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भारत में जिहाद की जरूरत नहीं, यह ईमान और शांति का देश है: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

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भारत में जिहाद की जरूरत नहीं, यह ईमान और शांति का देश है: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

सारांश

बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अरशद मदनी के जिहाद वाले बयान को चुनौती देते हुए कहा — भारत शांति और ईमान का देश है, यहाँ जिहाद न जरूरी है, न जायज। आला हजरत की किताब का हवाला देकर उन्होंने मदनी से स्पष्टीकरण की माँग की।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 24 जून को बरेली में कहा कि भारत में जिहाद न जरूरी है, न जायज ।
अरशद मदनी के 'हर मुसलमान को जिहाद करना चाहिए' वाले बयान पर यह प्रतिक्रिया आई।
रजवी ने आला हजरत की किताब का हवाला दिया, जिसमें भारत को शांति और ईमान का देश बताया गया है।
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा — आज के दौर में जिहाद की शर्तें लागू नहीं होतीं, अनुमति का कोई अधिकार नहीं।
BJP नेता भोला सिंह और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मदनी के बयान की निंदा की।

बरेली, 24 जून को मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख अरशद मदनी के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मदनी ने कहा था कि हर मुसलमान को जिहाद करना चाहिए। रजवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत जैसे देश में जिहाद न तो जरूरी है और न ही जायज, क्योंकि यह शांति, आजादी और ईमान का देश है।

मौलाना रजवी का स्पष्ट संदेश

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बुधवार को बातचीत में कहा कि अरशद मदनी ने जिहाद पर बयान तो दिया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किन परिस्थितियों में जिहाद करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'उन्हें यह भी साफ करना चाहिए था कि क्या भारत में जिहाद की जरूरत है।'

रजवी ने आला हजरत की किताब का हवाला देते हुए कहा कि उसमें स्पष्ट लिखा है कि भारत में जिहाद की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह शांति और ईमान का देश है। उनके अनुसार, यहाँ हर मजहब के लोगों को अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार जीने की पूरी आजादी है और कोई भी इसमें रुकावट नहीं डालता।

उन्होंने आगे कहा, 'ऐसी स्थिति में यहाँ न जिहाद जरूरी है और न ही हिजरत जायज है। मदनी साहब एक बुजुर्ग व्यक्ति हैं, उन्हें तमाम बातें स्पष्ट करनी चाहिए।'

मौलाना सैफ अब्बास की राय

मौलाना सैफ अब्बास ने भी अरशद मदनी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिहाद शब्द के इस्तेमाल के लिए कुछ विशेष शर्तें होती हैं, जो आज के समय में लागू नहीं होतीं। उनके अनुसार, जिहाद के लिए यह शर्त है कि किसी मासूम नबी या इमाम की अनुमति जरूरी होती है।

उन्होंने कहा, 'इस जमाने में न कोई मासूम नबी हैं और अगर मासूम इमाम हैं, तो वो यहाँ मौजूद नहीं हैं। हमारे पास यह अधिकार नहीं है कि हम किसी को जिहाद की इजाजत दे सकें।' यह बयान उस धार्मिक विमर्श को रेखांकित करता है जिसमें जिहाद की परिभाषा और उसकी सीमाएँ आज भी बहस का विषय हैं।

भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता भोला सिंह ने अरशद मदनी के बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे युवाओं को गुमराह करने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान पूरी तरह अर्थविहीन है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए जो युवाओं को भ्रामक जानकारी देकर दिग्भ्रमित करने की कोशिश करते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी मदनी के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि जो लोग राष्ट्र से ऊपर अपने धर्म को रखते हैं, वही इस तरह के बयान देते हैं। उपाध्याय ने कहा, 'हम सभी धर्म से पहले राष्ट्र के बारे में सोचते हैं और राष्ट्र हमारे लिए सर्वोपरि है।'

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ जब जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख अरशद मदनी ने अपने एक बयान में कहा था कि हर मुसलमान को जिहाद करना चाहिए। इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की। गौरतलब है कि जिहाद की अवधारणा को लेकर भारत में समय-समय पर बहस होती रही है, और विभिन्न इस्लामी विद्वानों ने इस शब्द की अलग-अलग व्याख्याएँ प्रस्तुत की हैं।

आगे क्या

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि धार्मिक नेता अपने बयानों में किस हद तक स्पष्टता बरतें, विशेषकर जब उनके शब्दों की व्याख्या सार्वजनिक विमर्श और युवाओं पर असर डाल सकती हो। मौलाना रजवी और अन्य धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि मुस्लिम समुदाय के भीतर भी इस मसले पर एकमत नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि धर्मशास्त्रीय भी है। मौलाना रजवी का आला हजरत की किताब का हवाला देना उल्लेखनीय है, क्योंकि यह बरेलवी परंपरा के भीतर से ही एक वैचारिक काउंटर है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि इस विमर्श में सबसे मुखर आवाजें मुस्लिम समुदाय के भीतर से ही आ रही हैं, जो इसे केवल हिंदू-मुस्लिम टकराव के रूप में पेश करने की सरलीकृत कथा को चुनौती देती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भारत में जिहाद पर क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 24 जून को बरेली में कहा कि भारत में जिहाद न जरूरी है और न ही जायज, क्योंकि यह शांति और ईमान का देश है जहाँ हर मजहब के लोगों को अपनी परंपरा के अनुसार जीने की पूरी आजादी है। उन्होंने आला हजरत की किताब का हवाला देकर इस बात को प्रमाणित किया।
अरशद मदनी ने जिहाद पर क्या बयान दिया था?
जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख अरशद मदनी ने कहा था कि हर मुसलमान को जिहाद करना चाहिए। इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक विवाद उत्पन्न किया।
मौलाना सैफ अब्बास ने जिहाद की शर्तों के बारे में क्या कहा?
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि जिहाद के लिए किसी मासूम नबी या इमाम की अनुमति जरूरी होती है, जो आज के दौर में संभव नहीं है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में जिहाद की शर्तें लागू नहीं होतीं।
BJP और उत्तर प्रदेश सरकार ने अरशद मदनी के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP नेता भोला सिंह ने मदनी के बयान को युवाओं को गुमराह करने वाला और अर्थविहीन बताया तथा ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि जो लोग राष्ट्र से ऊपर धर्म को रखते हैं, वही ऐसे बयान देते हैं।
क्या भारत में जिहाद को लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं में मतभेद है?
हाँ, इस विवाद से स्पष्ट है कि मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच जिहाद की परिभाषा और उसकी परिस्थितियों को लेकर एकमत नहीं है। मौलाना रजवी और मौलाना सैफ अब्बास जैसे विद्वानों ने अरशद मदनी के बयान से असहमति जताते हुए भारत में जिहाद को अनावश्यक और नाजायज बताया।
राष्ट्र प्रेस
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