राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने नए सदस्यों को साइबर सुरक्षा की दी सख्त हिदायत, लॉगिन क्रेडेंशियल्स को बताया सदन की संपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने 26 जुलाई 2026 को नवनिर्वाचित सांसदों को साइबर हमलों और आधिकारिक डिजिटल उपकरणों तक अनधिकृत पहुँच के गंभीर खतरों से सावधान किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लॉगिन क्रेडेंशियल्स सदन की संपत्ति हैं और उनकी सुरक्षा प्रत्येक सदस्य की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।
मुख्य घटनाक्रम
यह चेतावनी राज्यसभा के नव निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला 'प्रारंभ' के समापन सत्र में दी गई। हरिवंश ने अपने संबोधन में संसदीय कार्यप्रणाली पर तकनीकी क्रांति के व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया और कहा कि बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण ने सदन को तेज़ी से पेपरलेस और अधिक कुशल बनाया है।
उन्होंने बताया कि प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने कार्यशाला में सदस्यों को डिजिटल सुरक्षा और शासन में उभरती प्रौद्योगिकियों की जानकारी दी। उनका जोर इस बात पर था कि संसद तभी राष्ट्र को तकनीकी क्रांति में नेतृत्व दे सकती है, जब सदस्य स्वयं प्रौद्योगिकी से भलीभाँति परिचित हों।
डिजिटल सुरक्षा पर जोर
हरिवंश ने स्पष्ट किया कि सभी सदस्यों को आधिकारिक डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं और इन्हें साइबर हमलों तथा अनधिकृत पहुँच से सुरक्षित रखना अनिवार्य है। उन्होंने लॉगिन क्रेडेंशियल्स को सदन की संपत्ति बताते हुए कहा कि इनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी संस्थाओं पर साइबर हमलों की घटनाएँ वैश्विक स्तर पर बढ़ रही हैं।
निरंतर सीखने का आह्वान
उपसभापति ने सदस्यों को यह भी स्मरण दिलाया कि उनका सीखना इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम के साथ समाप्त नहीं होता, बल्कि यह आत्म-सुधार की निरंतर प्रक्रिया की मात्र शुरुआत है। उन्होंने सदस्यों को पिछली संसदीय प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन करने और उल्लेखनीय बहसों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
हरिवंश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जैसे प्रतिष्ठित सांसदों के भाषणों को देखने-सुनने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने अन्य देशों की संसदीय परंपराओं का अवलोकन करने की भी अपील की।
कार्यशाला की संरचना
दो दिवसीय 'प्रारंभ' कार्यक्रम को सदन के नियमों, प्रक्रियाओं, परंपराओं और विनियमों से सदस्यों को परिचित कराने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया था। कार्यक्रम को अलग-अलग सत्रों में विभाजित किया गया ताकि सदस्य कार्यविधि नियमों और सचिवालय के कामकाज को गहराई से समझ सकें। वरिष्ठ सदस्यों और अधिकारियों द्वारा वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से संसदीय प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया गया।
आगे की राह
हरिवंश के इस संबोधन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्यसभा डिजिटल सुरक्षा को संसदीय अनुशासन का अभिन्न अंग मानती है। आने वाले सत्रों में नए सदस्यों से अपेक्षा की जाएगी कि वे तकनीकी दक्षता और साइबर सावधानी दोनों के साथ सदन में योगदान दें।