सीपी राधाकृष्णन ने हरिवंश नारायण सिंह को बधाई दी, लोकतंत्र में मतभेद जरूरी हैं
सारांश
Key Takeaways
- हरिवंश नारायण सिंह का निर्विरोध चुनाव सभी दलों के विश्वास का प्रतीक है।
- मतभेद लोकतंत्र को समृद्ध बनाते हैं।
- उपराष्ट्रपति ने संसदीय गरिमा की आवश्यकता पर जोर दिया।
- हरिवंश का कार्यकाल गंभीरता और संतुलन से भरा रहा है।
- सर्वसम्मति से चुनाव ने लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत किया है।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के उपसभापति के रूप में निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई दी। राधाकृष्णन ने कहा कि हरिवंश का निर्विरोध चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इस सदन के सभी दलों और समूहों के बीच उनके प्रति गहरे विश्वास, सम्मान और भरोसे की एक मजबूत अभिव्यक्ति है।
उन्होंने यह भी कहा कि लगातार तीसरी बार इस उच्च संवैधानिक पद पर उनका पुनर्निर्वाचन एक विशेष उपलब्धि है। यह केवल निरंतरता नहीं दर्शाता, बल्कि उनके कर्तव्यों के निष्पादन में निष्पक्षता, संयम और लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। हरिवंश का कार्यकाल सदैव गंभीरता, संतुलन और शांत, प्रभावशाली नेतृत्व से भरा रहा है।
उन्होंने कहा कि वे सदन की सामूहिक बुद्धिमत्ता की सराहना करना चाहते हैं, जिसने उन्हें सर्वसम्मति से चुना। एक जीवंत लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक और आवश्यक होते हैं, क्योंकि वे हमारी चर्चाओं को समृद्ध बनाते हैं। लेकिन जब पूरा सदन एक स्वर में निर्णय लेता है, तो यह दर्शाता है कि हम सभी संसद की गरिमा, मर्यादा और संस्थागत सुदृढ़ता के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध हैं।
उपसभापति बनने के बाद हरिवंश ने सबसे पहले राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें राज्यसभा में मनोनीत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने नई दिशा पाई है। उन्होंने कहा कि वह नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ कार्य करने को सौभाग्य मानते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी इस सदन में सहयोगी हैं। लोकतंत्र में स्वस्थ वैचारिक प्रतिस्पर्धा का अधिकार है, लेकिन कटुता का कोई स्थान नहीं है। सदन के नियमों के अंतर्गत सभी विषयों को उठाने के लिए पर्याप्त अवसर हैं और हम सभी ने स्वेच्छा से इन नियमों का पालन करने का संकल्प लिया है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि वे संविधान, संसदीय नियमों और परंपराओं के दायरे में रहकर सदन की गरिमा, सदस्यों के अधिकारों और सहभागिता के लिए पूर्ण निष्ठा से कार्य करेंगे। आज 17 अप्रैल को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जन्मशती वर्ष का आरंभ हो रहा है, उनकी प्रेरणादायी स्मृति को वह नमन करते हैं। साथ ही, लोकनायक जयप्रकाश नारायण के प्रति भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
राज्यसभा में नेता सदन और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि आज का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव सर्वसम्मति से हुआ है, जो इस सदन की एकता और परिपक्व लोकतांत्रिक परंपरा को दर्शाता है। सभी दलों के नेताओं ने जिस प्रकार हरिवंश जी के बहुआयामी व्यक्तित्व को सामने रखा, उससे यह स्पष्ट है कि वे केवल एक पदाधिकारी नहीं, बल्कि एक समर्पित और सम्मानित सार्वजनिक व्यक्तित्व हैं।
नड्डा ने कहा कि हरिवंश जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव ईमानदारी, बौद्धिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। चाहे वह पत्रकारिता का क्षेत्र हो या संसदीय जीवन, उन्होंने अपने विचारों में स्पष्टता, संतुलन और समन्वय का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने जनचर्चा को दिशा दी, और एक सांसद के रूप में सदन की गरिमा को बनाए रखा।