राज्यसभा में 10 नए सदस्यों ने ली शपथ, 25 जून को सीपी राधाकृष्णन ने दिलाया प्रतिज्ञान
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 25 जून 2026 को नई दिल्ली में संसद के उच्च सदन में 10 नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों को शपथ एवं प्रतिज्ञान दिलाया। यह समारोह भारतीय लोकतंत्र की संवैधानिक परंपरा के अनुरूप गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें देश की भाषाई और क्षेत्रीय विविधता की स्पष्ट झलक देखने को मिली।
किन सदस्यों ने ली शपथ
गुरुवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वालों में प्रवीण चक्रवर्ती, देबाशीष सामंतराय, सना सतीश बाबू, विजय चिंतकायाला, भाष्यम राम कृष्ण, लिंगामनेनी रमेश, राजेश परमानंद शुक्ला, बैद्यनाथ राम, परिमल नथवानी और ताई टागाक शामिल रहे। शपथ ग्रहण के साथ ही ये सभी सदस्य औपचारिक रूप से सदन की कार्यवाही में भाग लेने के पात्र हो गए हैं।
भाषाई विविधता का प्रतिबिंब
10 में से 5 सदस्यों ने हिंदी में शपथ ली, जबकि 3 सदस्यों ने तेलुगु में प्रतिज्ञान लिया। 1 सदस्य ने तमिल में और 1 सदस्य ने अंग्रेजी में शपथ ग्रहण की। यह विविधता भारत के संविधान द्वारा सभी मान्यता-प्राप्त भाषाओं को दिए गए समान सम्मान को रेखांकित करती है। गौरतलब है कि राज्यसभा में मातृभाषा में शपथ लेने की परंपरा संसदीय समावेशिता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।
राज्यों का प्रतिनिधित्व
क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की दृष्टि से आंध्र प्रदेश से सर्वाधिक 4 सदस्य इस बार राज्यसभा पहुँचे हैं। झारखंड से 2 सदस्य निर्वाचित होकर आए, जबकि तमिलनाडु, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा से एक-एक सदस्य उच्च सदन में शामिल हुए। यह संयोजन राज्यसभा में दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत की आवाज़ को नई ऊर्जा देता है।
समारोह में उपस्थित गणमान्य
शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी, सदन के अनेक सदस्य तथा राज्यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सदन में उपस्थित सभी सदस्यों ने नवागत सांसदों का स्वागत किया।
आगे क्या होगा
नए और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के सदन में शामिल होने से संसद के मानसून सत्र में विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को नए दृष्टिकोण के साथ उठाए जाने की संभावना है। राज्यसभा में शपथ ग्रहण की यह प्रक्रिया भारतीय संविधान की उस भावना को जीवंत रखती है, जिसमें निर्वाचित जनप्रतिनिधि सर्वोच्च दस्तावेज़ के प्रति निष्ठा व्यक्त करते हुए जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने की शपथ लेते हैं।