30 अगस्त 2026
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मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान पर मौलाना साजिद रशीदी बोले — नफरत फैलाने वालों पर हो तत्काल कार्रवाई

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मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान पर मौलाना साजिद रशीदी बोले — नफरत फैलाने वालों पर हो तत्काल कार्रवाई

सारांश

RSS प्रमुख मोहन भागवत के एकता बयान को मौलाना साजिद रशीदी ने सराहा, लेकिन शर्त रखी — जब तक नफरत फैलाने वालों पर ठोस कार्रवाई न हो, बयान खोखला है। दो दशकों की सांप्रदायिक कड़वाहट और शिक्षा की ज़रूरत पर उनकी बेबाक राय ने बहस को नई दिशा दी।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान का स्वागत किया, पर उसे अपर्याप्त बताया।
रशीदी ने माँग की कि BJP सरकार नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करे — तभी बयान की विश्वसनीयता साबित होगी।
उन्होंने पिछले दो दशकों में सांप्रदायिक सद्भाव को कमज़ोर करने की कोशिशों का उल्लेख किया।
रशीदी ने साक्षरता दर बढ़ाने को राष्ट्रीय प्रगति और 'विश्वगुरु' लक्ष्य की पूर्वशर्त बताया; यूरोपीय देशों में 90% साक्षरता का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वाले तत्व देश को तोड़ना चाहते हैं — सरकार और RSS दोनों को यह समझना होगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता संबंधी बयान का मौलाना साजिद रशीदी ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह बयान महज शब्दों तक सीमित रहेगा। 30 अगस्त को नई दिल्ली में दिए गए अपने वक्तव्य में रशीदी ने भारत की 'अनेकता में एकता' की विरासत को रेखांकित करते हुए सरकार और आरएसएस दोनों से जवाबदेही की माँग की।

भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया

मौलाना रशीदी ने कहा, 'उनका बयान बहुत अच्छा है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार में आज तक मुसलमानों के साथ जो देश में होता रहा, वह मोहन भागवत के बयान के बिल्कुल विपरीत है।' उन्होंने जोड़ा कि भागवत का यह वक्तव्य हिंदुस्तान की 'असल रूह और सभ्यता' को दर्शाता है, जहाँ अलग-अलग धर्मों के लोग अपनी पूजा-पद्धति के साथ सदियों से एक साथ रहते आए हैं।

रशीदी के अनुसार, पिछले दो दशकों में इस सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने और आपसी मोहब्बत को नफरत में बदलने की कोशिशें हुई हैं — एक गंभीर आरोप जो उन्होंने बिना किसी विशेष व्यक्ति या संगठन का नाम लिए किया।

नफरत फैलाने वालों पर कार्रवाई की माँग

मौलाना रशीदी ने सीधे शब्दों में कहा कि यदि BJP सरकार मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले लोगों को जेल नहीं भेजती, तो भागवत का बयान 'दिल और जुबान' से नहीं, बल्कि महज दिखावे के लिए दिया गया माना जाएगा। उन्होंने पार्टी के भीतर के 'बयान बहादुरों' का ज़िक्र करते हुए कहा कि यदि उन्हें नहीं रोका गया तो यह 'मुंह में राम और बगल में छूरी' जैसी स्थिति होगी।

उन्होंने माँग की कि नीयत अच्छी है तो नफरत फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए — यह परीक्षण होगा कि बयान केवल राजनीतिक है या वास्तविक प्रतिबद्धता।

शिक्षा और साक्षरता पर जोर

रशीदी ने कहा कि शिक्षा ही असल कामयाबी की कुंजी है। उन्होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ 90 प्रतिशत तक साक्षरता दर होने के कारण वे देश आगे हैं। उनके अनुसार, भारत के 'विश्वगुरु' बनने का सपना तभी साकार होगा जब देश में साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हो।

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अशिक्षित हैं और जिनके मन में मुसलमानों के प्रति नफरत है, वे इस देश के हित में नहीं सोच सकते।

राष्ट्रीय एकता की अपील

मौलाना रशीदी ने अंत में कहा कि जो लोग देश में नफरत फैलाना चाहते हैं, वे वास्तव में देश को तोड़ना चाहते हैं। उन्होंने सरकार और RSS दोनों से आग्रह किया कि वे इस सच्चाई को समझें। उनके अनुसार, भारत को आगे ले जाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश के सभी नागरिक परस्पर प्रेम और सद्भाव के साथ रहें।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर राष्ट्रीय विमर्श तेज़ है, और भागवत के हालिया वक्तव्यों ने विभिन्न वर्गों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मौलाना रशीदी की प्रतिक्रिया उस असली खाई को उजागर करती है जो RSS के घोषित आदर्शों और ज़मीनी राजनीतिक व्यवहार के बीच बनी हुई है। सवाल यह नहीं कि बयान दिया गया या नहीं — सवाल यह है कि क्या संस्थागत जवाबदेही का कोई तंत्र है जो ऐसे बयानों को नीति में बदले। जब तक 'बयान बहादुरों' पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होती और नफरती भाषण के मामलों में दोषसिद्धि नहीं बढ़ती, तब तक एकता की बात प्रतीकात्मक ही रहेगी। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस माँग की परत को नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर क्या कहा था?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता का आह्वान करते हुए बयान दिया था, जिसे विभिन्न धार्मिक व सामाजिक वर्गों में व्यापक चर्चा मिली। मौलाना साजिद रशीदी ने इसे 'हिंदुस्तान की असल रूह और सभ्यता' का प्रतिबिंब बताया।
मौलाना साजिद रशीदी ने भागवत के बयान पर क्या शर्त रखी?
रशीदी ने कहा कि यदि BJP सरकार मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले लोगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं करती, तो भागवत का बयान केवल दिखावा माना जाएगा। उन्होंने 'मुंह में राम और बगल में छूरी' जैसी कहावत का इस्तेमाल करते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाया।
रशीदी ने शिक्षा का ज़िक्र क्यों किया?
मौलाना रशीदी ने कहा कि अशिक्षा और नफरत आपस में जुड़ी हैं — जो लोग अशिक्षित हैं और मुसलमानों से नफरत करते हैं, वे देश के हित में नहीं सोच सकते। उन्होंने यूरोपीय देशों की 90% साक्षरता दर को उनकी तरक्की का कारण बताया।
क्या RSS और BJP की नीतियों में अंतर है — रशीदी की नज़र में?
रशीदी ने स्पष्ट कहा कि भागवत का बयान RSS के आदर्शों को दर्शाता है, लेकिन BJP सरकार का व्यवहार उससे 'बिल्कुल विपरीत' रहा है। यह टिप्पणी संघ और उसकी राजनीतिक शाखा के बीच के कथित अंतर को रेखांकित करती है।
यह बयान किस संदर्भ में आया?
यह प्रतिक्रिया 30 अगस्त को नई दिल्ली में आई, जब सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ है। भागवत के हालिया बयानों ने विभिन्न धार्मिक समुदायों के नेताओं में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है।
राष्ट्र प्रेस
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