संयुक्त निरीक्षण

जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार और गया नगर निगम के नगर आयुक्त डॉ. गगन कुमार ने संयुक्त रूप से मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सभी प्रमुख घाटों और मंदिर परिसर का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया।

जिला पदाधिकारी ने घाटों पर चेंजिंग रूम, शौचालयों की नियमित सफाई और नदी में प्रवाहित पूजन सामग्री को जाल के माध्यम से लगातार निकालने के निर्देश दिए। बारिश के कारण फिसलन की आशंका को देखते हुए मंदिर परिसर में लगातार पानी हटाने और वाइपर से फर्श की सफाई कराने के भी आदेश दिए गए। गर्भगृह में प्रवेश और निकास के दौरान श्रद्धालुओं की सहायता के लिए कर्मियों को विशेष निर्देश दिए गए।

भीड़ प्रबंधन और नो-व्हीकल ज़ोन

श्रद्धालुओं की सुगमता और जाम से बचाव के लिए विष्णुपद मंदिर के परिधि क्षेत्र को नो हॉर्न, नो व्हीकल और नो पॉल्यूशन ज़ोन घोषित किया गया है। चांद चौरा मोड़ और बंगाली आश्रम के पास वाहनों को रोककर श्रद्धालुओं को पैदल अथवा निशुल्क ई-रिक्शा से विष्णुपद क्षेत्र तक पहुँचाने की व्यवस्था की गई है।

जिला परिवहन पदाधिकारी के अनुसार चांद चौरा से विष्णुपद और विष्णुपद से बंगाली आश्रम के बीच तीन शिफ्ट में 150 निशुल्क ई-रिक्शा संचालित किए जा रहे हैं। प्रेतशिला पार्किंग से प्रेतशिला मंदिर तक बुज़ुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए भी अलग से ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। गया रेलवे स्टेशन से पिंडदान स्थलों तक जाने के इच्छुक श्रद्धालुओं को भी माँग पर निशुल्क ई-रिक्शा उपलब्ध कराई जा रही है।

जिला पदाधिकारी ने खुद चलाई ई-रिक्शा, फोटोग्राफर पर भी कार्रवाई

जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने स्वयं चांद चौरा से विष्णुपद मेला क्षेत्र तक ई-रिक्शा से आवागमन कर जनता को व्यवस्था का पालन करने का संदेश दिया। उन्होंने अति विशिष्ट व्यक्तियों और वरीय पदाधिकारियों से भी अपील की कि वे तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए इस क्षेत्र में पैदल या ई-रिक्शा से ही आएँ।

इस बीच, निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने वाले एक फोटोग्राफर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उसका पहचान पत्र निरस्त कर दिया गया। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायत सही पाए जाने पर पहचान पत्र रद्द करने के साथ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आगे क्या

पितृपक्ष मेला अगले कई दिनों तक चलेगा और प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के गयाजी पहुँचने की उम्मीद है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि व्यवस्थाओं की निगरानी पूरे मेले के दौरान इसी सघनता से जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

निशुल्क ई-रिक्शा और जिला पदाधिकारी का स्वयं ई-रिक्शा से आना एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन असली परीक्षा उन दिनों होगी जब भीड़ चरम पर होगी और बारिश की तीव्रता बढ़ेगी — तब यही व्यवस्थाएँ कितनी टिकाऊ साबित होती हैं, यह देखने वाली बात होगी। फोटोग्राफर पर त्वरित कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि तीर्थस्थलों पर व्यावसायिक शोषण एक पुरानी और अनसुलझी समस्या है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृपक्ष मेला 2026 गयाजी में कब शुरू हुआ?
पितृपक्ष मेला 2026 गयाजी में 26 सितंबर, शनिवार को शुरू हुआ। पहले दिन देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने देवघाट और फल्गु नदी के विभिन्न घाटों पर पिंडदान और तर्पण किया।
गयाजी में पितृपक्ष के दौरान प्रशासन ने क्या व्यवस्थाएँ की हैं?
प्रशासन ने विष्णुपद मंदिर परिधि को नो हॉर्न, नो व्हीकल और नो पॉल्यूशन ज़ोन घोषित किया है। तीन शिफ्ट में 150 निशुल्क ई-रिक्शा, शौचालयों की नियमित सफाई, जिग-जैग कतार व्यवस्था और घाटों से पूजन सामग्री हटाने का इंतज़ाम किया गया है।
गयाजी में पिंडदान के लिए पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को निशुल्क ई-रिक्शा कहाँ से मिलेगी?
निशुल्क ई-रिक्शा चांद चौरा मोड़ से विष्णुपद और विष्णुपद से बंगाली आश्रम के बीच चलाई जा रही है। इसके अलावा गया रेलवे स्टेशन से पिंडदान स्थलों तक और प्रेतशिला पार्किंग से प्रेतशिला मंदिर तक बुज़ुर्ग तीर्थयात्रियों के लिए भी ई-रिक्शा उपलब्ध है।
गयाजी के विष्णुपद मंदिर में फोटोग्राफर पर कार्रवाई क्यों हुई?
एक अधिकृत फोटोग्राफर द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने पर उसका पहचान पत्र तत्काल निरस्त कर दिया गया। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी भी शिकायत पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पितृपक्ष में गयाजी का महत्व क्या है?
गयाजी को हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पिंडदान और तर्पण के लिए सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसीलिए हर वर्ष लाखों तीर्थयात्री फल्गु नदी के घाटों पर आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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