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माधुरी दीक्षित को डायरेक्ट करने की रितुपर्णो घोष की अधूरी हसरत, जन्मदिन पर याद

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माधुरी दीक्षित को डायरेक्ट करने की रितुपर्णो घोष की अधूरी हसरत, जन्मदिन पर याद

सारांश

रितुपर्णो घोष ने इंटरव्यू में माधुरी दीक्षित को डायरेक्ट करने की इच्छा जताई थी — उनके लिए माधुरी एक असाधारण भावनात्मक अभिनेत्री थीं। लेकिन 49 वर्ष की आयु में 2013 में असमय निधन ने यह सपना अधूरा छोड़ दिया। 12 नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले इस फिल्मकार की जयंती पर वह हसरत आज भी याद की जाती है।

मुख्य बातें

रितुपर्णो घोष का जन्म 31 अगस्त 1963 को कोलकाता में हुआ था।
उन्होंने एक इंटरव्यू में माधुरी दीक्षित को डायरेक्ट करने की इच्छा जताई थी, जो कभी पूरी नहीं हो सकी।
उनकी फिल्म 'उनीशे अप्रैल' (1994) को नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट फीचर फिल्म मिला।
अपने करियर में उन्हें कुल 12 नेशनल फिल्म अवॉर्ड प्राप्त हुए।
उन्होंने हिंदी फिल्म 'रेनकोट' में ऐश्वर्या राय और अजय देवगन को निर्देशित किया।
30 मई 2013 को 49 वर्ष की आयु में कोलकाता में उनका निधन हुआ।

बंगाली सिनेमा के महान फिल्मकार रितुपर्णो घोष की एक गहरी ख्वाहिश थी — माधुरी दीक्षित को अपनी किसी फिल्म में एक गंभीर और अलग रूप में पेश करना। उन्होंने एक इंटरव्यू में इस इच्छा का खुलकर जिक्र किया था। लेकिन 30 मई 2013 को मात्र 49 वर्ष की आयु में कोलकाता में उनके असमय निधन ने यह सपना हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया।

माधुरी के प्रति रितुपर्णो का नज़रिया

रितुपर्णो के लिए माधुरी दीक्षित महज़ एक बड़ी स्टार नहीं थीं। उनका मानना था कि माधुरी के भीतर भावनाओं को पर्दे पर जीवंत करने की असाधारण क्षमता है — एक ऐसी क्षमता जिसे उनकी दृष्टि में कभी पूरी तरह खोजा नहीं गया। वह उनके साथ ऐसी कहानी बुनना चाहते थे जो माधुरी की पहचान को एक नई गहराई दे। वक्त ने यह मौका नहीं दिया।

रितुपर्णो घोष: शुरुआत से सिनेमा तक का सफर

रितुपर्णो घोष का जन्म 31 अगस्त 1963 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता सुनील घोष डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर और चित्रकार थे, इसलिए घर में कला और सिनेमा का माहौल बचपन से ही था। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की और उसके बाद विज्ञापन जगत में कॉपीराइटर के रूप में करीब एक दशक तक काम किया। इस अनुभव ने उन्हें कम शब्दों में गहरी बात कहने का हुनर दिया, जो बाद में उनकी फिल्मों की पहचान बना।

फिल्मी करियर और राष्ट्रीय पहचान

बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म 'हीरेर अंगटी' बच्चों की कहानी पर आधारित थी। असली पहचान 1994 में आई 'उनीशे अप्रैल' से मिली, जिसने मां-बेटी के रिश्ते को इतनी संवेदनशीलता से दिखाया कि दर्शक भावुक हो गए। इस फिल्म को नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट फीचर फिल्म मिला। इसके बाद 'दहन', 'बारीवाली', 'चोखेर बाली', 'दोसर', 'आबोहोमान' जैसी फिल्मों ने उन्हें बंगाली सिनेमा का एक अलग स्तंभ बना दिया। अपने पूरे करियर में उन्हें 12 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले।

