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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राज्यसभा नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए 'प्रारंभ' कार्यक्रम का उद्घाटन किया

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राज्यसभा नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए 'प्रारंभ' कार्यक्रम का उद्घाटन किया

सारांश

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए 'प्रारंभ' कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि सदन का हर पल लोकतंत्र को मजबूत करने में लगना चाहिए — बहस हो, चर्चा हो या सहयोग, लक्ष्य राष्ट्र निर्माण होना चाहिए।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 25 जुलाई को नई दिल्ली में राज्यसभा नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए 'प्रारंभ' कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
यह दो दिवसीय ओरिएंटेशन-कम-ट्रेनिंग कार्यक्रम नामांकित और नवनिर्वाचित सांसदों को संसदीय प्रक्रियाओं से परिचित कराता है।
राधाकृष्णन ने कहा कि स्वस्थ बहस लोकतंत्र को मजबूत करती है और रचनात्मक सहयोग देश को आगे बढ़ाता है।
सदस्यों से प्रश्नकाल और शून्यकाल के प्रभावी उपयोग तथा सदन की परंपराओं के सम्मान की अपील की गई।
इससे पहले 22 जुलाई को राधाकृष्णन ने कोयंबटूर में केजीएनएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग का उद्घाटन किया था।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार, 25 जुलाई को नई दिल्ली में राज्यसभा के नवनिर्वाचित और नामांकित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन-कम-ट्रेनिंग कार्यक्रम 'प्रारंभ' का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सदस्यों को उनके संसदीय दायित्वों और विधायी भूमिका से अवगत कराते हुए मुख्य संबोधन दिया।

मुख्य संबोधन की प्रमुख बातें

राधाकृष्णन ने संसदीय कार्यवाही में सार्थक भागीदारी पर बल देते हुए कहा, 'बहस, चर्चा या रुकावटें, इनसे हमेशा कोई न कोई फैसला निकलना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वस्थ बहस लोकतंत्र की नींव को सुदृढ़ करती है, जबकि रचनात्मक सहयोग राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने नए सदस्यों से आग्रह किया कि सदन में बिताया गया प्रत्येक दिन, प्रत्येक घंटा, प्रत्येक मिनट और प्रत्येक सेकेंड लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए समर्पित होना चाहिए।

संसदीय परंपराओं पर जोर

उपराष्ट्रपति ने सदस्यों से अपील की कि वे सूचनापरक बहस, सदन के नियमों और प्रक्रियाओं का सम्मान, तथा प्रश्नकाल एवं शून्यकाल के प्रभावी उपयोग के माध्यम से राज्यसभा की उच्चतम संसदीय परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखें। उन्होंने कहा कि संसदीय मर्यादा और अनुशासन ही किसी भी विधायिका की वास्तविक पहचान होती है।

'प्रारंभ' कार्यक्रम का महत्व

यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों को संसदीय प्रक्रियाओं, विधायी कार्यों और सदन की कार्यशैली से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। 'प्रारंभ' नाम इस पहल की प्रतीकात्मक शुरुआत को दर्शाता है — नए सांसदों की संसदीय यात्रा का पहला कदम।

पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन इससे पहले 22 जुलाई को तमिलनाडु के कोयंबटूर में केजीएनएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग का उद्घाटन कर चुके हैं। उस अवसर पर उन्होंने कहा था कि नर्सें केवल देखभालकर्ता नहीं हैं — वे मरीजों में आत्मविश्वास, सांत्वना और आशा का संचार करती हैं। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए स्वास्थ्य सेवा वितरण को बेहतर बनाने और समर्पित स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया था।

आगे की राह

दो दिवसीय 'प्रारंभ' कार्यक्रम के समापन पर नवनिर्वाचित सदस्य राज्यसभा की कार्यवाही में अधिक तैयारी के साथ भाग लेने में सक्षम होंगे। यह पहल संसदीय दक्षता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह प्रशिक्षण सदन के भीतर व्यवहार में परिलक्षित होता है। नामांकित सदस्यों को शामिल करना एक सकारात्मक संकेत है, पर संसदीय जवाबदेही के लिए प्रशिक्षण से आगे संस्थागत सुधारों की भी दरकार है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रारंभ' ओरिएंटेशन कार्यक्रम क्या है?
'प्रारंभ' राज्यसभा के नवनिर्वाचित और नामांकित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन-कम-ट्रेनिंग कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य नए सांसदों को संसदीय प्रक्रियाओं, नियमों और विधायी कार्यों से परिचित कराना है। इसका उद्घाटन 25 जुलाई को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नए सांसदों को क्या संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि सदन में बिताया गया हर पल लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने सदस्यों से सूचनापरक बहस, सदन के नियमों का सम्मान और प्रश्नकाल व शून्यकाल के प्रभावी उपयोग की अपील की।
इस कार्यक्रम में कौन से सदस्य शामिल हैं?
यह कार्यक्रम राज्यसभा के नवनिर्वाचित और नामांकित (नॉमिनेटेड) सदस्यों के लिए आयोजित किया गया है, जो हाल ही में सदन में शामिल हुए हैं।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने हाल ही में और कहाँ कार्यक्रम का उद्घाटन किया?
22 जुलाई को उन्होंने तमिलनाडु के कोयंबटूर में केजीएनएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग का उद्घाटन किया था, जहाँ उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया था।
संसद में स्वस्थ बहस को लेकर राधाकृष्णन का क्या मत है?
उपराष्ट्रपति का मानना है कि स्वस्थ बहस लोकतंत्र की नींव को सुदृढ़ करती है और रचनात्मक सहयोग राष्ट्र की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि बहस, चर्चा या रुकावटें — इन सबसे किसी न किसी निर्णय तक पहुँचना ज़रूरी है।
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