आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, बुधवार को नियमित जमानत पर सुनवाई
सारांश
Key Takeaways
- पटियाला हाउस कोर्ट ने 28 अप्रैल को विनेश चंदेल की अंतरिम जमानत याचिका खारिज की।
- चंदेल को 23 अप्रैल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था; हिरासत 7 मई तक जारी है।
- ईडी ने 14 अप्रैल को 10 दिन की ईडी हिरासत के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा था।
- कंपनी के खातों में ₹13.50 करोड़ बिना ब्याज के कर्ज के रूप में दिखाने का आरोप।
- ईडी का आरोप — फर्जी बिल, हवाला लेनदेन और छापे के बाद डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश।
- नियमित जमानत याचिका पर बुधवार, 29 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार, 28 अप्रैल को कथित कोयला चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आई-पैक (I-PAC) के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। चंदेल ने अपनी माँ की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए अंतरिम राहत माँगी थी, लेकिन अदालत ने उनकी अर्जी अस्वीकार कर दी।
मामले का ताज़ा घटनाक्रम
अंतरिम जमानत खारिज होने के बाद अब विनेश चंदेल की नियमित जमानत याचिका पर बुधवार, 29 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई होनी है। इससे पहले 23 अप्रैल को अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने यह आदेश जारी किया था और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद चंदेल को 7 मई तक न्यायिक हिरासत में रखने का निर्देश दिया था।
गिरफ्तारी और ईडी की कार्रवाई
ईडी ने विनेश चंदेल को 28 मार्च को दर्ज ईसीआईआर (ECIR) के मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला आर्थिक अपराध शाखा की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें एम/एस इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, खातों में गड़बड़ी और गैर-हिसाबी धन के इस्तेमाल के आरोप हैं। इससे पहले 14 अप्रैल को दिल्ली की एक अदालत ने चंदेल को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेजा था, जहाँ उन्हें देर रात अदालत में पेश किया गया था।
ईडी के प्रमुख आरोप
ईडी ने अपनी रिमांड अर्जी में दावा किया था कि कंपनी के संस्थापक निदेशक चंदेल कथित अपराध से जुड़े धन के लेनदेन में सक्रिय रूप से शामिल थे और अवैध धन को पैदा करने, छिपाने तथा वैध बनाने की प्रक्रिया में उनकी मुख्य भूमिका थी। एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने पैसे लेने के लिए बैंक और नकद दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया और कुछ भुगतान '50 प्रतिशत चेक' के साथ किए जाने के भी संकेत मिले हैं, जिससे पता चलता है कि रकम को अलग-अलग हिस्सों में लिया गया।
एजेंसी का यह भी आरोप है कि कंपनी के खातों में ₹13.50 करोड़ बिना किसी ठोस समझौते के 'बिना ब्याज के कर्ज' के रूप में दिखाए गए, जो कथित तौर पर एम/एस रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से लिए गए थे। ईडी के अनुसार, इन पैसों का इस्तेमाल चुनाव से जुड़े खर्च और लोगों की सोच को प्रभावित करने जैसे कामों में किया गया।
सबूत मिटाने के आरोप
ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने फर्जी बिल बनाकर पैसे के लेनदेन को वैध दिखाने की कोशिश की, जबकि कथित तौर पर कोई वास्तविक सेवा नहीं दी गई। एजेंसी के अनुसार, हवाला के ज़रिए भी गैर-हिसाबी धन का लेनदेन किया गया। इसके अलावा, ईडी का आरोप है कि चंदेल ने जाँच के दौरान गलत बयान दिए और अन्य निदेशकों के साथ मिलकर छापेमारी के बाद ईमेल व वित्तीय डेटा हटाने के निर्देश दिए, ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें बुधवार, 29 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट में होने वाली नियमित जमानत याचिका की सुनवाई पर टिकी हैं। यह मामला राजनीतिक परामर्श कंपनियों की वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी खर्च के नियमन पर व्यापक बहस को भी नया आयाम दे सकता है।