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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मोहन भागवत के बयान का किया स्वागत, बोले — धर्म का असल संदेश प्रेम और इंसानियत है

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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मोहन भागवत के बयान का किया स्वागत, बोले — धर्म का असल संदेश प्रेम और इंसानियत है

सारांश

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के 'धर्म-डीएनए' बयान का स्वागत किया और कहा कि धर्म का असल संदेश इंसानियत व प्रेम है, कट्टरपंथ नहीं। उन्होंने युवाओं से भाईचारे और परस्पर सम्मान की भावना विकसित करने की अपील की।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 19 सितंबर 2026 को बरेली में मोहन भागवत के 'धर्म-डीएनए' बयान का स्वागत किया।
मौलाना ने कहा कि धार्मिक आस्था सकारात्मक है, लेकिन कट्टरपंथ को किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उनके अनुसार धर्म का मूल संदेश इंसानियत, प्रेम और परस्पर सम्मान है — टकराव नहीं।
मौलाना ने युवाओं से सहयोग, भाईचारे और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की विशेष अपील की।
उन्होंने कहा कि धार्मिक पहचान अलग हो सकती है, लेकिन इंसानियत सभी को जोड़ने वाली समान भावना है।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 19 सितंबर 2026 को बरेली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का खुलकर स्वागत किया, जिसमें भागवत ने धर्म को मनुष्य के डीएनए से जुड़ा हुआ बताया था। मौलाना ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था रखना एक सकारात्मक प्रवृत्ति है, लेकिन किसी भी धर्म के नाम पर कट्टरपंथ को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने देश के युवाओं से इंसानियत, आपसी सहयोग और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने की अपील की।

भागवत के बयान पर मौलाना की प्रतिक्रिया

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मोहन भागवत ने धर्म को लेकर जो बात कही है, वह महत्त्वपूर्ण और विचारणीय है। उनके अनुसार, भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में धार्मिक मूल्य किसी न किसी रूप में मौजूद हैं, और यह स्वाभाविक भी है। उन्होंने कहा, 'धर्म का पालन करना अच्छी बात है, लेकिन किसी भी धर्म के नाम पर कट्टरता उचित नहीं है।'

मौलाना का मानना है कि यदि व्यक्ति के हृदय में मानवता की भावना है, तो वह बेहतर इंसान बन सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म का मूल संदेश इंसानियत, आपसी प्रेम और एक-दूसरे के सम्मान से जुड़ा होना चाहिए — न कि दूरी और टकराव पैदा करने से।

विविधता में एकता और सामाजिक सौहार्द

मौलाना ने कहा कि अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोगों के बीच परस्पर सम्मान और सद्भाव की भावना होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने धर्म में आस्था रखने के साथ-साथ दूसरे धर्मों का भी आदर करता है, तो समाज में टकराव की परिस्थितियाँ स्वतः कम होंगी। उन्होंने कहा, 'धार्मिक पहचान अलग हो सकती है, लेकिन इंसानियत वह समान भावना है जो सभी को जोड़ती है।'

गौरतलब है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ दर्जनों धर्म और सैकड़ों आस्थाएँ एक साथ अस्तित्व में हैं, इस तरह की अंतर-धार्मिक संवाद की आवाज़ें सामाजिक शांति के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण मानी जाती हैं।

युवाओं के लिए विशेष संदेश

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने खासतौर पर देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि युवा पीढ़ी सहयोग और भाईचारे की भावना के साथ आगे बढ़े, तो इसका लाभ केवल उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र को मिलेगा। उनके शब्दों में, 'युवाओं में सकारात्मक सोच, परस्पर सहयोग और मानवता की भावना होगी तो वे अपने व्यक्तिगत जीवन में भी सफलता हासिल कर सकते हैं और देश का नाम भी रोशन कर सकते हैं।'

धर्म और मानवता — विरोधाभास नहीं, पूरक

मौलाना ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था और मानवता एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार, अपने धर्म पर दृढ़ रहते हुए दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान रखना ही सामाजिक शांति और भाईचारे की नींव बन सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में अंतर-धार्मिक संवाद और सह-अस्तित्व को लेकर विभिन्न मंचों पर बहस जारी है।

आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह संवाद व्यापक सामाजिक-धार्मिक विमर्श में किस रूप में आगे बढ़ता है और क्या अन्य धार्मिक संगठन भी इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक दुर्लभ सार्वजनिक संकेत है कि अंतर-धार्मिक नेतृत्व के स्तर पर साझा ज़मीन तलाशने की कोशिशें जारी हैं। हालाँकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस तरह के सद्भावपूर्ण बयान अक्सर शीर्ष स्तर पर दिए जाते हैं, जबकि ज़मीनी सामाजिक तनाव बने रहते हैं — अतः इनका मूल्यांकन केवल वक्तव्यों से नहीं, बल्कि व्यावहारिक सामुदायिक संवाद की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों से होना चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे बयानों को 'सांप्रदायिक सौहार्द' के खाने में डालकर भूल जाती है — असली सवाल यह है कि ये संस्थागत आवाज़ें नीति और शिक्षा के स्तर पर क्या बदलाव लाती हैं।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मोहन भागवत के किस बयान का स्वागत किया?
मौलाना ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का स्वागत किया जिसमें उन्होंने धर्म को मनुष्य के डीएनए से जुड़ा हुआ बताया था। मौलाना ने इसे महत्त्वपूर्ण कहते हुए कहा कि भारत में हर व्यक्ति के जीवन में धर्म और धार्मिक मूल्य किसी न किसी रूप में मौजूद हैं।
मौलाना रजवी बरेलवी ने कट्टरपंथ के बारे में क्या कहा?
मौलाना ने स्पष्ट कहा कि किसी भी धर्म के नाम पर कट्टरता उचित नहीं है। उनके अनुसार, धार्मिक आस्था सकारात्मक है लेकिन कट्टरपंथ को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने युवाओं से आपसी सहयोग, भाईचारे और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं में मानवता की भावना होगी तो उनका व्यक्तिगत जीवन भी सफल होगा और देश का नाम भी रोशन होगा।
धर्म और मानवता के बारे में मौलाना का क्या दृष्टिकोण है?
मौलाना के अनुसार, धार्मिक आस्था और मानवता एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं। अपने धर्म पर कायम रहते हुए दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान रखना ही सामाजिक शांति और भाईचारे का आधार बन सकता है।
यह बयान भारत के सामाजिक सौहार्द के संदर्भ में क्यों महत्त्वपूर्ण है?
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में जहाँ अनेक धर्म और आस्थाएँ साथ-साथ हैं, अंतर-धार्मिक नेतृत्व के स्तर पर आने वाले सद्भावपूर्ण बयान सामाजिक टकराव को कम करने की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। मौलाना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतर-धार्मिक संवाद को लेकर राष्ट्रीय विमर्श जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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