उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने तिरुमला में श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन किए, देश की शांति और समृद्धि की माँगी दुआ
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को तिरुपति के निकट तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की और देश में शांति, समृद्धि तथा सभी नागरिकों के कल्याण की प्रार्थना की। उपराष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह उनका तिरुमला का दूसरा दौरा है।
स्वागत और पारंपरिक सम्मान
आंध्र प्रदेश के बंदोबस्ती मंत्री अनम रामनारायण रेड्डी, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के चेयरमैन बी.आर. नायडू और कार्यकारी अधिकारी मुद्ददा रविचंद्र ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मंदिर के पुजारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार 'इस्तिकाफल' देकर उनका सम्मान किया, जिसके बाद उपराष्ट्रपति ने ध्वजस्तंभ के समक्ष नमन किया।
मुख्य दर्शन और पूजा-अर्चना
राधाकृष्णन ने देवी वकुलामाता, भगवान विमान वेंकटेश्वर, भाष्यकार सन्निधि (आचार्यों के मंदिर) और भगवान योग नरसिम्हा स्वामी के मंदिरों में भी दर्शन किए। इसके अतिरिक्त उन्होंने मुख्य मंदिर के सामने स्थित बेदी अंजनेय स्वामी मंदिर में भी पूजा की।
वैदिक आशीर्वाद और प्रसाद भेंट
रंगनायकुला मंडपम में वैदिक विद्वानों ने उपराष्ट्रपति को 'वेदाशीर्वचनम्' प्रदान किया। इस अवसर पर TTD चेयरमैन और कार्यकारी अधिकारी ने उन्हें भगवान की तस्वीर तथा तीर्थ प्रसाद भेंट किया। TTD के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी वेंकैया चौधरी और बोर्ड सदस्य भानु प्रकाश रेड्डी भी स्वागत और दर्शन व्यवस्था में उपस्थित रहे।
यात्रा का संदर्भ और पृष्ठभूमि
उपराष्ट्रपति के आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट पर दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने देश में शांति, समृद्धि और सभी लोगों के कल्याण की प्रार्थना की। गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को राधाकृष्णन ने विशाखापट्टनम में आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को संबोधित किया था, जिसके बाद वे तिरुपति पहुँचे। यह ऐसे समय में आया है जब सितंबर 2025 में उनके पहले तिरुमला दौरे के बाद से उनका आंध्र प्रदेश के आध्यात्मिक केंद्रों से जुड़ाव लगातार बना हुआ है।
उपराष्ट्रपति का यह दौरा संवैधानिक पदाधिकारियों की भारत की आध्यात्मिक विरासत के प्रति आस्था को रेखांकित करता है और आने वाले समय में भी इस तरह की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक यात्राओं की परंपरा जारी रहने की संभावना है।