सुनेत्रा पवार का राज्यसभा से इस्तीफा मंजूर, 6 मई से प्रभावी; बारामती उपचुनाव जीत के बाद लिया फैसला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने बुधवार, 6 मई को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में जाकर राज्यसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे राज्यसभा अध्यक्ष एवं उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उसी दिन से प्रभावी रूप से स्वीकार कर लिया। संसद बुलेटिन के अनुसार, यह इस्तीफा 6 मई 2026 से लागू माना जाएगा। इस्तीफे की वजह बारामती विधानसभा सीट से उनकी हालिया ऐतिहासिक जीत है, जिसके बाद दोहरी सदस्यता से बचने के लिए राज्यसभा छोड़ना संवैधानिक रूप से आवश्यक हो गया था।
मुलाकात और इस्तीफे का घटनाक्रम
सुनेत्रा पवार बुधवार को नई दिल्ली पहुँचीं और उपराष्ट्रपति भवन में सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। इस अवसर पर पार्थ पवार भी उनके साथ उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति के आधिकारिक सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया गया कि सुनेत्रा पवार ने राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा सौंप दिया और इसे 6 मई से प्रभावी रूप से स्वीकार कर लिया गया है। राधाकृष्णन ने उन्हें राष्ट्र सेवा जारी रखने और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के रूप में सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
बारामती उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत
सुनेत्रा पवार ने बारामती विधानसभा उपचुनाव में रिकॉर्ड मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। यह जीत कथित तौर पर भारत के किसी भी विधानसभा उम्मीदवार की अब तक की सबसे बड़ी जीत के अंतर के रूप में मानी जा रही है। चुनाव में कुल 23 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन किसी भी प्रतिद्वंद्वी का वोट 1,000 का आँकड़ा नहीं छू सका।
पृष्ठभूमि: अजित पवार का निधन और सुनेत्रा की राजनीतिक यात्रा
यह सीट अजित पवार के निधन के बाद रिक्त हुई थी। अजित पवार बारामती से विधायक थे और उन्होंने भी बड़े अंतर से चुनाव जीता था, किंतु विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया। इसके बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी की जिम्मेदारी संभाली और वर्तमान में वे महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के पद पर हैं। गौरतलब है कि वे इससे पहले महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाली निर्वाचित राज्यसभा सदस्य थीं।
संवैधानिक अनिवार्यता: क्यों देना पड़ा इस्तीफा
भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानसभा दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। बारामती उपचुनाव में जीत के बाद सुनेत्रा पवार के लिए राज्यसभा की सदस्यता त्यागना अनिवार्य हो गया था। अब वे पूर्णतः महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य और राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँगी।
आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि सुनेत्रा पवार की रिक्त हुई राज्यसभा सीट के लिए महाराष्ट्र में उपचुनाव की प्रक्रिया कब शुरू होती है और कौन-सी पार्टी इस सीट पर दावेदारी करती है।