19 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भागवत के धर्म-बयान का किया स्वागत, कहा — इंसानियत ही धर्म का असल संदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भागवत के धर्म-बयान का किया स्वागत, कहा — इंसानियत ही धर्म का असल संदेश

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के धर्म-डीएनए बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सहमति जताई — लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि धर्म का उद्देश्य टकराव नहीं, इंसानियत और प्रेम है। युवाओं से भाईचारे को जीवन का आधार बनाने की अपील की।

मुख्य बातें

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 19 सितंबर 2026 को बरेली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के धर्म-संबंधी बयान का स्वागत किया।
मौलाना ने कहा कि धार्मिक आस्था सकारात्मक है, किंतु किसी भी धर्म के नाम पर कट्टरपंथ उचित नहीं।
उन्होंने धर्म का मूल संदेश इंसानियत, आपसी प्रेम और सम्मान बताया — न कि टकराव।
विविधतापूर्ण भारत में आपसी सम्मान और भाईचारे को सामाजिक सद्भाव की नींव बताया।
युवाओं से विशेष अपील — सहयोग और मानवता की भावना अपनाने से व्यक्तिगत और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर लाभ होगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 19 सितंबर 2026 को बरेली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने धर्म को मनुष्य के डीएनए से जुड़ा हुआ बताया था। मौलाना ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था एक सकारात्मक प्रवृत्ति है, परंतु इसके नाम पर कट्टरपंथ को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

भागवत के बयान पर मौलाना की प्रतिक्रिया

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मोहन भागवत ने धर्म को लेकर जो विचार साझा किए हैं, वे महत्त्वपूर्ण और विचारणीय हैं। उनके अनुसार, भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में धर्म और धार्मिक मूल्य किसी न किसी रूप में मौजूद हैं — यह स्वाभाविक और स्वस्थ है। उन्होंने कहा कि धर्म का पालन करना निस्संदेह अच्छी बात है, किंतु किसी भी धर्म की आड़ में कट्टरता न केवल अनुचित है, बल्कि धर्म की मूल भावना के विपरीत भी है।

धर्म का मूल संदेश: इंसानियत और प्रेम

मौलाना ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी धर्म का वास्तविक उद्देश्य लोगों के बीच दूरी या टकराव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि इंसानियत, आपसी प्रेम और सम्मान की भावना को सुदृढ़ करना है। उनके मुताबिक, यदि व्यक्ति के मन में मानवता का भाव है तो वह बेहतर इंसान बन सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पहचान अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इंसानियत वह साझी भावना है जो सभी को एकजुट करती है।

सामाजिक सद्भाव और विविधता पर जोर

मौलाना ने यह भी रेखांकित किया कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना सामाजिक सौहार्द की नींव है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने धर्म पर आस्था रखते हुए दूसरे धर्मों का भी सम्मान करे, तो समाज में टकराव की परिस्थितियाँ स्वतः कम होंगी। उनके अनुसार, धार्मिक आस्था और मानवता एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

युवाओं से विशेष अपील

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने विशेष रूप से देश के युवाओं से अपील की कि वे सहयोग, भाईचारे और मानवता की भावना को अपने जीवन का आधार बनाएँ। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी इन मूल्यों को अपनाती है, तो इसका लाभ केवल उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि संपूर्ण देश को मिलेगा। सकारात्मक सोच और परस्पर सहयोग की भावना से युवा अपने जीवन में सफलता हासिल करने के साथ-साथ राष्ट्र को भी गौरवान्वित कर सकते हैं।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक एकता पर राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श तेज़ हुआ है। मौलाना का यह संदेश — कि धर्म विभाजन का नहीं, जोड़ने का माध्यम बनना चाहिए — सामाजिक शांति की दिशा में एक सार्थक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये बयान ज़मीनी स्तर पर व्यवहार बदलते हैं। भारत में सांप्रदायिक तनाव के संदर्भ में शीर्ष धार्मिक नेताओं का एक-दूसरे के प्रति सार्वजनिक समर्थन अपने आप में असामान्य घटना है — और इसकी प्रतीकात्मक अहमियत कम नहीं आँकनी चाहिए। हालाँकि, मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे बयानों की सीमाओं को नज़रअंदाज़ करती है: जब तक ये विचार संस्थागत और नीतिगत स्तर पर नहीं उतरते, तब तक ये वक्तव्य महत्त्वपूर्ण होते हुए भी केवल 'नैतिक अपील' तक सीमित रह जाते हैं। युवाओं तक ये संदेश पहुँचाने के लिए बयानबाज़ी से आगे ठोस कार्यक्रमों की ज़रूरत है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मोहन भागवत के बयान पर क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का स्वागत किया जिसमें धर्म को मनुष्य के डीएनए से जुड़ा बताया गया था। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था सकारात्मक है, लेकिन किसी भी धर्म के नाम पर कट्टरपंथ उचित नहीं।
मौलाना के अनुसार धर्म का मूल संदेश क्या है?
मौलाना के अनुसार धर्म का मूल संदेश इंसानियत, आपसी प्रेम और एक-दूसरे के प्रति सम्मान है — न कि टकराव या दूरी। उन्होंने कहा कि धार्मिक पहचान अलग हो सकती है, परंतु मानवता वह साझी भावना है जो सभी को जोड़ती है।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात क्या है और इसके अध्यक्ष कौन हैं?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात भारत का एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठन है। इसके वर्तमान अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी हैं, जो बरेली से संबद्ध हैं और सामाजिक सद्भाव के मुद्दों पर सक्रिय रूप से अपने विचार व्यक्त करते रहे हैं।
मौलाना ने युवाओं से क्या अपील की?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने युवाओं से सहयोग, भाईचारे और मानवता की भावना को अपने जीवन का आधार बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को अपनाने से युवाओं को व्यक्तिगत सफलता मिलेगी और देश का भी भला होगा।
क्या धार्मिक आस्था और इंसानियत एक-दूसरे के विरोधी हैं?
मौलाना के अनुसार, धार्मिक आस्था और मानवता एक-दूसरे की विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं। अपने धर्म पर कायम रहते हुए दूसरे धर्मों का सम्मान करना ही सामाजिक शांति और भाईचारे का आधार बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले