25 जुलाई 2026
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राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने 'प्रारंभ' कार्यक्रम में 67 नए सांसदों को दिखाई संसदीय राह

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राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने 'प्रारंभ' कार्यक्रम में 67 नए सांसदों को दिखाई संसदीय राह

सारांश

राज्यसभा के 67 नए सदस्यों के लिए 'प्रारंभ' कार्यक्रम महज औपचारिकता नहीं — यह संसदीय संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की कोशिश है। सभापति राधाकृष्णन ने व्यवधान पर सीधी चेतावनी दी और AI तकनीक को अपनाने का आह्वान किया — यह संसद के बदलते स्वरूप का संकेत है।

मुख्य बातें

राज्यसभा सभापति सी.पी.
राधाकृष्णन ने 25 जुलाई 2026 को दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम 'प्रारंभ' का उद्घाटन किया।
इस बार 67 सदस्य पहली बार राज्यसभा पहुँचे हैं; कार्यक्रम में उपसभापति हरिवंश और महासचिव पी.सी.
मोदी भी उपस्थित रहे।
सभापति ने नियम 267 के सीमित और विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की; संसदीय व्यवधान पर चिंता जताई।
राज्यसभा में 'वाणी सेतु' AI उपकरण के जरिए कई भारतीय भाषाओं में रियल-टाइम अनुवाद की सुविधा उपलब्ध।
पहली बार कार्यक्रम में सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों पर व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित की गई।
सभापति ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में नए सांसदों की भूमिका को ऐतिहासिक बताया।

राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने 25 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राज्यसभा के नवनिर्वाचित और नामित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम 'प्रारंभ' का उद्घाटन किया। इस बार 67 सदस्य पहली बार राज्यसभा पहुँचे हैं, और इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें संसद की कार्यप्रणाली, नियमों, परंपराओं और आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करना है।

कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद

उद्घाटन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, महासचिव पी.सी. मोदी, कई सांसद और राज्यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत उपसभापति हरिवंश के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि नए सदस्य ऐसे ऐतिहासिक दौर में संसद में आए हैं जब देश 'अमृत काल' में प्रवेश कर चुका है और 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य सामने है।

हरिवंश ने स्पष्ट किया कि सांसदों की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है — सरकार को जवाबदेह ठहराना, जनहित के मुद्दे उठाना, रचनात्मक सुझाव देना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

सभापति राधाकृष्णन का संदेश: 'राष्ट्र प्रथम'

सभापति राधाकृष्णन ने सप्ताहांत के बावजूद सदस्यों की उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनकी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने राज्यसभा को भारत के संघीय लोकतंत्र की आधारशिला बताया, जो देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि सभी सदस्य भिन्न-भिन्न विचारधाराओं से आते हैं, लेकिन वे एक संविधान, एक सोच — 'राष्ट्र प्रथम' — और 2047 तक विकसित भारत के साझा लक्ष्य से जुड़े हैं। संसद में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, परंतु सभी सांसदों की सर्वोच्च निष्ठा संविधान और देश की जनता के प्रति होनी चाहिए।

व्यवधान पर चिंता, नियम 267 का विशेष उल्लेख

राधाकृष्णन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बहस, चर्चा और यहाँ तक कि विरोध का भी उद्देश्य किसी सार्थक निर्णय तक पहुँचना होना चाहिए। उनके अनुसार, अगर व्यवधान के कारण चर्चा ही नहीं हो पाती, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और उसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।

उन्होंने प्रश्नकाल और शून्यकाल को सांसदों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मंच बताते हुए उनकी गरिमा बनाए रखने की अपील की। विशेष रूप से नियम 267 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में और सदन की सहमति से ही किया जाना चाहिए।

संसदीय अनुभव और तकनीक का समन्वय

सभापति ने अपने संसदीय अनुभव साझा करते हुए बताया कि लोकसभा सदस्य और कपड़ा मामलों की संसदीय उपसमिति के संयोजक के रूप में उनके कार्यकाल में समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार ने टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम लागू की, जिससे कपड़ा उद्योग के आधुनिकीकरण को बल मिला। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल या संसदीय समितियों में दिया गया एक छोटा-सा सुझाव भी भविष्य में बड़ी नीतिगत पहल का आधार बन सकता है।

तकनीक के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि संसद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में प्रवेश कर चुकी है। 'वाणी सेतु' जैसे AI-आधारित उपकरण राज्यसभा में कई भारतीय भाषाओं में रियल-टाइम अनुवाद की सुविधा दे रहे हैं। उन्होंने सदस्यों से AI और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) जैसी नई तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। गौरतलब है कि इस बार के 'प्रारंभ' कार्यक्रम में पहली बार सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों पर व्यावहारिक कार्यशाला भी आयोजित की गई।

आगे की राह

राधाकृष्णन ने नए सदस्यों को लगातार अध्ययन और तैयारी की आदत विकसित करने की सलाह दी और बताया कि वे स्वयं सदन की प्रत्येक बैठक से पूर्व दिन के कार्यसूची और संबंधित नियमों का अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा पीढ़ी के सांसदों के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में ऐतिहासिक योगदान देने का अवसर है। यह दो दिवसीय कार्यक्रम नए सांसदों को एक सशक्त विधायक के रूप में तैयार करने की दिशा में एक ठोस पहल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या नए सांसद सदन के भीतर उत्पादक बहस की संस्कृति को वास्तव में आगे बढ़ाते हैं। 'राष्ट्र प्रथम' का नारा सर्वदलीय सहमति की माँग करता है, जो मौजूदा राजनीतिक ध्रुवीकरण के माहौल में एक कठिन लक्ष्य बना हुआ है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यसभा का 'प्रारंभ' ओरिएंटेशन कार्यक्रम क्या है?
'प्रारंभ' राज्यसभा के नवनिर्वाचित और नामित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य नए सांसदों को संसद की कार्यप्रणाली, नियमों, परंपराओं और आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है। 25 जुलाई 2026 को इसका उद्घाटन सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया।
इस बार 'प्रारंभ' कार्यक्रम में कितने नए सांसद शामिल हुए?
इस बार 67 सदस्य पहली बार राज्यसभा पहुँचे हैं और वे इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में शामिल हुए। सभापति राधाकृष्णन ने सप्ताहांत के बावजूद उनकी उपस्थिति को लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
राज्यसभा में नियम 267 क्या है और इसे लेकर सभापति ने क्या कहा?
नियम 267 राज्यसभा की कार्यसूची को स्थगित कर किसी अत्यावश्यक मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देता है। सभापति राधाकृष्णन ने कहा कि इस प्रावधान का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में और सदन की सहमति से ही किया जाना चाहिए, ताकि इसका दुरुपयोग न हो।
'वाणी सेतु' क्या है और राज्यसभा में इसका क्या उपयोग है?
'वाणी सेतु' एक AI-आधारित उपकरण है जो राज्यसभा में कई भारतीय भाषाओं में रियल-टाइम अनुवाद की सुविधा प्रदान करता है। सभापति राधाकृष्णन ने नए सांसदों से इस तरह की तकनीक और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) को अपनाने का आग्रह किया।
सभापति राधाकृष्णन ने नए सांसदों को क्या मुख्य सलाह दी?
राधाकृष्णन ने नए सांसदों से लगातार अध्ययन और तैयारी की आदत विकसित करने, संसदीय नियमों को गहराई से समझने और प्रश्नकाल व शून्यकाल की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सांसदों द्वारा पूछा गया हर सवाल और बनाई गई हर नीति लाखों लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर डाल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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