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सोनम वांगचुक विपक्ष के राजनीतिक मोहरे हैं — दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का आरोप

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सोनम वांगचुक विपक्ष के राजनीतिक मोहरे हैं — दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का आरोप

सारांश

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने सोनम वांगचुक को विपक्ष का राजनीतिक हथियार करार दिया — कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा की अदालत में उपस्थिति को सबूत बताया। दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक को अस्पताल में रखने को मनमाना मानने से इनकार किया; अगली सुनवाई 24 जुलाई को।

मुख्य बातें

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने 19 जुलाई को सोनम वांगचुक को विपक्ष का राजनीतिक मोहरा बताया।
मल्होत्रा ने कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा की दिल्ली हाई कोर्ट में उपस्थिति को राजनीतिक संलिप्तता का प्रमाण बताया।
वांगचुक 28 जून से नीट-यूजी गड़बड़ियों के विरोध में भूख हड़ताल पर थे; तबीयत बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जस्टिस मिनी पुष्करणा की एकल-पीठ ने वांगचुक की पत्नी की याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार किया।
अदालत ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को तीन दिन में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया; अगली सुनवाई 24 जुलाई को।
AAP नेता मनीष सिसोदिया उसी दिन जंतर-मंतर पर वांगचुक के विरोध स्थल पर पहुँचे।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने रविवार, 19 जुलाई को आरोप लगाया कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक महज एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि विपक्ष के हाथों का राजनीतिक हथियार हैं। मल्होत्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में वांगचुक की पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा की उपस्थिति को इस दावे का आधार बताया।

मल्होत्रा का मुख्य आरोप

मल्होत्रा ने कहा कि जब दो वरिष्ठ विपक्षी सांसद-वकील किसी कार्यकर्ता के मामले में अदालत में पेश होते हैं, तो यह स्वतः स्पष्ट हो जाता है कि मामले की जड़ें राजनीतिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष मानसून सत्र के दौरान सड़कों और संसद दोनों जगह हंगामा खड़ा करने की रणनीति के तहत वांगचुक को इस्तेमाल कर रहा है।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस का वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने का कदम दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप था — और इसीलिए अदालत ने वांगचुक की पत्नी की याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

भूख हड़ताल की पृष्ठभूमि

वांगचुक नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्रों के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। यह प्रदर्शन आम आदमी पार्टी (AAP), कम्युनिस्ट पार्टियों और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के समर्थन से आयोजित था।

मल्होत्रा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि नीट की पुनर्परीक्षा 21 जून को ही संतोषजनक रूप से संपन्न हो चुकी थी, फिर भी 28 जून को भूख हड़ताल शुरू की गई। उनके अनुसार, यह तथ्य ही इस आंदोलन के राजनीतिक उद्देश्य को उजागर करता है।

हाई कोर्ट का रुख

तबीयत बिगड़ने के बाद वांगचुक को शनिवार को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी पत्नी ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें अस्पताल में जबरन रखे जाने को चुनौती दी। जस्टिस मिनी पुष्करणा की एकल-पीठ ने इस याचिका पर कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए कहा कि बिगड़ती सेहत को देखते हुए सरकार का फैसला मनमाना नहीं कहा जा सकता।

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि अस्पताल के डॉक्टर वांगचुक की सेहत पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और उनकी सहमति से ही उन्हें मुँह से दवाएँ दी जा रही हैं। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस सहित सभी प्रतिवादियों को तीन दिन के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

भाजपा की टिप्पणी उस दिन आई जब AAP नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जंतर-मंतर पर वांगचुक के पुराने विरोध स्थल पर पहुँचे। सिसोदिया की यह उपस्थिति भाजपा के उस आरोप को और हवा देती है कि विपक्षी दल इस मामले को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।

आगे क्या होगा

दिल्ली हाई कोर्ट में 24 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी दी जाती है या नहीं। इस बीच, नीट-यूजी विवाद और वांगचुक के आंदोलन को लेकर राजनीतिक तनाव मानसून सत्र के दौरान बना रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल — नीट-यूजी में कथित गड़बड़ी और छात्रों की चिंताएँ — पृष्ठभूमि में चली जा रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट का यह कहना कि अस्पताल ले जाना 'मनमाना' नहीं था, सरकार की प्रक्रियागत वैधता को तो स्थापित करता है, लेकिन यह नागरिक स्वतंत्रता और राज्य की शक्ति के बीच की महीन रेखा को भी रेखांकित करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि नीट पुनर्परीक्षा के बाद भी आंदोलन जारी रहने के पीछे छात्रों की व्यापक प्रणालीगत शिकायतें हैं, जिन पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की बहस में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर्ष मल्होत्रा ने सोनम वांगचुक को राजनीतिक मोहरा क्यों कहा?
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में वांगचुक की पैरवी के लिए विपक्षी सांसद-वकील कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा का पेश होना यह साबित करता है कि वांगचुक सिर्फ एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं हैं। उनके अनुसार विपक्ष मानसून सत्र में हंगामे की रणनीति के तहत वांगचुक का इस्तेमाल कर रहा है।
सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों ले जाया गया?
28 जून से नीट-यूजी विवाद के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस कदम को मनमाना मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए उचित था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी की याचिका पर क्या फैसला किया?
जस्टिस मिनी पुष्करणा की एकल-पीठ ने वांगचुक की पत्नी की याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को तीन दिन में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 24 जुलाई के लिए तय की।
नीट पुनर्परीक्षा के बाद भी भूख हड़ताल क्यों जारी रही?
भाजपा के अनुसार नीट की पुनर्परीक्षा 21 जून को संतोषजनक ढंग से हो चुकी थी, फिर भी 28 जून को भूख हड़ताल शुरू की गई। मल्होत्रा ने इसे राजनीतिक उद्देश्य का प्रमाण बताया, हालाँकि आंदोलनकारियों का कहना था कि नीट-यूजी में कथित प्रणालीगत गड़बड़ियों पर व्यापक जवाबदेही अभी बाकी है।
मनीष सिसोदिया की जंतर-मंतर पर उपस्थिति का क्या महत्व है?
AAP नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया उसी दिन जंतर-मंतर पर वांगचुक के पुराने विरोध स्थल पर पहुँचे जिस दिन भाजपा ने यह बयान दिया। भाजपा ने इसे विपक्षी दलों की राजनीतिक संलिप्तता के और सबूत के रूप में पेश किया।
राष्ट्र प्रेस
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