30 अगस्त 2026
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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अरनमुला उथ्रिट्टाथी वल्लमकली का उद्घाटन किया, पंबा नदी पर केरल की विरासत को दी श्रद्धांजलि

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अरनमुला उथ्रिट्टाथी वल्लमकली का उद्घाटन किया, पंबा नदी पर केरल की विरासत को दी श्रद्धांजलि

सारांश

पंबा नदी पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अरनमुला उथ्रिट्टाथी वल्लमकली का उद्घाटन कर केरल की सांस्कृतिक आत्मा को नमन किया। ओणम, सबरीमाला आस्था और जीआई-टैग अरनमुला कन्नाडी की विरासत को एक मंच पर समेटते हुए उन्होंने 'विकास भी, विरासत भी' के संदेश को जीवंत किया।

मुख्य बातें

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 30 अगस्त को पंबा नदी पर अरनमुला उथ्रिट्टाथी वल्लमकली का उद्घाटन किया।
उत्सव में सौ से अधिक नाविक भव्य पल्लियोडम नौकाओं पर लयबद्ध रूप से सहभागी हुए।
उपराष्ट्रपति ने सबरीमाला की अपनी सात तीर्थयात्राओं और भगवान अय्यप्पा के प्रति आस्था का उल्लेख किया।
जीआई-टैग प्राप्त अरनमुला कन्नाडी और पार्थसारथी मंदिर की विरासत को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
केरल के राज्यपाल अर्लेकर , गृह मंत्री चेन्निथला सहित कई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
उपराष्ट्रपति ने केरल के नाम परिवर्तन विधेयक की राज्यसभा में अध्यक्षता और ओणम की शुभकामनाएँ भी दीं।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार, 30 अगस्त को पंबा नदी पर आयोजित अरनमुला उथ्रिट्टाथी वल्लमकली का विधिवत उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक नौका दौड़ उत्सव को उन्होंने केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गहरी आस्था और अटूट परंपराओं का जीवंत प्रतीक बताया। यह आयोजन ओणम पर्व के उत्सवी वातावरण में और भी भव्य रूप में संपन्न हुआ।

उत्सव का महत्व और परंपरा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अरनमुला वल्लमकली ओणम और वल्लासद्या की पवित्र परंपरा से अभिन्न रूप से जुड़ी है। भव्य रूप से सजाए गए पल्लियोडम नौकाओं पर सौ से अधिक नाविक एकजुट होकर लयबद्ध तरीके से नाव खेते हैं — यह दृश्य टीम वर्क, अनुशासन और खेल भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने इस उत्सव को केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक सामूहिक आध्यात्मिक अनुभव बताया।

पंबा नदी और सबरीमाला का आध्यात्मिक संबंध

पंबा नदी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि यह नदी सबरीमाला तीर्थयात्रा का अभिन्न अंग है और आस्था, पवित्रता तथा आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सबरीमाला की अपनी सात तीर्थयात्राओं का स्मरण किया और बताया कि संसद सदस्य के रूप में नामांकन से ठीक पहले की गई उनकी पहली यात्रा उनके जीवन में विशेष स्थान रखती है। उनका मानना है कि भगवान अय्यप्पा के आशीर्वाद ने उनकी बाद की चुनावी सफलताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अरनमुला की विरासत — मंदिर से कन्नाडी तक

उपराष्ट्रपति ने अरनमुला की सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए प्राचीन पार्थसारथी मंदिर और विश्वप्रसिद्ध जीआई-टैग प्राप्त अरनमुला कन्नाडी (धातु दर्पण) की विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उपराष्ट्रपति आवास पर आयोजित कार्यक्रमों में उन्होंने अतिथियों को अरनमुला कन्नाडी भेंट की थी, जिसकी उत्कृष्ट कारीगरी की सभी ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए पारंपरिक कलाओं, शिल्पों और ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।

केरल के नाम परिवर्तन और ओणम पर शुभकामनाएँ

राधाकृष्णन ने केरल के हालिया नाम परिवर्तन पर प्रदेशवासियों को बधाई दी और याद दिलाया कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्हें हाल ही में संपन्न सत्र में इस नाम परिवर्तन विधेयक को पारित कराने की अध्यक्षता का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने ओणम के शुभ अवसर पर केरलवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ भी दीं।

परंपरा और आधुनिकता का समन्वय

उन्होंने रेखांकित किया कि विदेशों में कार्यरत प्रवासी केरलवासी भी इन प्रिय परंपराओं में सहभागी होने के लिए स्वदेश लौटते हैं — यह इस बात का प्रमाण है कि सांस्कृतिक परंपराएँ लोगों को उनकी जड़ों से जोड़े रखती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के विविध त्योहार देश की सांस्कृतिक एकता को अभिव्यक्त करते हैं। उनके शब्दों में, 'हमारी विविधता विभाजन का स्रोत नहीं है; यह हमारी शक्ति का स्रोत है।' कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन, जल संसाधन मंत्री मॉन्स जोसेफ, सांसद एंटो एंटनी और अरनमुला के विधायक अभिन वर्गी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह उत्सव आने वाले वर्षों में भी केरल की सांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ क्षेत्रीय परंपराओं को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। गौरतलब है कि केरल में सत्तारूढ़ वाम मोर्चे और केंद्र के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन साझा ज़मीन का काम करते हैं। 'विकास भी, विरासत भी' का नारा राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन असली कसौटी यह है कि अरनमुला कन्नाडी जैसे जीआई-टैग शिल्पों के कारीगरों को आर्थिक सुरक्षा और बाज़ार मिल रहा है या नहीं — जो प्रायः इन भाषणों में अनकहा रह जाता है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरनमुला उथ्रिट्टाथी वल्लमकली क्या है?
अरनमुला उथ्रिट्टाथी वल्लमकली केरल के अरनमुला में पंबा नदी पर आयोजित होने वाली एक ऐतिहासिक नौका दौड़ है, जो ओणम पर्व और वल्लासद्या परंपरा से जुड़ी है। इसमें भव्य पल्लियोडम नौकाओं पर सौ से अधिक नाविक भाग लेते हैं और यह केरल की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इस उत्सव में क्या कहा?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इस उत्सव को केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भक्ति और शाश्वत परंपराओं का प्रतीक बताया। उन्होंने टीम वर्क, अनुशासन और खेल भावना की सराहना की तथा 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया।
अरनमुला कन्नाडी क्या है और यह क्यों खास है?
अरनमुला कन्नाडी एक परंपरागत धातु दर्पण है जो केरल के अरनमुला में विशेष कारीगरों द्वारा हाथ से बनाया जाता है। इसे भारत सरकार द्वारा जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्राप्त है, जो इसकी विशिष्टता और भौगोलिक उत्पत्ति को प्रमाणित करता है।
पंबा नदी का सबरीमाला से क्या संबंध है?
पंबा नदी सबरीमाला तीर्थयात्रा का अभिन्न अंग है — श्रद्धालु यहाँ स्नान करके भगवान अय्यप्पा के दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने स्वयं सबरीमाला की सात यात्राओं का उल्लेख कर इस नदी के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से प्रमुख नेता उपस्थित थे?
कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन, जल संसाधन मंत्री मॉन्स जोसेफ, सांसद एंटो एंटनी और अरनमुला के विधायक अभिन वर्गी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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