19 सितंबर 2026
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पश्चिम चंपारण: नरकटियागंज के निजी क्लिनिक में 25 वर्षीय गर्भवती महिला की मौत, चिकित्सा लापरवाही का आरोप

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पश्चिम चंपारण: नरकटियागंज के निजी क्लिनिक में 25 वर्षीय गर्भवती महिला की मौत, चिकित्सा लापरवाही का आरोप

सारांश

पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में एक निजी क्लिनिक में पांच महीने की गर्भवती 25 वर्षीय सलमा खातून की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि डी एंड सी की जगह सर्जरी कराई गई, क्लिनिक स्टाफ मौके से भाग गया। पुलिस जांच जारी है।

मुख्य बातें

25 वर्षीय सलमा खातून की मौत 19 सितंबर 2026 को नरकटियागंज, पश्चिम चंपारण के शुक्ला क्लिनिक में ऑपरेशन के दौरान हुई।
मृतका पांच महीने की गर्भवती थीं; उन्हें डी एंड सी प्रक्रिया के लिए भर्ती कराया गया था, बाद में सर्जरी की गई।
परिवार का आरोप — शुरू में ₹14,000 तय हुए, फिर ₹25,000 माँगे गए; ₹11,000 पहले ही जमा कराए जा चुके थे।
परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद क्लिनिक संचालक और कर्मचारी मौके से भाग गए।
पुलिस और डायल 112 दल ने मौके पर पहुँचकर स्थिति नियंत्रित की; जांच जारी है।
उपमंडल अस्पताल के उप अधीक्षक डॉ.
संजीव कुमार ने जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज स्थित शुक्ला क्लिनिक में 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को 25 वर्षीय गर्भवती महिला सलमा खातून की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई। परिजनों और स्थानीय निवासियों ने क्लिनिक प्रबंधन पर चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतक का परिचय और अस्पताल में भर्ती की परिस्थितियाँ

मृतका की पहचान सलमा खातून के रूप में हुई, जो इनारवा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के घोड़पकड़ी गांव की निवासी थीं और उनके पति का नाम रियाज अहमद है। परिवार के अनुसार, सलमा करीब पांच महीने की गर्भावस्था में थीं, जब उन्हें गर्भ में पल रहे भ्रूण की मृत्यु की सूचना मिली। इसके बाद उन्हें नरकटियागंज के पुरानी बाजार स्थित शुक्ला क्लिनिक में भर्ती कराया गया।

परिजनों ने बताया कि सलमा को डी एंड सी (डाइलेशन और क्यूरेटेज) प्रक्रिया के लिए क्लिनिक लाया गया था, जिसके लिए शुरुआत में ₹14,000 का खर्च तय किया गया था और उनमें से ₹11,000 पहले ही जमा करा दिए गए थे।

उपचार में बदलाव और सर्जरी का निर्णय

परिवार ने आरोप लगाया कि बाद में डॉक्टर ने डी एंड सी प्रक्रिया को असुरक्षित बताते हुए मना कर दिया और इसके स्थान पर सर्जरी की सिफारिश की। सर्जरी के लिए परिवार से ₹25,000 अतिरिक्त माँगे गए, जिस पर सहमति मिलने के बाद सलमा को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।

परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान सलमा की हालत अचानक बिगड़ गई और कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में निजी क्लिनिकों में प्रसूति संबंधी लापरवाही के मामलों पर बहस जारी है।

क्लिनिक प्रबंधन पर आरोप और विरोध प्रदर्शन

परिजनों ने आगे आरोप लगाया कि महिला की मृत्यु के बाद क्लिनिक प्रबंधन ने स्थिति को संभालने के बजाय शव को एम्बुलेंस में भेजने का सुझाव दिया। परिवार का कहना है कि क्लिनिक संचालक और उसके कर्मचारी मौका मिलते ही परिसर छोड़कर भाग गए।

मृत्यु की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय निवासी क्लिनिक के बाहर एकत्र हो गए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की। गौरतलब है कि यह विरोध उस क्षेत्र में हुआ जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के लिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच पहले से ही सीमित बताई जाती है।

पुलिस की कार्रवाई और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

पुलिस और डायल 112 आपातकालीन प्रतिक्रिया दल मौके पर पहुँचे, भीड़ को नियंत्रित किया और परिजनों एवं प्रत्यक्षदर्शियों से बयान दर्ज किए। पुलिस ने महिला की मृत्यु की परिस्थितियों और क्लिनिक पर लगे आरोपों की जांच शुरू कर दी है।

उपमंडल अस्पताल के प्रभारी उप अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

क्या होगा आगे

पुलिस की जांच अभी जारी है और क्लिनिक संचालक की गिरफ्तारी अथवा क्लिनिक के लाइसेंस पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में निजी क्लिनिकों की नियमित निगरानी और प्रसूति सेवाओं में गुणवत्ता मानकों को लागू करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे की कमजोरी के चलते गरीब परिवार अक्सर बिना लाइसेंस या अपर्याप्त सुविधाओं वाले निजी केंद्रों पर निर्भर रहते हैं। उपचार के तरीके में बदलाव और बढ़ी हुई फीस के आरोप दर्शाते हैं कि वित्तीय दबाव और चिकित्सा निर्णय कैसे आपस में उलझे हो सकते हैं। बिहार में प्रसूति मृत्यु दर पहले से ही राष्ट्रीय औसत से ऊपर बताई जाती है — ऐसे में इस घटना को केवल एक अलग दुर्घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। असली परीक्षा यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग केवल जांच की घोषणा तक सीमित रहेगा, या निजी क्लिनिकों पर व्यापक नियामक कार्रवाई होगी।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरकटियागंज में गर्भवती महिला की मौत कैसे हुई?
परिजनों के अनुसार, पांच महीने की गर्भवती सलमा खातून को भ्रूण की मृत्यु के बाद शुक्ला क्लिनिक में डी एंड सी प्रक्रिया के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में सर्जरी कराई गई, जिसके दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
परिवार ने क्लिनिक पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिवार का आरोप है कि डी एंड सी की जगह बिना उचित कारण सर्जरी कराई गई, अतिरिक्त रकम वसूली गई और मौत के बाद क्लिनिक संचालक व कर्मचारी परिसर छोड़कर भाग गए। ये सभी आरोप अभी जांच के दायरे में हैं।
पुलिस ने मामले में क्या कार्रवाई की है?
पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुँची, भीड़ को नियंत्रित किया और परिजनों से बयान दर्ज किए। मृत्यु की परिस्थितियों और क्लिनिक पर लगे आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की क्या प्रतिक्रिया रही?
उपमंडल अस्पताल के प्रभारी उप अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और जांच पूरी होने पर नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना से कौन-से बड़े मुद्दे सामने आते हैं?
यह मामला बिहार के ग्रामीण इलाकों में निजी क्लिनिकों की निगरानी की कमी और प्रसूति सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है। राज्य में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुँच के कारण कमजोर वर्ग अक्सर अनियमित निजी केंद्रों पर निर्भर रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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