27 जुलाई 2026
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राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने नए सदस्यों को साइबर सुरक्षा की दी सख्त हिदायत, लॉगिन क्रेडेंशियल्स को बताया सदन की संपत्ति

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राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने नए सदस्यों को साइबर सुरक्षा की दी सख्त हिदायत, लॉगिन क्रेडेंशियल्स को बताया सदन की संपत्ति

सारांश

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने 'प्रारंभ' कार्यशाला के समापन पर नए सांसदों को साइबर हमलों से सावधान किया और लॉगिन क्रेडेंशियल्स को सदन की संपत्ति बताया। यह संदेश ऐसे वक्त में आया है जब सरकारी संस्थाओं पर साइबर खतरे तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

मुख्य बातें

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने 26 जुलाई 2026 को नए सांसदों को साइबर हमलों के प्रति आगाह किया।
लॉगिन क्रेडेंशियल्स को सदन की संपत्ति घोषित किया गया; सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रत्येक सदस्य की बताई गई।
दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला 'प्रारंभ' के समापन सत्र में यह संबोधन दिया गया।
हरिवंश ने अटल बिहारी वाजपेयी , अरुण जेटली और चंद्रशेखर के भाषणों से प्रेरणा लेने की सलाह दी।
सदस्यों को सदन की प्रक्रियाओं, नियमों और डिजिटल कार्यप्रणाली से परिचित कराने के लिए कार्यक्रम को सावधानीपूर्वक तैयार किया गया था।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने 26 जुलाई 2026 को नवनिर्वाचित सांसदों को साइबर हमलों और आधिकारिक डिजिटल उपकरणों तक अनधिकृत पहुँच के गंभीर खतरों से सावधान किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लॉगिन क्रेडेंशियल्स सदन की संपत्ति हैं और उनकी सुरक्षा प्रत्येक सदस्य की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।

मुख्य घटनाक्रम

यह चेतावनी राज्यसभा के नव निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला 'प्रारंभ' के समापन सत्र में दी गई। हरिवंश ने अपने संबोधन में संसदीय कार्यप्रणाली पर तकनीकी क्रांति के व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया और कहा कि बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण ने सदन को तेज़ी से पेपरलेस और अधिक कुशल बनाया है।

उन्होंने बताया कि प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने कार्यशाला में सदस्यों को डिजिटल सुरक्षा और शासन में उभरती प्रौद्योगिकियों की जानकारी दी। उनका जोर इस बात पर था कि संसद तभी राष्ट्र को तकनीकी क्रांति में नेतृत्व दे सकती है, जब सदस्य स्वयं प्रौद्योगिकी से भलीभाँति परिचित हों।

डिजिटल सुरक्षा पर जोर

हरिवंश ने स्पष्ट किया कि सभी सदस्यों को आधिकारिक डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं और इन्हें साइबर हमलों तथा अनधिकृत पहुँच से सुरक्षित रखना अनिवार्य है। उन्होंने लॉगिन क्रेडेंशियल्स को सदन की संपत्ति बताते हुए कहा कि इनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी संस्थाओं पर साइबर हमलों की घटनाएँ वैश्विक स्तर पर बढ़ रही हैं।

निरंतर सीखने का आह्वान

उपसभापति ने सदस्यों को यह भी स्मरण दिलाया कि उनका सीखना इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम के साथ समाप्त नहीं होता, बल्कि यह आत्म-सुधार की निरंतर प्रक्रिया की मात्र शुरुआत है। उन्होंने सदस्यों को पिछली संसदीय प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन करने और उल्लेखनीय बहसों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

हरिवंश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जैसे प्रतिष्ठित सांसदों के भाषणों को देखने-सुनने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने अन्य देशों की संसदीय परंपराओं का अवलोकन करने की भी अपील की।

कार्यशाला की संरचना

दो दिवसीय 'प्रारंभ' कार्यक्रम को सदन के नियमों, प्रक्रियाओं, परंपराओं और विनियमों से सदस्यों को परिचित कराने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया था। कार्यक्रम को अलग-अलग सत्रों में विभाजित किया गया ताकि सदस्य कार्यविधि नियमों और सचिवालय के कामकाज को गहराई से समझ सकें। वरिष्ठ सदस्यों और अधिकारियों द्वारा वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से संसदीय प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया गया।

आगे की राह

हरिवंश के इस संबोधन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्यसभा डिजिटल सुरक्षा को संसदीय अनुशासन का अभिन्न अंग मानती है। आने वाले सत्रों में नए सदस्यों से अपेक्षा की जाएगी कि वे तकनीकी दक्षता और साइबर सावधानी दोनों के साथ सदन में योगदान दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे दुनियाभर की विधायिकाएँ झेल रही हैं। लेकिन 'लॉगिन क्रेडेंशियल्स को सदन की संपत्ति' कहना एक नीतिगत वक्तव्य है जिसके क्रियान्वयन का ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं है — क्या कोई साइबर ऑडिट तंत्र होगा, या यह केवल नैतिक अपील तक सीमित रहेगा? गौरतलब है कि भारतीय संसद ने हाल के वर्षों में डिजिटलीकरण की रफ्तार तेज़ की है, लेकिन साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल की सार्वजनिक जानकारी सीमित है। बिना जवाबदेही तंत्र के, यह संदेश महत्वपूर्ण होते हुए भी अधूरा रह जाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरिवंश ने राज्यसभा के नए सदस्यों को साइबर सुरक्षा पर क्या निर्देश दिए?
उपसभापति हरिवंश ने नए सांसदों को आधिकारिक डिजिटल उपकरणों को साइबर हमलों और अनधिकृत पहुँच से सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। उन्होंने लॉगिन क्रेडेंशियल्स को सदन की संपत्ति बताया और कहा कि इनकी सुरक्षा प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है।
'प्रारंभ' ओरिएंटेशन कार्यशाला क्या है?
'प्रारंभ' राज्यसभा के नव निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य सदस्यों को सदन के नियमों, प्रक्रियाओं, परंपराओं और डिजिटल कार्यप्रणाली से परिचित कराना है ताकि वे सदन में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
हरिवंश ने नए सांसदों को किन पूर्व नेताओं के भाषण सुनने की सलाह दी?
हरिवंश ने नए सदस्यों को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के संसदीय भाषणों को देखने-सुनने की सलाह दी। उन्होंने इसे आत्म-सुधार की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
राज्यसभा में डिजिटलीकरण का क्या असर हुआ है?
हरिवंश के अनुसार, बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण ने राज्यसभा को तेज़ी से पेपरलेस और अधिक कुशल बनाया है। सभी सदस्यों को आधिकारिक डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने सदस्यों को डिजिटल सुरक्षा एवं उभरती प्रौद्योगिकियों की जानकारी दी है।
नए राज्यसभा सदस्यों से आगे क्या अपेक्षाएँ हैं?
हरिवंश ने स्पष्ट किया कि ओरिएंटेशन कार्यक्रम सीखने की शुरुआत है, अंत नहीं। सदस्यों से अपेक्षा है कि वे संसदीय प्रक्रियाओं का निरंतर अध्ययन करें, डिजिटल सुरक्षा बनाए रखें और अन्य देशों की संसदीय परंपराओं से भी सीखें।
राष्ट्र प्रेस
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