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खड़गे ने बेंगलुरु में राज्यसभा नामांकन दाखिल किया, राहुल-शिवकुमार मौजूद; कर्नाटक कांग्रेस में बगावत के सुर

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खड़गे ने बेंगलुरु में राज्यसभा नामांकन दाखिल किया, राहुल-शिवकुमार मौजूद; कर्नाटक कांग्रेस में बगावत के सुर

सारांश

खड़गे का राज्यसभा नामांकन एकजुटता का प्रदर्शन था — राहुल गांधी और शिवकुमार दोनों मंच पर। लेकिन पर्दे के पीछे कर्नाटक कांग्रेस में दो मंत्री एक साथ बगावत पर उतर आए, जो विभागों के बँटवारे को लेकर सुलग रहे असंतोष की कहानी कहता है।

मुख्य बातें

मल्लिकार्जुन खड़गे ने बेंगलुरु के विधान सौधा में कर्नाटक से राज्यसभा नामांकन दाखिल किया।
राज्यसभा की एक सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव 18 जून को होगा।
राहुल गांधी , डी.के.
शिवकुमार और सिद्दारमैया नामांकन के दौरान उपस्थित रहे।
जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने मंत्रिमंडल से इस्तीफे का ऐलान किया — बेंगलुरु शहरी विभाग न मिलने पर।
मुनियप्पा ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का कार्यभार लेने से इनकार किया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 6 जून 2025 को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस अवसर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया विशेष रूप से उपस्थित रहे। कर्नाटक में राज्यसभा की एक सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव 18 जून को होना निर्धारित है।

नामांकन समारोह और वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति

बेंगलुरु पहुँचने पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद, कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने खड़गे और राहुल गांधी का गर्मजोशी से स्वागत किया। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और मंत्री एम.बी. पाटिल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी इस मौके पर मौजूद रहे।

केम्पेगौडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँचने के बाद राहुल गांधी ने एक पौधा लगाया और उसे पानी देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। यह दृश्य पार्टी की हरित पहल की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया।

कर्नाटक कांग्रेस में अंदरूनी कलह

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कांग्रेस सरकार के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। कोरमंगला स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में रेड्डी ने कहा कि वह अपना इस्तीफा सौंपेंगे और इसे स्वीकार करना है या नहीं, यह फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।

रेड्डी ने आरोप लगाया कि सरकार गठन के समय उनसे वादा किया गया था कि ढाई साल बाद उन्हें बेंगलुरु शहरी विकास से जुड़ा विभाग सौंपा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके भाई डी.के. सुरेश ने उनके घर जाकर व्यक्तिगत रूप से यह भरोसा दिलाया था। गौरतलब है कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद उन्हें बेंगलुरु शहरी विकास विभाग के बजाय जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

मुनियप्पा की नाराजगी — एक और मोर्चा

कांग्रेस सरकार के लिए चुनौतियाँ यहीं नहीं थमीं। वरिष्ठ नेता और मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने उन्हें सौंपे गए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह इस मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभालेंगे और पार्टी नेतृत्व से हस्तक्षेप कर स्थिति सुधारने की माँग की है।

यह कर्नाटक कांग्रेस सरकार के लिए दूसरी बड़ी आंतरिक चुनौती है, जो एक साथ सामने आई है — जो संकेत देती है कि विभागों के बँटवारे को लेकर असंतोष गहरा है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

खड़गे का राज्यसभा में वापसी का यह प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत करने में लगी है। पार्टी नेतृत्व के लिए यह दोहरी परीक्षा है — एक ओर राज्यसभा सीट सुनिश्चित करना, दूसरी ओर कर्नाटक सरकार की आंतरिक दरारों को पाटना। वरिष्ठ नेताओं का बेंगलुरु पहुँचना इस बात का संकेत है कि पार्टी हाईकमान स्थिति को गंभीरता से ले रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसी दिन दो मंत्रियों का विद्रोह यह बताता है कि कर्नाटक कांग्रेस सरकार में विभागों का बँटवारा अब भी एक खुला घाव है। शिवकुमार के लिए यह दोहरी मुश्किल है — राज्यसभा की जीत सुनिश्चित करना और साथ ही अपने ही मंत्रिमंडल को टूटने से बचाना। यह पहली बार नहीं है कि कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता-साझेदारी के वादे विवाद का कारण बने हैं; 2013 की सिद्दारमैया सरकार में भी ऐसे ही तनाव उभरे थे। हाईकमान की बेंगलुरु यात्रा आग बुझाने की कोशिश लगती है, पर असली परीक्षा यह होगी कि क्या पार्टी इन असंतुष्ट नेताओं को संतुष्ट कर पाती है — या यह दरार और गहरी होती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा नामांकन कहाँ और कब दाखिल किया?
खड़गे ने बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। कर्नाटक में राज्यसभा की एक सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव 18 जून को होना निर्धारित है।
नामांकन के समय कौन-कौन से नेता बेंगलुरु में मौजूद थे?
राहुल गांधी, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और मंत्री एम.बी. पाटिल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफे का ऐलान क्यों किया?
रेड्डी ने आरोप लगाया कि सरकार गठन के समय उनसे वादा किया गया था कि ढाई साल बाद उन्हें बेंगलुरु शहरी विकास विभाग सौंपा जाएगा, लेकिन यह वादा पूरा नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके भाई डी.के. सुरेश ने व्यक्तिगत रूप से यह आश्वासन दिया था।
के.एच. मुनियप्पा की नाराजगी किस बात को लेकर है?
वरिष्ठ नेता और मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने उन्हें सौंपे गए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को लेकर असंतोष जताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह इस मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभालेंगे और पार्टी नेतृत्व से हस्तक्षेप की माँग की है।
कर्नाटक कांग्रेस में इस अंदरूनी कलह का क्या असर होगा?
एक साथ दो मंत्रियों के विद्रोह ने शिवकुमार सरकार के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी हाईकमान के वरिष्ठ नेताओं का बेंगलुरु पहुँचना संकेत देता है कि स्थिति को जल्द से जल्द संभालने की कोशिश हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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