मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता बयान पर मौलाना साजिद रशीदी बोले — नफरत फैलाने वालों पर हो तत्काल कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता संबंधी बयान का मौलाना साजिद रशीदी ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह बयान महज शब्दों तक सीमित रहेगा। 30 अगस्त को नई दिल्ली में दिए गए अपने वक्तव्य में रशीदी ने भारत की 'अनेकता में एकता' की विरासत को रेखांकित करते हुए सरकार और आरएसएस दोनों से जवाबदेही की माँग की।
भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया
मौलाना रशीदी ने कहा, 'उनका बयान बहुत अच्छा है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार में आज तक मुसलमानों के साथ जो देश में होता रहा, वह मोहन भागवत के बयान के बिल्कुल विपरीत है।' उन्होंने जोड़ा कि भागवत का यह वक्तव्य हिंदुस्तान की 'असल रूह और सभ्यता' को दर्शाता है, जहाँ अलग-अलग धर्मों के लोग अपनी पूजा-पद्धति के साथ सदियों से एक साथ रहते आए हैं।
रशीदी के अनुसार, पिछले दो दशकों में इस सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने और आपसी मोहब्बत को नफरत में बदलने की कोशिशें हुई हैं — एक गंभीर आरोप जो उन्होंने बिना किसी विशेष व्यक्ति या संगठन का नाम लिए किया।
नफरत फैलाने वालों पर कार्रवाई की माँग
मौलाना रशीदी ने सीधे शब्दों में कहा कि यदि BJP सरकार मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले लोगों को जेल नहीं भेजती, तो भागवत का बयान 'दिल और जुबान' से नहीं, बल्कि महज दिखावे के लिए दिया गया माना जाएगा। उन्होंने पार्टी के भीतर के 'बयान बहादुरों' का ज़िक्र करते हुए कहा कि यदि उन्हें नहीं रोका गया तो यह 'मुंह में राम और बगल में छूरी' जैसी स्थिति होगी।
उन्होंने माँग की कि नीयत अच्छी है तो नफरत फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए — यह परीक्षण होगा कि बयान केवल राजनीतिक है या वास्तविक प्रतिबद्धता।
शिक्षा और साक्षरता पर जोर
रशीदी ने कहा कि शिक्षा ही असल कामयाबी की कुंजी है। उन्होंने यूरोपीय देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ 90 प्रतिशत तक साक्षरता दर होने के कारण वे देश आगे हैं। उनके अनुसार, भारत के 'विश्वगुरु' बनने का सपना तभी साकार होगा जब देश में साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हो।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अशिक्षित हैं और जिनके मन में मुसलमानों के प्रति नफरत है, वे इस देश के हित में नहीं सोच सकते।
राष्ट्रीय एकता की अपील
मौलाना रशीदी ने अंत में कहा कि जो लोग देश में नफरत फैलाना चाहते हैं, वे वास्तव में देश को तोड़ना चाहते हैं। उन्होंने सरकार और RSS दोनों से आग्रह किया कि वे इस सच्चाई को समझें। उनके अनुसार, भारत को आगे ले जाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश के सभी नागरिक परस्पर प्रेम और सद्भाव के साथ रहें।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर राष्ट्रीय विमर्श तेज़ है, और भागवत के हालिया वक्तव्यों ने विभिन्न वर्गों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है।