उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अरुणाचल विधानसभा में विधायकों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का किया आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार, 9 सितंबर को ईटानगर में अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए विधायकों से लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखने और राज्य एवं देश की प्रगति के लिए सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया। यह दो दिवसीय यात्रा के दौरान उनका प्रमुख संबोधन था, जिसमें उन्होंने विधायी संवाद की अनिवार्यता पर विशेष बल दिया।
विधायी संवाद पर राधाकृष्णन का संदेश
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने विधानसभा में बातचीत, बहस और चर्चा की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि 'बहस, चर्चा या हंगामे का नतीजा हमेशा किसी फैसले के रूप में निकलना चाहिए।' उनके अनुसार, स्वस्थ बहस लोकतंत्र को मज़बूत करती है और रचनात्मक सहयोग ही राज्य व देश को आगे ले जाने की असली शक्ति है।
गौरतलब है कि यह संबोधन ऐसे समय में आया जब देश के कई राज्यों की विधानसभाओं में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच व्यवधान की शिकायतें बढ़ी हैं। राधाकृष्णन का यह आह्वान सांसदों और विधायकों की जवाबदेही की व्यापक राष्ट्रीय बहस से भी जुड़ता है।
अरुणाचल प्रदेश का रणनीतिक और सांस्कृतिक महत्व
उपराष्ट्रपति ने अरुणाचल प्रदेश की भूमिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में विशेष महत्व देते हुए कहा कि यह राज्य 'देश की सीमाओं का गौरवशाली प्रहरी है और भारत की एकता व अखंडता का अभिन्न अंग है।' उन्होंने जोड़ा कि देश के बाकी हिस्सों की सुरक्षा, अरुणाचल प्रदेश के लोगों द्वारा सीमाओं की रक्षा से गहराई से जुड़ी हुई है।
राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे देश की विविधता में एकता का प्रतीक बताया। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के दावे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहते हैं।
राष्ट्रीय एकता और विकसित भारत 2047 का संकल्प
राधाकृष्णन ने कहा कि 'हमारी क्षेत्रीय आवाज़ें अलग-अलग हैं, लेकिन हम एक दस्तावेज़ — हमारे संविधान, एक विज़न — राष्ट्र प्रथम, और एक लक्ष्य — विकसित भारत 2047 — से एकजुट हैं।' यह संदेश पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट पहचान को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय मुख्यधारा से उनके जुड़ाव को रेखांकित करता है।
मुख्यमंत्री खांडू की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा कि उपराष्ट्रपति का संबोधन 'एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव' था। उन्होंने उद्धृत किया कि उपराष्ट्रपति का संदेश इस बात की 'जबरदस्त याद दिलाता है कि हमारे लोकतंत्र की ताकत बातचीत, बहस और चर्चा में निहित है।' मुख्यमंत्री ने इसे विधानसभा के लिए 'एक यादगार दिन' बताते हुए जनसेवा की जिम्मेदारी को दोहराया।
दौरे के अन्य पड़ाव
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन मंगलवार को मणिपुर से ईटानगर पहुँचे थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने विधानसभा गैलरी-सह-संग्रहालय 'न्येदार नामलो', जवाहरलाल नेहरू राज्य संग्रहालय और सुनने व देखने में अक्षम बच्चों के लिए संचालित 'डोनी पोलो मिशन स्कूल' का भी दौरा किया। इन संस्थाओं का भ्रमण उनकी पूर्वोत्तर के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
आने वाले समय में उपराष्ट्रपति के इस संदेश का असर अरुणाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यशैली पर किस हद तक पड़ता है, यह देखना होगा।