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एलपीयू विरोध-प्रदर्शन: डीन सौरभ लखनपाल बोले — सोशल मीडिया अफवाह ने भड़काई हिंसा, 10 दिन कक्षाएं स्थगित

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एलपीयू विरोध-प्रदर्शन: डीन सौरभ लखनपाल बोले — सोशल मीडिया अफवाह ने भड़काई हिंसा, 10 दिन कक्षाएं स्थगित

सारांश

जालंधर के एलपीयू परिसर में आधी रात को हुई तोड़फोड़ महज छात्र असंतोष नहीं थी — डीन के बयान के अनुसार यह एक सोशल मीडिया अफवाह से भड़की आग थी, जिसे मास्क पहने, रॉड लिए बाहरी तत्वों ने हिंसक रूप दिया। साइबर सेल अब वायरल संदेश के स्रोत की तह तक जाने में जुटी है।

मुख्य बातें

एलपीयू डीन सौरभ लखनपाल ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन मुख्यतः सोशल मीडिया अफवाह से उपजे आक्रोश का नतीजा था।
मास्क पहने और रॉड लिए संदिग्ध बाहरी तत्वों ने मुख्य गेट पर तोड़फोड़ की और जबरन प्रवेश की कोशिश की।
विश्वविद्यालय में 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित; अधिकांश छात्र घर लौटे।
साइबर सेल और पुलिस वायरल संदेश के आईपी एड्रेस और टावर डंप डेटा की जाँच कर रही है।
छात्रों की माँग पर उन्हें जाँच के हर चरण में प्रशासन के साथ शामिल किया गया।
प्रशासन ने आश्वासन दिया कि किसी छात्र का पाठ्यक्रम प्रभावित नहीं होगा और जल्द कक्षाएं फिर शुरू होंगी।

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू), जालंधर में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन और तोड़फोड़ की घटना पर विश्वविद्यालय के डीन सौरभ लखनपाल ने 29 सितंबर को स्पष्ट किया कि यह पूरा विवाद मुख्यतः सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक अफवाह से उपजे आक्रोश का परिणाम था। उन्होंने कहा कि जहाँ अधिकतर छात्र घटना की सच्चाई जानना चाहते थे, वहीं कुछ बाहरी तत्वों ने स्थिति का फायदा उठाकर प्रदर्शन को हिंसक मोड़ दे दिया।

घटनाक्रम: कैसे बढ़ी बेचैनी

डीन लखनपाल ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक संदेश सामने आने के बाद छात्रों में बेचैनी फैलने लगी। जब यह संदेश वायरल हुआ, तो छात्र अपने-अपने हॉस्टल से निकलकर आपस में बातचीत करने लगे। उन्होंने कहा कि उन्हें उसी समय फोन आया और वह आधी रात के आसपास छात्रों के पास पहुँचे।

बातचीत के दौरान कुछ संदिग्ध व्यक्ति परिसर के पास आ गए। लखनपाल के अनुसार, इन लोगों ने मास्क पहन रखे थे और उनके पास रॉड थीं। इन्होंने मुख्य गेट पर तोड़फोड़ की और जबरन परिसर में घुसने की कोशिश की।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और स्थिति पर नियंत्रण

डीन ने बताया कि 10 से 15 मिनट के भीतर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों ने मिलकर स्थिति को काबू में किया और कुछ ही घंटों में पूरे परिसर को सुरक्षित कर लिया गया। छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें तुरंत वापस भेजने का निर्णय लिया गया।

लखनपाल ने कहा कि छात्रों ने जाँच प्रक्रिया में शामिल होने की माँग की थी, जिसे प्रशासन ने स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि पुलिस को शामिल करते हुए जाँच की प्रक्रिया तैयार की गई और अगले दिन से छात्र जाँच के हर चरण में प्रशासन के साथ रहे।

साइबर सेल की जाँच और तकनीकी विश्लेषण

विश्वविद्यालय प्रशासन कथित तौर पर साइबर सेल और पुलिस के साथ लगातार संपर्क में है। वायरल संदेश के स्रोत का पता लगाने के लिए टावर डंप और अन्य तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। इसमें इस्तेमाल किए गए आईपी एड्रेस और संदेश के प्रसार के रास्ते की भी जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया-जनित अफवाहों से परिसरों में अशांति की यह पहली घटना नहीं है। देशभर में कई विश्वविद्यालयों में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ असत्यापित संदेशों ने बड़े विवाद को जन्म दिया।

कक्षाओं पर असर और आगे की राह

फिलहाल विश्वविद्यालय में 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं और अधिकांश छात्र अपने घर लौट गए हैं। डीन लखनपाल ने आश्वासन दिया कि जल्द ही कक्षाएं दोबारा शुरू की जाएंगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी छात्र की पढ़ाई या पाठ्यक्रम प्रभावित न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन आवश्यक है, और किसी भी घटना में विश्वविद्यालय की पहली प्राथमिकता छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में पुलिस, सिविल प्रशासन और विश्वविद्यालय की संयुक्त जाँच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आंतरिक शिकायतों की संभावना को पृष्ठभूमि में धकेल देती है। असली सवाल यह है कि वह सोशल मीडिया संदेश किस विषय पर था और क्या छात्रों की मूल चिंताएं वैध थीं — जिसका जवाब अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। साइबर जाँच जरूरी है, लेकिन पारदर्शी आंतरिक समीक्षा उतनी ही जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी अफवाहों के लिए उर्वर जमीन न बने।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलपीयू में छात्र विरोध-प्रदर्शन क्यों हुआ?
डीन सौरभ लखनपाल के अनुसार, सोशल मीडिया पर एक वायरल संदेश के बाद छात्रों में बेचैनी फैली और कुछ बाहरी तत्वों ने इस स्थिति का फायदा उठाकर प्रदर्शन को हिंसक रूप दे दिया। वास्तविक छात्र घटना की सच्चाई जानना चाहते थे।
एलपीयू में तोड़फोड़ किसने की?
डीन के बयान के अनुसार, मास्क पहने और रॉड लिए कुछ संदिग्ध बाहरी व्यक्तियों ने मुख्य गेट पर तोड़फोड़ की और जबरन परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की। इन्हें 'असामाजिक तत्व' बताया गया है और उनकी पहचान के लिए जाँच जारी है।
एलपीयू में कक्षाएं कब तक बंद रहेंगी?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल 10 दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित की हैं। डीन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही कक्षाएं दोबारा शुरू होंगी और किसी छात्र का पाठ्यक्रम प्रभावित नहीं होगा।
एलपीयू प्रशासन वायरल संदेश की जाँच कैसे कर रहा है?
विश्वविद्यालय साइबर सेल और पुलिस के साथ मिलकर वायरल संदेश के आईपी एड्रेस, टावर डंप डेटा और प्रसार के रास्ते का तकनीकी विश्लेषण कर रहा है। इसका उद्देश्य संदेश के मूल स्रोत की पहचान करना है।
क्या छात्रों को जाँच प्रक्रिया में शामिल किया गया?
हाँ, छात्रों की माँग पर पुलिस को शामिल करते हुए जाँच की प्रक्रिया तैयार की गई और अगले दिन से छात्र जाँच के हर चरण में प्रशासन के साथ रहे। डीन ने इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
राष्ट्र प्रेस
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