हिंदी और अंग्रेज़ी सिनेमा में कदम

रितुपर्णो ने हिंदी सिनेमा में भी छाप छोड़ी। 'चोखेर बाली' में ऐश्वर्या राय के साथ काम के बाद उन्होंने हिंदी फिल्म 'रेनकोट' बनाई, जिसमें ऐश्वर्या राय और अजय देवगन थे। इसके अलावा अमिताभ बच्चन, प्रीति जिंटा और अर्जुन रामपाल के साथ अंग्रेज़ी फिल्म 'द लास्ट लीयर' भी बनाई। बड़े सितारे उनकी फिल्मों में थे, लेकिन कहानी और किरदार हमेशा केंद्र में रहे।

निजी कला और विरासत

रितुपर्णो ने खुद भी अभिनय किया और टेलीविजन पर होस्ट के रूप में नज़र आए। उनकी फिल्म 'चित्रांगदा' उनके सबसे निजी कामों में गिनी जाती है, जिसमें उन्होंने जेंडर पहचान जैसे संवेदनशील विषय को केंद्र में रखा और खुद भी अभिनय किया। उनकी फिल्मों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सम्मान मिला। 30 मई 2013 को 49 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ बंगाली सिनेमा ने एक ऐसा रचनाकार खो दिया, जिसकी कई हसरतें — माधुरी दीक्षित के साथ काम करने की चाहत सहित — अधूरी रह गईं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और माधुरी की पर्दे पर भावनाओं को जीवंत करने की क्षमता — इन दोनों का संगम एक असाधारण कृति हो सकती थी। यह भी उल्लेखनीय है कि हिंदी मुख्यधारा के सिनेमा ने माधुरी को अक्सर ग्लैमरस भूमिकाओं तक सीमित रखा, जबकि रितुपर्णो उनकी अभिनय क्षमता की एक अलग परत खोलना चाहते थे। उनका यह अधूरा सपना दरअसल भारतीय सिनेमा की उस बड़ी कमी की ओर इशारा करता है — कि कला फिल्मों और मुख्यधारा के बीच की खाई अक्सर प्रतिभाशाली सहयोगों को जन्म लेने से पहले ही रोक देती है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रितुपर्णो घोष माधुरी दीक्षित को क्यों डायरेक्ट करना चाहते थे?
रितुपर्णो घोष का मानना था कि माधुरी दीक्षित के भीतर भावनाओं को पर्दे पर उतारने की असाधारण क्षमता है, जिसे पूरी तरह कभी खोजा नहीं गया। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह इच्छा जताई थी कि वह माधुरी के साथ एक गंभीर और अलग किस्म की कहानी बनाना चाहते हैं।
रितुपर्णो घोष का निधन कब और कहाँ हुआ?
रितुपर्णो घोष का निधन 30 मई 2013 को कोलकाता में हुआ। उनकी आयु उस समय केवल 49 वर्ष थी।
रितुपर्णो घोष की सबसे प्रसिद्ध फिल्में कौन-सी हैं?
उनकी प्रमुख फिल्मों में 'उनीशे अप्रैल' (1994), 'दहन', 'चोखेर बाली', 'रेनकोट', 'दोसर', 'आबोहोमान' और 'चित्रांगदा' शामिल हैं। 'उनीशे अप्रैल' को नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट फीचर फिल्म मिला था।
रितुपर्णो घोष को कितने नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले?
अपने पूरे करियर में रितुपर्णो घोष को 12 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। उनकी फिल्मों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया।
रितुपर्णो घोष ने हिंदी सिनेमा में कौन-सी फिल्में बनाईं?
रितुपर्णो घोष ने हिंदी में 'रेनकोट' (ऐश्वर्या राय और अजय देवगन के साथ) बनाई। इसके अलावा अमिताभ बच्चन, प्रीति जिंटा और अर्जुन रामपाल के साथ अंग्रेज़ी फिल्म 'द लास्ट लीयर' का निर्देशन भी किया।
राष्ट्र प्रेस
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