राज्यसभा में खड़गे का पलटवार: 'रिजिजू मुझे नियम न सिखाएं, गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 6 अगस्त को राज्यसभा में हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया और कहा कि रिजिजू उन्हें संसदीय नियम सिखाने की कोशिश न करें। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच खड़गे ने सरकार से मांग की कि गृह मंत्री स्वयं सदन में आकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें।
खड़गे का सीधा जवाब
खड़गे ने सदन में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'क्या अब मुझे रिजिजू से नियम सीखना पड़ेगा? नियम मैं भी जानता हूं। आप लोग भी सभापति के कक्ष में जाकर नियमों का हवाला देते हैं। अगर मैं यहां अपना विषय पढ़कर नहीं बोलूंगा, तो यहां क्या करूंगा? यह मेरा अधिकार है कि मैं क्या बोलूं, कब बोलूं और कैसे बोलूं।' उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।
पवन खेड़ा पर टिप्पणी का विरोध
खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा कांग्रेस के नवनिर्वाचित सांसद पवन खेड़ा पर की गई टिप्पणी का भी कड़ा विरोध किया। रिजिजू ने कहा था कि खेड़ा हाल ही में संसद पहुंचे हैं और उन्हें पहले संसदीय नियमों का अध्ययन करना चाहिए। इस पर खड़गे ने कहा, 'पवन खेड़ा पढ़े-लिखे और अच्छे व्यक्ति हैं। उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सदस्यों का अपमान कर रही है।
संसदीय नियमों का हवाला
खड़गे ने राज्यसभा के नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी सदस्य के खिलाफ मानहानिकारक या आपराधिक प्रकृति के आरोप तब तक नहीं लगाए जा सकते, जब तक संबंधित सदस्य को पहले इसकी सूचना न दी गई हो और नियमों का पालन न किया गया हो। उन्होंने दिवंगत भाजपा नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली के एक वक्तव्य का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में व्यवधान भी कभी-कभी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
सरकार पर जवाबदेही का दबाव
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष जनता और देश से जुड़े सवाल उठाता है, सरकार उनका जवाब देने से बचती है। उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि संबंधित मंत्री सदन में आकर बयान दें। उसके बाद हम पूरी तरह चर्चा के लिए तैयार हैं।' खड़गे ने सभापति से भी अपील की कि सरकार की बात सुनने के साथ-साथ विपक्ष को भी बोलने का समान अवसर दिया जाए।
सदन का माहौल
खड़गे के पूरे वक्तव्य के दौरान राज्यसभा में शोर-शराबा जारी रहा और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सरकार के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि राज्यसभा में इस तरह की तीखी बहस पिछले कई सत्रों में भी देखी जा चुकी है, जहाँ विपक्ष जवाबदेही की माँग करता रहा है और सरकार पर चर्चा से बचने के आरोप लगते रहे हैं।